Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

एकीकृत ( इंटिग्रेटेड ) फार्मिंग : जिसमें  कभी घाटा नहीं होगा

लेखक: के के अग्रवाल, कृषि इंजीनियर

23 सितंबर 2026, नई दिल्ली: एकीकृत ( इंटिग्रेटेड ) फार्मिंग : जिसमें  कभी घाटा नहीं होगा – खेती में ज्यादातर दो तरह से किसान हमेशा मारे जाते हैं। घाटा उठाते है।  पहला मौसम की मार आंधी, तूफान और अधिक बारिश की वजह से ठीक से फसल उत्पादन नहीं हो पाता है, और दूसरा उत्पादन अच्छा हुआ,भारी पैदावार हुई ,तो भी  मार्केट में भाव गिर जाने से किसानों को उचित रेट नहीं मिलना। अभी भी इतने वर्षों में  कुछ नहीं बदला, आज भी बहुत बार किसानों को अपनी फसल या तो फेंकनी पड़ती है या खेतों में खड़ी फसल जोतनी पड़ती है या उसे घाटा उठाना पड़ता है। ऐसे कभी भी किसान खेती से खुशहाल और समृद्ध नहीं हो पाएंगे। 

के के अग्रवाल, कृषि इंजीनियर

ऐसे में विचार आता है कि आखिर रास्ता क्या है ? वह कौन सी ऐसी खेती का मॉडल है, जिससे किसान सफल हों, समृद्ध हों, खुशहाल बनें और अच्छी  आमदनी ले पाएं। इसका समाधान है  एकीकृत ( इंटिग्रेटेड ) फार्मिंग।जिससे  खेती में कभी घाटा नहीं होगा। किसानों को खेती का यह मॉडल अपनाना चाहिए। हमारे पूर्वज भी इसी मॉडल से खेती करते थे।

मोनोक्रॉपिंग बंद हो– सबसे पहले किसानों को बड़े पैमाने पर मोनोक्रॉपिंग यानी किसी एक या दो फसल को उगाना बंद करना होगा, उसकी जगह पर जितना एरिया हो उसमें बांट -बांट कर  ज्यादा से ज्यादा फसलें लगानी होगी । जो फसलें जिस एरिया में हो सकती हैं, वह ज्यादा से ज्यादा अलग-अलग फसलें अलग-अलग खेतों में लगानी होगी । रबी मे गेहूं , चना, मसूर, अलसी, मटर, आदि खरीफ में धान,मक्का, सरसों, तिल, चिया आदि सब्जी में भी सभी प्रकार की सब्जी एरिया बांट – बांट कर लगानी चाहिए।

उत्पादन के साथ प्रोसेसिंग –  फसल उत्पादन के साथ-साथ किसान और  उनके बच्चों को, युवाओं, महिलाओ को, गांव में रह रहे पढ़े लिखे नवयुवकों को खेती के उत्पादन के साथ प्रोसेसिंग में भी आगे  आना होगा, यानी जो किसान अनाज उगाएं, सब्जियां उगाए उनको सीधे मार्केट  में  बेचने की बजाय उसके कुछ हिस्से का कोई ना कोई फाइनल प्रोडक्ट बना कर बेचना चाहिए, जिससे प्रोसेसिंग करके   किसानों को ज्यादा से ज्यादा मूल्य मिल पाए, और युवाओं के लिए भी एक स्टार्टअप , एक रोजगार खड़ा हो। जैसे  सरसों की जगह  सरसों का तेल, गेहूं की जगह दलिया और आटा, हल्दी धनिया की जगह हल्दी धनिया का पाउडर, गन्ने की जगह  गुड़  और सिरका, खड़ी दाल की जगह दाल बनाकर पैकिंग करके, धान बेचने की जगह चावल। आलू के चिप्स, मटर आदि अच्छी  पैकिंग  करके बेचा जाए।  खेती ऐसी की जाए जिससे हमें हर दिन साल भर आमदनी होती रहे, इसमें नगदी फसलें, साग सब्जी, फल-  फूल की खेती के साथ पशुपालन, मुर्गी व  मत्स्य  पालन, हरा चारा, उद्यानिकी व  मेड़ों पर अन्य  पेड़ लगाना भी सम्मलित करना होगा। ज्ञात हो हमारे पूर्वज भी यही करते थे । वैज्ञानिक इसे इंटिग्रेटेड या एकीकृत फार्मिंग कहते  हैं ।

एकीकृत  खेती के लाभ –  इस मॉडल की खेती से  सबसे पहला लाभ तो यह है  कि  किसान के परिवार के लिए अलग-अलग  फसलें दाल, सब्जी अनाज सब मिलता रहता है। दूसरा आंधी तूफान आएगा भी, अधिक वर्षा होगी भी तो कुछ फसलें खराब हो सकती हैं, पर सब खराब नहीं होंगी। किसान कभी घाटे में नहीं रहेगा। तीसरा लाभ महत्वपूर्ण है फसल चक्र  अपनाने से खेत की मिट्टी उपजाऊ बनी रहेगी, बायोडायवर्सिटी इकोसिस्टम बना रहेगा।महत्वपूर्ण लाभ यह होगा कि  किसी एक फसल का रेट नहीं मिलेगा ,तो दूसरी का मिलेगा, दूसरी का नहीं मिलेगा तो तीसरी का मिलेगा, आपके पास  पैसों  की आवश्यकता में बहुत ज्यादा किसी एक फसल को बेचने का दबाव नहीं होगा।

इमारती लकड़ी  के पौधे लगाएं – खेतों के किनारे – किनारे ऐसे इमारती लकड़ी वाले पौधे लगाने चाहिए जिससे 5, 10, 15, 20  वर्षों में एक मुफ्त रकम मिले. जैसे, पापुलर,सागौन, महोगनी, मालाबार नीम, यूकेलिप्टस, बांस और भी जो जिस एरिया में हो जाए और उसकी डिमांड वहां की मार्केट में हो।

खर्चे रोज के, तो इनकम भी रोज की हो – वर्तमान में किसान एक या दो फसलें लगाते  हैं।  बड़े-बड़े एरिया में गेहूं और धान, या ज्वार और बाजार, यह आलू और प्याज। यानी महीनों इंतजार करना है ,फसल तैयार होने का, लगातार लागत देनी है और रोज की कोई इनकम नहीं. जबकि खर्चे तो रोज के ही हैं। जब खर्चे रोज के हैं, तो इनकम भी रोज की होनी चाहिए । ऐसा मॉडल जब तक किसानों का नहीं बनेगा तब तक किसान सफल नहीं हो पाएंगे, समृद्ध नहीं हो पाएंगे। आत्मनिर्भर व खुशहाल नहीं हो पाएंगे।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture