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राज्य कृषि समाचार (State News)

मंदसौर: बैंक की नौकरी छोड़ पॉलीहाउस में शुरू की पान की खेती, बदल गई किस्मत; अब दिल्ली तक पहुंच रही फसल    

20 सितंबर 2026, मंदसौर: मंदसौर: बैंक की नौकरी छोड़ पॉलीहाउस में शुरू की पान की खेती, बदल गई किस्मत; अब दिल्ली तक पहुंच रही फसल – मध्यप्रदेश शासन की योजनाओं का लाभ लेकर भानपुरा के किसान अनिल बंबोरिया ने पारंपरिक पान की खेती को आधुनिक तरीके से अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाई है। पहले बैंक में नौकरी करने वाले अनिल को सीमित वेतन मिलता था। परिवार की परंपरागत पान की खेती को बड़े स्तर पर करने के लिए उन्होंने पॉलीहाउस तकनीक अपनाई। इसके लिए उद्यानिकी विभाग की हितग्राही मूलक योजना के तहत उन्हें 50 प्रतिशत सब्सिडी मिली।

₹2.67 लाख की सब्सिडी से तैयार किया पॉलीहाउस

अनिल बंबोरिया ने बताया कि अध्ययन के बाद उन्हें जानकारी मिली कि पॉलीहाउस में पान की खेती बेहतर तरीके से की जा सकती है और इससे अधिक आमदनी भी प्राप्त होती है। पॉलीहाउस बनाने के लिए उनके पास पर्याप्त राशि नहीं थी। उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से जानकारी मिलने के बाद उन्होंने योजना के तहत आवेदन किया। प्रकरण स्वीकृत होने पर उन्हें ₹2.67 लाख की सब्सिडी मिली। इतनी ही राशि उन्होंने हितग्राही अंशदान के रूप में लगाई। करीब ₹5.5 लाख की लागत से उन्होंने वर्ष 2021-22 में पॉलीहाउस तैयार कर पान की खेती शुरू की।

उत्पादन बढ़ा, फसल भी नुकसान से बची

किसान के अनुसार, शुरुआती दो वर्षों में अच्छी आय मिलने से उत्साहित होकर उन्होंने शासन की योजना के माध्यम से एक और पॉलीहाउस तैयार कर लिया। उन्होंने बताया कि पारंपरिक पनवाड़ी मात्र एक से डेढ़ वर्ष में नष्ट हो जाती थी, जबकि पॉलीहाउस में पनवाड़ी 15 से 20 वर्ष तक चल सकती है। इससे पान का उत्पादन भी करीब डेढ़ गुना तक बढ़ गया है। अनिल ने बताया कि पारंपरिक पनवाड़ी में आंधी-तूफान, बारिश और गर्मी के कारण फसल को काफी नुकसान होता था। बारिश में जड़ों में बीमारी लगने और जड़ गलने की समस्या होती थी, जबकि सर्दियों में पत्ते जल जाते थे। पॉलीहाउस में पान की फसल इन समस्याओं से काफी हद तक सुरक्षित रहती है।

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एक्सप्रेसवे से दिल्ली मंडी तक पहुंच रही फसल

अनिल बंबोरिया ने बताया कि जिले में एक्सप्रेसवे के निर्माण से भी उनकी पान की खेती को फायदा हुआ है। वे अपनी पान की फसल दिल्ली मंडी भेजते हैं। पहले परिवहन में अधिक समय लगने के कारण फसल खराब होने से आर्थिक नुकसान होता था। अब एक्सप्रेसवे के कारण उनकी पान की फसल दूसरे ही दिन दिल्ली मंडी पहुंच जाती है। इससे फसल खराब होने की संभावना कम हुई है और अच्छा भाव मिलने की भी सुविधा हो रही है।

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30-40 किसानों ने अपनाई पान की खेती

अनिल की सफलता से प्रेरित होकर आसपास के करीब 30 से 40 किसान पान की खेती के लिए आगे आए हैं। मुख्यमंत्री जन-विश्वास शिविर के दौरान अनिल ने कलेक्टर दिव्यांक सिंह से मुलाकात कर पॉलीहाउस में पान की खेती करने की इच्छा जताई। कलेक्टर ने किसानों को हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया और किसानों की मांग पर पान कृषकों का क्लस्टर बनाने के निर्देश संबंधित विभाग को दिए। अनिल बंबोरिया ने किसानों से पॉलीहाउस में पान की खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को अधिक लाभ मिल सकता है। उन्होंने अपनी सफलता में शासन की योजनाओं के योगदान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया।

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