टमाटर की खेती में स्वर्णा अनमोल का कमाल, प्रति हेक्टेयर 1.93 लाख रुपये ज्यादा मुनाफा
06 नवंबर 2026, नई दिल्ली: टमाटर की खेती में स्वर्णा अनमोल का कमाल, प्रति हेक्टेयर 1.93 लाख रुपये ज्यादा मुनाफा – त्रिपुरा के धलाई जिले के उत्तर कछुचेरा गांव के किसान कृष्ण गोपाल दास के लिए टमाटर की खेती में जीवाणु म्लानि रोग बड़ी समस्या बना हुआ था। इस रोग के कारण खेत में लगे कई पौधे नष्ट हो जाते थे, जिससे उत्पादन और कमाई दोनों प्रभावित हो रहे थे। इस समस्या से निपटने के लिए उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), धलाई की सलाह पर वर्ष 2024-25 में टमाटर की रोग प्रतिरोधी संकर किस्म ‘स्वर्णा अनमोल’ को अपनाया। इसके परिणाम बेहतर रहे। इस किस्म से न केवल रोग का प्रकोप कम हुआ, बल्कि टमाटर की उपज में भी 29.65 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। आर्थिक आकलन के अनुसार, इस किस्म से प्रति हेक्टेयर 1.93 लाख रुपये अधिक शुद्ध मुनाफा मिला।

केवीके ने किया किस्म का खेत स्तर पर परीक्षण
धलाई जिले में टमाटर की खेती के दौरान किसानों को जीवाणु म्लानि, टमाटर पत्ती कुंचन, अगेती और पछेती झुलसा जैसे रोगों के साथ-साथ फल छेदक कीट, खेतों में जलभराव और पोषक तत्वों के असंतुलित उपयोग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। इन चुनौतियों को देखते हुए केवीके धलाई ने वर्ष 2024-25 में किसान के खेत पर उन्नत संकर किस्म ‘स्वर्णा अनमोल’ का परीक्षण किया।
यह परीक्षण ICAR-ATARI जोन-VII, उमियम, मेघालय के तकनीकी मार्गदर्शन में किया गया। इस किस्म का विकास ICAR-RCER, पटना, बिहार ने किया है। परीक्षण के दौरान स्वर्णा अनमोल की तुलना किसान द्वारा पहले इस्तेमाल की जा रही संकर किस्म NS 962 से की गई।
जीवाणु म्लानि का प्रकोप 84.5% तक कम
परीक्षण में स्वर्णा अनमोल किस्म के पौधों की स्थापना और जीवित रहने की क्षमता बेहतर पाई गई। रोपाई के बाद पौधों की स्थापना दर 96.4 प्रतिशत रही, जबकि NS 962 में यह 88.2 प्रतिशत थी। फसल के अंतिम चरण में स्वर्णा अनमोल के 94.6 प्रतिशत पौधे जीवित रहे, जबकि पुरानी किस्म में यह आंकड़ा 84.8 प्रतिशत रहा।
सबसे महत्वपूर्ण अंतर जीवाणु म्लानि रोग के प्रकोप में देखने को मिला। स्वर्णा अनमोल में इस रोग का प्रकोप केवल 1.8 प्रतिशत रहा, जबकि NS 962 में यह 11.6 प्रतिशत दर्ज किया गया। इस तरह रोग के प्रकोप में 84.5 प्रतिशत की कमी आई। इसके अलावा स्वर्णा अनमोल में टमाटर पत्ती कुंचन और अगेती-पछेती झुलसा का प्रकोप भी तुलनात्मक रूप से कम रहा।
प्रति हेक्टेयर 586 क्विंटल तक पहुंची उपज
उत्पादन के लिहाज से भी स्वर्णा अनमोल ने बेहतर प्रदर्शन किया। इस किस्म से प्रति हेक्टेयर 58.60 टन यानी 586 क्विंटल बाजार योग्य टमाटर का उत्पादन मिला। वहीं, NS 962 से 45.20 टन यानी 452 क्विंटल उपज प्राप्त हुई। इस तरह स्वर्णा अनमोल से प्रति हेक्टेयर 13.40 टन यानी 134 क्विंटल अधिक उत्पादन हुआ। यह पुरानी किस्म की तुलना में 29.65 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।
