राज्य कृषि समाचार (State News)

सिवनी: सोयाबीन फसल में रोग एवं कीटों की नियमित निगरानी करें किसान, वैज्ञानिक सलाह के अनुसार करें नियंत्रण

20 सितंबर 2026, सिवनीसिवनी: सोयाबीन फसल में रोग एवं कीटों की नियमित निगरानी करें किसान, वैज्ञानिक सलाह के अनुसार करें नियंत्रण – कृषि विज्ञान केंद्र सिवनी के वैज्ञानिकों द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में किसानों के सोयाबीन फसल प्रक्षेत्रों का भ्रमण कर फसल की स्थिति का निरीक्षण किया गया। इस दौरान किसानों द्वारा पीला मोजेक रोग, सफेद मक्खी, गर्डल बीटल एवं विभिन्न प्रकार की इल्लियों के प्रकोप की जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने प्रक्षेत्र पर फसल का अवलोकन करते हुए रोग एवं कीटों की पहचान, रोकथाम तथा नियंत्रण के संबंध में किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया।

कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. शेखर सिंह बघेल, वैज्ञानिक डॉ. निखिल सिंह एवं डॉ. जी.के. राणा ने किसानों को बताया कि सोयाबीन में पीला मोजेक रोग विषाणुजनित रोग है। इसका सीधा उपचार नहीं होता, बल्कि रोग के प्रसार को रोकना महत्वपूर्ण है। सफेद मक्खी इस रोग के प्रसार में प्रमुख भूमिका निभाती है। अत: खेत में सफेद मक्खी की नियमित निगरानी एवं प्रभावी नियंत्रण आवश्यक है।

पीला मोजेक एवं सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए सलाह

वैज्ञानिकों ने बताया कि फसल में पीला मोजेक के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर रोगग्रस्त पौधों को जड़ सहित उखाड़कर खेत से बाहर मिट्टी में दबा दें अथवा नष्ट करें। सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए अनुशंसित कीटनाशकों में से किसी एक का उपयोग कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार किया जा सकता है। इनमें एसिटामिप्रिड 25% + बायफेन्थ्रिन 25% WG 100 ग्राम प्रति एकड़, थायमेथॉक्सम 25% WG 40 ग्राम प्रति एकड़, इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL 50-60 मिलीलीटर प्रति एकड़ तथा फ्लोनिकामिड 50% WG 80 ग्राम प्रति एकड़ प्रमुख हैं। 

दवाओं का उपयोग 150-200 लीटर पानी में निर्धारित मात्रा के अनुसार किया जाए। बीटा-सायफ्लुथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड OD 140 मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर से उपयोग करने पर सफेद मक्खी के साथ गर्डल बीटल एवं सेमीलूपर इल्ली के नियंत्रण में भी सहायता मिलती है।

इल्लियों एवं गर्डल बीटल की रोकथाम

सोयाबीन में तम्बाकू की इल्ली, चना फली छेदक, सेमीलूपर एवं गर्डल बीटल जैसी कीट समस्याएं पत्तियों, तनों एवं फलियों को नुकसान पहुंचाकर उत्पादन प्रभावित कर सकती हैं। इनके नियंत्रण के लिए टेट्रानिलिप्रोल 18.18% SC 100-120 मिलीलीटर प्रति एकड़, क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5% SC 60 मिलीलीटर प्रति एकड़ तथा पत्ती खाने वाली इल्लियों के लिए एमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG 80-100 ग्राम प्रति एकड़ की दर से उपयोग की सलाह दी गई है। गर्डल बीटल एवं तना मक्खी के नियंत्रण के लिए थायमेथॉक्सम 12.6% + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 9.5% ZC 50 मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर से उपयोग किया जा सकता है।

खेत में नियमित निगरानी एवं पीले चिपचिपे ट्रैप लगाएं

वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी कि खेत में पीला मोजेक से संक्रमित शुरुआती पौधों की पहचान होते ही उन्हें तुरंत हटाएं। सफेद मक्खी की निगरानी एवं नियंत्रण के लिए प्रति एकड़ 20 पीले चिपचिपे ट्रैप लगाए जाएं। साथ ही कीटनाशकों के लगातार एक ही तकनीकी समूह के उपयोग से बचते हुए अलग-अलग तकनीकी समूह की दवाओं का क्रम बदलकर उपयोग करें, ताकि कीटों में दवा के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित न हो। कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों से अपील की है कि सोयाबीन फसल का नियमित निरीक्षण करें तथा रोग एवं कीटों के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर समय रहते वैज्ञानिकों अथवा कृषि विशेषज्ञों से तकनीकी सलाह प्राप्त कर अनुशंसित उपाय अपनाएं।

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