उत्तराखंड-झारखंड समेत 6 राज्यों के जनजातीय किसानों को आलू की उन्नत खेती से जोड़ रहा ICAR-CPRI, 189 किसानों को मिला प्रशिक्षण
07 नवंबर 2026, नई दिल्ली: उत्तराखंड-झारखंड समेत 6 राज्यों के जनजातीय किसानों को आलू की उन्नत खेती से जोड़ रहा ICAR-CPRI, 189 किसानों को मिला प्रशिक्षण – जनजातीय किसानों को सशक्त बनाने और आलू उत्पादन बढ़ाने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (ICAR-CPRI) की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। संस्थान अपनी जनजातीय उप-योजना (TSP) के माध्यम से किसानों को उन्नत कृषि तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज और वैज्ञानिक मार्गदर्शन उपलब्ध करा रहा है। इसके तहत मध्य प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड, तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर के गुरेज और हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में 502 अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन आयोजित किए गए। वहीं, छह प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से 189 किसानों को लाभ मिला है।
जनजातीय क्षेत्रों के छोटे और सीमांत किसानों को खेती में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। गुणवत्तापूर्ण बीज सामग्री तक सीमित पहुंच, वैज्ञानिक मार्गदर्शन की कमी और पारंपरिक कम उपज वाली खेती पर निर्भरता के कारण उत्पादन प्रभावित होता है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए ICAR-CPRI किसानों को वैज्ञानिक तरीके से आलू की खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।
6 राज्यों में 502 अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन आयोजित
अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों और खेती की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने छह राज्यों और क्षेत्रों में 502 अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन (FLD) किए। इनमें किसानों को वैज्ञानिक आलू उत्पादन पद्धतियों की जानकारी दी गई। इन प्रदर्शनों से किसानों को अपने खेतों की परिस्थितियों में उन्नत तकनीकों के उपयोग और उनकी संभावनाओं को समझने का अवसर मिला।
इसके साथ ही संस्थान ने परिसर के भीतर और बाहर छह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए। इनमें 189 किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन और आलू की उन्नत खेती की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।
200 क्विंटल बीज कंद और 100 स्प्रेयर बांटे
किसानों को प्रशिक्षण के साथ खेती के लिए जरूरी संसाधन भी उपलब्ध कराए गए। उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाने में मदद के लिए करीब 200 क्विंटल बीज कंद वितरित किए गए। इसके अलावा 100 स्प्रेयर, जैव उर्वरक, सूक्ष्म पोषक तत्व और छोटे कृषि उपकरण भी दिए गए। इस पहल के तहत खेतों में प्रदर्शन, व्यावहारिक प्रशिक्षण और कृषि आदानों की उपलब्धता को एक साथ जोड़ा गया, ताकि किसान वैज्ञानिक जानकारी का इस्तेमाल अपनी खेती में कर सकें और आलू उत्पादन के बेहतर तरीके अपना सकें।
उत्तराखंड में 64.71% और झारखंड में 66.67% बढ़ी उपज
उन्नत किस्मों और वैज्ञानिक खेती के परिणाम भी सामने आए हैं। उत्तराखंड में कुफरी संगम किस्म की खेती से पारंपरिक खेती की तुलना में 64.71 प्रतिशत अधिक उपज दर्ज की गई। वहीं, झारखंड में कुफरी नीलकंठ किस्म से पारंपरिक पद्धति के मुकाबले 66.67 प्रतिशत अधिक उत्पादन मिला।
इन परिणामों से पता चलता है कि बेहतर किस्मों के बीज, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और जरूरी कृषि संसाधन मिलने पर आलू की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। ICAR-CPRI की जनजातीय उप-योजना के माध्यम से किसानों को पारंपरिक खेती की सीमाओं से आगे बढ़कर आलू उत्पादन की उन्नत पद्धतियां अपनाने के अवसर मिल रहे हैं। संस्थान का प्रयास है कि अलग-अलग कृषि क्षेत्रों तक वैज्ञानिक तकनीक पहुंचाकर जनजातीय किसानों की क्षमता मजबूत की जाए और उनकी आजीविका को बेहतर बनाने में सहयोग दिया जा सके।
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