स्वर्णा अनमोल में प्रति पौधे औसतन 47.2 फल मिले, जबकि NS 962 में यह संख्या 30.8 रही। स्वर्णा अनमोल के फलों का औसत वजन 68.4 ग्राम था, जो NS 962 के 94.6 ग्राम से कम था। हालांकि, प्रति पौधे फलों की अधिक संख्या और बाजार योग्य फलों का प्रतिशत ज्यादा होने से कुल बाजार योग्य उत्पादन बेहतर रहा। स्वर्णा अनमोल में 89.5 प्रतिशत फल बाजार में बेचने योग्य पाए गए, जबकि NS 962 में यह आंकड़ा 82.6 प्रतिशत था।
एक हेक्टेयर में 6.83 लाख रुपये का शुद्ध लाभ
आर्थिक आकलन में भी स्वर्णा अनमोल बेहतर साबित हुई। 15 रुपये प्रति किलोग्राम की अनुमानित बाजार कीमत के आधार पर इस किस्म से प्रति हेक्टेयर 8.79 लाख रुपये की सकल आय प्राप्त हुई। इसकी खेती पर करीब 1.96 लाख रुपये की लागत आई। इस तरह शुद्ध लाभ 6.83 लाख रुपये रहा।
वहीं, NS 962 से प्रति हेक्टेयर 6.78 लाख रुपये की सकल आय और 4.90 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। इसकी खेती की लागत करीब 1.88 लाख रुपये रही। दोनों किस्मों की तुलना में स्वर्णा अनमोल से प्रति हेक्टेयर 1.93 लाख रुपये अधिक शुद्ध लाभ मिला। इसका लाभ-लागत अनुपात 4.48:1 रहा, जबकि NS 962 का अनुपात 3.61:1 था।
किसान को एक कानी में 30,880 रुपये का अतिरिक्त लाभ
किसान कृष्ण गोपाल दास ने स्वर्णा अनमोल की खेती करीब 0.16 हेक्टेयर यानी एक कानी जमीन पर की। इस क्षेत्र में बाजार योग्य उत्पादन का अनुमान 9,376 किलोग्राम रहा। 15 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से सकल आय 1,40,640 रुपये और शुद्ध लाभ 1,09,280 रुपये आंका गया। वहीं, इसी क्षेत्र में NS 962 से शुद्ध लाभ 78,400 रुपये अनुमानित था। इस तरह एक कानी जमीन पर स्वर्णा अनमोल से करीब 30,880 रुपये का अतिरिक्त शुद्ध लाभ मिला।
किसान के अनुसार, पहले जीवाणु म्लानि रोग के कारण टमाटर के कई पौधे नष्ट हो जाते थे। स्वर्णा अनमोल लगाने के बाद पौधों का बचाव बेहतर रहा, उनकी बढ़वार अच्छी हुई और फसल की तुड़ाई की अवधि भी लंबी रही। हालांकि, इस किस्म के फल पुरानी किस्म की तुलना में छोटे थे, लेकिन प्रति पौधे फलों की संख्या अधिक होने से कुल बाजार योग्य उत्पादन बढ़ा।
किसान ने अपने अनुभव स्थानीय किसानों के साथ भी साझा किए। स्वर्णा अनमोल के इस प्रदर्शन से क्षेत्र में टमाटर की खेती करने वाले किसानों को रोग का प्रकोप कम करने, उत्पादन बढ़ाने और बेहतर आय प्राप्त करने का एक विकल्प मिला है। हालांकि, फसल का वास्तविक उत्पादन और लाभ मौसम, रोगों के प्रकोप, खेती की तकनीक और बाजार में मिलने वाली कीमत पर निर्भर करेगा।
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