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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

अगले 15-20 दिन रबी बुवाई के लिए निर्णायक, मौसम पर निर्भर करेगी कमी की भरपाई 

लेखक: शशिकांत त्रिवेदी, वरिष्ठ पत्रकार

07 नवंबर 2026, नई दिल्ली: अगले 15-20 दिन रबी बुवाई के लिए निर्णायक, मौसम पर निर्भर करेगी कमी की भरपाई –  देश में रबी फसलों की बुवाई पिछले साल की तुलना में 46 प्रतिशत पीछे चल रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 15 से 20 दिनों का मौसम इस कमी को पाटने में अहम भूमिका निभाएगा। अभी भी समय है कि किसान बुवाई में तेजी लाकर पिछड़ेपन को कम कर सकें। सरसों और चना जैसी फसलों की अधिकतम बुवाई 30 नवंबर तक पूरी हो जाती है। तापमान में गिरावट आने से बुवाई वाले क्षेत्रों में काम तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने कहा है कि मौसम बहुत गतिशील है और रबी सीजन के लिए जिलावार आकस्मिक योजनाएं लगातार अपडेट की जा रही हैं। अगले 15-20 दिन बुवाई की रिकवरी के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। पिछले साल की तुलना में दिख रही गिरावट का मतलब यह नहीं है कि बुवाई अंत में कम ही रहेगी। हर साल स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर बुवाई का समय अलग-अलग होता है। विशेषज्ञों और आंतरिक सूत्रों के मुताबिक अगले दो-तीन महीनों में मिट्टी स्वास्थ्य नीति जारी की जा सकती है। इस नीति का पहला मसौदा आईसीएआर पहले ही तैयार कर चुका है। सरकार का लक्ष्य देशभर में एक लाख मिट्टी स्वास्थ्य उद्यमी तैयार करने का भी है। कुल मिलाकर, विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अगर अगले दो-तीन हफ्तों में मौसम अनुकूल रहा और तापमान में गिरावट बनी रही, तो किसान बुवाई में तेजी लाकर काफी हद तक कमी की भरपाई कर सकते हैं। इस साल दलहन और तिलहन की बुवाई में कोई बड़ी समस्या नहीं दिख रही है और अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। उन्होंने बताया कि सरसों की खेती पारंपरिक क्षेत्रों राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के भरतपुर क्षेत्र से आगे बढ़कर कई गैर-पारंपरिक इलाकों में भी फैल गई है।

 कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 30 अक्टूबर तक पूरे देश में सरसों की बुवाई लगभग 21 लाख हेक्टेयर में हुई थी, जो पिछले साल की तुलना में 46 प्रतिशत कम है। सरसों का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य राजस्थान है। यहां 2 नवंबर तक बुवाई 16.86 लाख हेक्टेयर में हुई, जो पिछले साल के 26.62 लाख हेक्टेयर से 37 प्रतिशत कम है। लक्ष्य का सिर्फ 45 प्रतिशत हिस्सा ही पूरा हो पाया है, जबकि पिछले साल इस समय तक 74 प्रतिशत बुवाई हो चुकी थी। देश ने 2025-26 में रिकॉर्ड 137.68 लाख टन सरसों का उत्पादन किया था, जो 94.27 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से हासिल हुआ। इसमें राजस्थान का हिस्सा 42 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश का 19 प्रतिशत रहा।

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 अक्टूबर से अब तक प्रमुख गेहूं और सरसों उत्पादक क्षेत्रों में बारिश की स्थिति मिश्रित रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सामान्य से 34 प्रतिशत अधिक बारिश हुई, जबकि पूर्वी राजस्थान में 28 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। मध्य प्रदेश, जो देश के कुल सरसों क्षेत्र का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा रखता है, में बारिश काफी कम रही। पूर्वी हिस्से में 71 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 83 प्रतिशत की कमी बताई गई है। राज्य के अधिकारियों का कहना है कि सामान्य साल में अच्छी पैदावार के लिए सरसों की बुवाई 31 अक्टूबर तक पूरी हो जानी चाहिए। मध्य प्रदेश में फरवरी से तापमान बढ़ना शुरू हो जाता है, इसलिए देर से बुवाई होने पर उत्पादकता प्रभावित हो सकती है। फिलहाल किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और कृषि विभाग की आकस्मिक योजनाओं पर नजर रखें। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं )

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