झारखंड में महिला किसान खुशहाली योजना शुरू, प्रति किसान ₹7 लाख तक मदद
20 सितंबर 2026, रांची: झारखंड में महिला किसान खुशहाली योजना शुरू, प्रति किसान ₹7 लाख तक मदद – झारखंड सरकार ने महिला किसानों की आय बढ़ाने के मकसद से नई “महिला किसान खुशहाली योजना” शुरू की है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना का बजट 25 करोड़ रुपये रखा गया है, और शुरुआती चरण में राज्य के हर जिले से 70 महिला किसानों को चुना जाएगा।
एकीकृत खेती मॉडल पर मिलेगी ₹7 लाख तक सहायता
योजना के तहत महिला किसानों को फसल उत्पादन, बागवानी और पशुपालन को मिलाकर एकीकृत खेती प्रणाली (इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम) अपनाने पर सहायता दी जाएगी। इसके लिए एक किसान को अधिकतम 7 लाख रुपये तक की मदद मिल सकती है। यह मॉडल इसलिए चुना गया है ताकि महिला किसानों की आय सिर्फ एक फसल या एक व्यवसाय पर निर्भर न रहकर कई स्रोतों से आए और मौसम की मार का असर कम हो।
राज्य के 24 जिलों में यह योजना पहले चरण में लागू होगी, और हर जिले से 70 महिला किसानों की पहचान की जाएगी। चुनी गई किसानों को आधुनिक खेती तकनीक की ट्रेनिंग दी जाएगी, साथ ही उनकी उपज को बाजार से जोड़ने में भी मदद की जाएगी, ताकि उन्हें अपनी फसल का उचित दाम मिल सके और बिचौलियों पर निर्भरता घटे।
यह योजना 3 सितंबर को रांची में हुई एक कार्यशाला में तैयार हुई थी, जिसमें बिरसा कृषि विश्वविद्यालय और गैर-सरकारी संगठनों की भागीदारी रही। कृषि विभाग इसे “महिला किसानों द्वारा डिज़ाइन, सरकार द्वारा समर्थित” योजना बता रहा है। साल 2026 को “अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष” के तौर पर मनाया जा रहा है, और यह योजना उसी क्रम में लाई गई है।
कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज के मुताबिक योजना को “महिला किसानों द्वारा डिज़ाइन और सरकार द्वारा समर्थित” बनाया जाएगा, और अधिकारी सीधे किसानों से बातचीत कर यह तय करेंगे कि “वास्तव में किस तरह की मदद जरूरी है।” राज्य की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि सरकार का मकसद महिला किसानों को “आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण, बेहतर खेती मॉडल और बाजार तक पहुंच” उपलब्ध कराना है।
पंजीयन और चयन प्रक्रिया
विभागीय जानकारी के मुताबिक महिला किसानों का चयन जिला स्तर पर होगा, और स्थानीय कृषि अधिकारी सीधे संपर्क कर आवेदन प्रक्रिया में मदद करेंगे। हालांकि योजना की विस्तृत आवेदन गाइडलाइन अभी सार्वजनिक रूप से जारी नहीं हुई है, इसलिए इच्छुक महिला किसानों को अपने जिला कृषि कार्यालय से संपर्क में रहने की सलाह दी गई है।
कृषि विभाग का कहना है कि योजना के पहले चरण के नतीजों के आधार पर आने वाले वर्षों में इसका दायरा और बजट दोनों बढ़ाए जा सकते हैं। फिलहाल विभाग का ध्यान चुनी गई 70-70 किसानों के समूह को प्रशिक्षण और बाजार संपर्क से जोड़ने पर केंद्रित है।
महिला किसानों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
कृषि विभाग के मुताबिक इस योजना को तैयार करने से पहले सीधे महिला किसानों से बातचीत की गई, ताकि योजना कागजों पर बनी सामान्य योजना न रहकर वास्तव में उनकी जरूरतों के मुताबिक हो। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की मदद से यह भी तय किया जाएगा कि किस जिले में फसल, बागवानी या पशुपालन में से किस मॉडल को प्राथमिकता दी जाए, क्योंकि झारखंड के अलग-अलग हिस्सों की मिट्टी और मौसम अलग-अलग हैं।
अधिकारियों का कहना है कि एकीकृत खेती मॉडल अपनाने से महिला किसानों को साल भर किसी न किसी स्रोत से आमदनी मिलती रहेगी, चाहे वह सब्जी की फसल हो, फलदार पेड़ हों या मुर्गीपालन-बकरीपालन जैसा पशुपालन। इससे किसी एक फसल के खराब होने या बाजार भाव गिरने का असर पूरी आमदनी पर नहीं पड़ेगा।
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