पांढुर्णा: कपास में जड़ सड़न और मुरझान के लक्षण, वैज्ञानिकों ने खेतों का निरीक्षण कर लिए नमूने
20 सितंबर 2026, पांढुर्णा: पांढुर्णा: कपास में जड़ सड़न और मुरझान के लक्षण, वैज्ञानिकों ने खेतों का निरीक्षण कर लिए नमूने – मध्यप्रदेश के पांढुर्णा जिले में कपास की फसल में दिखाई दे रहे असामान्य रोग लक्षणों के बीच केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान (CICR), नागपुर के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। टीम ने छत्रापुर, गंगातवाड़ा और पिपलानारायणवार गांवों में कपास के खेतों का निरीक्षण कर फसल की स्थिति का जायजा लिया और किसानों से फसल प्रबंधन एवं रोग से जुड़ी जानकारी ली।
जड़ और तने में दिखे रोग के लक्षण
निरीक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने रोगग्रस्त पौधों की जड़, तना और अन्य हिस्सों में दिखाई दे रहे लक्षणों का बारीकी से अवलोकन किया। प्रभावित खेतों की स्थिति, रोग के फैलाव और फसल की वर्तमान अवस्था का भी अध्ययन किया गया। वैज्ञानिकों ने किसानों से कपास की किस्म, बुवाई का समय, खेत में पूर्व में ली गई फसल, सिंचाई व्यवस्था और फसल प्रबंधन की जानकारी ली। इसके अलावा पूरे मौसम में इस्तेमाल किए गए कीटनाशक, फफूंदनाशक और अन्य कृषि रसायनों के बारे में भी जानकारी जुटाई गई।
मृदा जनित रोगजनकों की संभावना
वैज्ञानिकों के प्रारंभिक अवलोकन के अनुसार खेतों में दिखाई दे रहे लक्षण मृदा जनित रोगजनकों से संबंधित प्रतीत हो रहे हैं। प्रभावित पौधों में मुख्य रूप से जड़ सड़न (रूट रॉट) और फफूंदजनित म्लानि या मुरझान (फंगल विल्ट) जैसे लक्षण पाए गए हैं। हालांकि रोग के वास्तविक कारक की निश्चित पहचान के लिए वैज्ञानिक परीक्षण और प्रयोगशाला जांच जरूरी है। इसी क्रम में वैज्ञानिकों ने प्रभावित खेतों से मिट्टी और कपास के पौधों के नमूने लिए हैं। इन नमूनों और खेतों से प्राप्त अवलोकनों के आधार पर आगे वैज्ञानिक जांच एवं अनुसंधान किया जाएगा।
बिना सलाह रसायनों का उपयोग न करें
वैज्ञानिकों ने किसानों को प्रभावित फसलों की नियमित निगरानी करने और बिना वैज्ञानिक सलाह के किसी भी कृषि रसायन का अनावश्यक इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी। जांच के परिणामों के आधार पर रोग के प्रभावी प्रबंधन के लिए आवश्यक अनुशंसाएं किसानों को उपलब्ध कराई जाएंगी। इस दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों की समस्याओं को सीधे खेत स्तर पर समझा और कपास की फसल में उत्पन्न समस्या के समाधान के लिए किसान-वैज्ञानिक संवाद को महत्वपूर्ण बताया। क्षेत्र में कपास की फसल में रोग की स्थिति की आगे भी निगरानी और वैज्ञानिक अध्ययन जारी रहेगा।
ये अधिकारी और किसान रहे मौजूद
निरीक्षण के दौरान केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान, नागपुर के पौध रोग विशेषज्ञ डॉ. दिलीप तुकाराम नगराले और डॉ. प्रियंक म्हात्रे, कृषि विभाग से अनुविभागीय कृषि अधिकारी सौंसर अर्चना डोंगरे, कृषि विस्तार अधिकारी कैलाश धुर्वे और अंकिता शर्मा, किसान संघ सौंसर के अध्यक्ष आशीष पराडकर, कृषक खुशाल पराडकर, दिनेश गोरे सहित अन्य किसान मौजूद रहे।
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