केंद्र सरकार की दो टूक: डेयरी और GM आयात पर कोई समझौता नहीं — पीयूष गोयल
06 नवंबर 2026, नई दिल्ली: केंद्र सरकार की दो टूक: डेयरी और GM आयात पर कोई समझौता नहीं — पीयूष गोयल – केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि भारत अपने डेयरी क्षेत्र को किसी भी व्यापार समझौते में नहीं खोलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जीन संवर्धित यानी GM उत्पादों के आयात की अनुमति भी देश में कभी नहीं दी जाएगी।
दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज में छात्रों के बीच बोलते हुए गोयल ने यह बात कही। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है।
डेयरी को लेकर संवेदनशील रुख बरकरार
गोयल ने कहा, “हम डेयरी खोलने को लेकर बहुत संवेदनशील हैं। आज तक हमने किसी के लिए डेयरी क्षेत्र नहीं खोला है।” उनके इस बयान से साफ है कि सरकार डेयरी क्षेत्र को लेकर अपनी पुरानी नीति पर ही कायम है।
अमेरिका लंबे समय से भारतीय डेयरी बाजार में अपने उत्पादों के लिए पहुंच मांगता रहा है। लेकिन भारत सरकार का रुख रहा है कि डेयरी क्षेत्र देश के करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका से जुड़ा है, इसलिए इसे व्यापार वार्ताओं से बाहर रखा जाता है। भारत में डेयरी पालन करने वाले अधिकतर किसानों के पास औसतन एक या दो दुधारू पशु ही होते हैं, और उनका मुकाबला बड़े, सब्सिडी-प्राप्त विदेशी डेयरी उद्योगों से नहीं हो सकता।
GM उत्पादों के आयात पर भी रोक बरकरार
GM फसलों और उत्पादों को लेकर भी गोयल ने सख्त रुख दोहराया। उनके शब्दों में, “हम भारत में किसी भी GM उत्पाद को आने की अनुमति न देने को लेकर बहुत संवेदनशील हैं।” उन्होंने कहा कि भारत ने आज तक GM उत्पादों के आयात की इजाजत नहीं दी है और आगे भी नहीं देगा।
GM सोयाबीन और मक्के जैसी फसलों के आयात को लेकर अमेरिका कई बार अपनी मांग रख चुका है, लेकिन घरेलू किसान संगठनों और बीज कंपनियों की चिंता रही है कि इससे देसी बीज किस्मों, बाजार कीमतों और उपभोक्ताओं की सेहत पर असर पड़ सकता है। भारत में अब तक सिर्फ बीटी कॉटन यानी कपास की एक GM किस्म को खेती के लिए मंजूरी मिली है, खाद्य फसलों में किसी GM किस्म को अनुमति नहीं है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, और डेयरी क्षेत्र देश के लाखों ग्रामीण परिवारों की आय का प्रमुख जरिया है। यही वजह है कि संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे देशों के साथ हुए व्यापार समझौतों में भी भारत ने डेयरी क्षेत्र को बातचीत से बाहर रखा था। गोयल का बयान बताता है कि सरकार इस रुख से अब भी पीछे हटने को तैयार नहीं है।
गोयल का यह बयान किसान संगठनों के लिए राहत की खबर माना जा सकता है, क्योंकि व्यापार समझौतों के दौर में डेयरी और GM दोनों मुद्दों पर अक्सर अनिश्चितता बनी रहती है। छोटे डेयरी किसानों और बीज उत्पादक किसानों की ओर से समय-समय पर यह मांग उठती रही है कि व्यापार वार्ताओं में उनके हितों से समझौता न किया जाए।
मंत्री के बयान से यह साफ संकेत मिलता है कि सरकार इन दोनों क्षेत्रों को लेकर अपनी स्थिति में कोई बदलाव नहीं करने जा रही। आने वाले दिनों में जब भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की बातचीत आगे बढ़ेगी, तब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार अपने इस रुख को किस तरह कायम रखती है।
डेयरी और कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को बाहर रखते हुए भारत ने इससे पहले भी कपड़ा, दवा और सेवा क्षेत्र जैसे दूसरे क्षेत्रों में व्यापार समझौतों से फायदा उठाने की कोशिश की है। इससे यह भी साफ होता है कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा और व्यापार विस्तार, दोनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में जुटी है।
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