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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

चीनी की स्टॉक-सीमा दोगुनी, त्योहारी सीजन से पहले सरकार का बड़ा फैसला, गन्ना किसानों की उम्मीदें बढ़ीं

22 सितंबर 2026, नई दिल्ली: चीनी की स्टॉक-सीमा दोगुनी, त्योहारी सीजन से पहले सरकार का बड़ा फैसला, गन्ना किसानों की उम्मीदें बढ़ीं –  त्योहारी सीजन शुरू होने से ठीक पहले केंद्र सरकार ने बड़े पैमाने पर चीनी इस्तेमाल करने वाले उद्योगों को राहत दी है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने 18 सितंबर को आदेश जारी कर उन थोक (बल्क) उपभोक्ताओं की स्टॉक रखने की सीमा 15 दिन से बढ़ाकर 30 दिन कर दी, जो कच्चे माल के तौर पर हर महीने 10 टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करते हैं।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब मिठाई और खाद्य उद्योग में त्योहारों की मांग बढ़ने लगी है और सरकार चाहती है कि चीनी की आपूर्ति में कोई रुकावट न आए। विभाग ने इसे बल्क उपभोक्ताओं के हितों और घरेलू चीनी बाजार की स्थिरता के बीच संतुलन बनाने वाला कदम बताया है।

किन शर्तों पर मिलेगी दोगुनी स्टॉक सीमा

आदेश के मुताबिक अतिरिक्त 15 दिन का स्टॉक सिर्फ आयातित चीनी से रखा जा सकेगा। यह छूट सिर्फ टैरिफ रेट कोटा (TRQ) या एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम (AAS) के तहत मंगाई गई चीनी पर ही लागू होगी।

घरेलू बाजार से सीधे खरीदी गई चीनी पर पुरानी 15 दिन की सीमा पहले की तरह ही लागू रहेगी। यानी सिर्फ आयात के जरिए ही कंपनियां ज्यादा स्टॉक जमा कर पाएंगी, घरेलू बाजार पर दबाव नहीं बढ़ेगा।

विभाग ने साथ ही टैरिफ रेट कोटा के तहत 10 लाख टन चीनी के आयात को मंजूरी दी है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी पात्र बल्क उपभोक्ताओं को अब हर शुक्रवार foodstock.dfpd.gov.in पोर्टल पर अपने स्टॉक की जानकारी अनिवार्य रूप से देनी होगी, ताकि सरकार बाजार पर लगातार नजर रख सके।

कीमतों में गिरावट के बीच गन्ना किसानों की उम्मीद

बीते कुछ महीनों में एक्स-मिल यानी मिल-गेट चीनी कीमतें करीब 25 प्रतिशत तक गिर चुकी हैं। इसके उलट खुदरा बाजार में कीमतें अगस्त के करीब ₹65 प्रति किलो के स्तर से घटकर अभी ₹58.50 प्रति किलो पर आई हैं, यानी सिर्फ करीब 10 प्रतिशत।

इस अंतर को देखते हुए सरकार चाहती है कि मिलों को मिली राहत का फायदा आम उपभोक्ताओं तक भी पहुंचे, न कि सिर्फ कारोबारी मार्जिन बढ़ाने में इस्तेमाल हो।

इसी बीच 1 अक्टूबर 2026 से नया गन्ना पेराई सीजन शुरू होने जा रहा है, जिसमें किसानों को गन्ने के लिए ₹365 प्रति क्विंटल का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) मिलेगा। मिलों की नकदी-स्थिति और चीनी बाजार में स्थिरता का सीधा असर इसी बात पर पड़ता है कि किसानों को गन्ने की कीमत समय पर और पूरी मिलेगी या नहीं, इसलिए स्टॉक-सीमा में यह ढील परोक्ष रूप से गन्ना किसानों के हितों से भी जुड़ी है।

बाजार जानकारों का कहना है कि अगर मिलों को अतिरिक्त चीनी स्टॉक रखने और बेचने की गुंजाइश मिलती है, तो उनकी नकदी उपलब्धता बेहतर होगी, जिससे किसानों को गन्ना भुगतान में होने वाली देरी कम हो सकती है। हालांकि यह लाभ किसानों तक कितनी तेजी से पहुंचता है, यह मिलों की अपनी वित्तीय स्थिति पर भी निर्भर करेगा।

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