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राज्य कृषि समाचार (State News)

पॉयलेट आधार पर प्राकृतिक कृषि करने में मध्यप्रदेश आगे :  मुख्यमंत्री श्री चौहान

मध्यप्रदेश फसल विविधिकरण प्रोत्साहन योजना 3 वर्ष के लिये लागू

5 अगस्त 2022, भोपाल: पॉयलेट आधार पर प्राकृतिक कृषि करने में मध्यप्रदेश आगे :  मुख्यमंत्री श्री चौहान – मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश में पायलट आधार पर प्राकृतिक कृषि के लिए क्षेत्र चयनित कर कार्य प्रारंभ किया गया है। इस दिशा में मध्यप्रदेश अन्य राज्यों से आगे बढ़ रहा है। निश्चित ही किसानों द्वारा रूचि लिए जाने से प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने का कार्य आसान होगा। जिन कृषकों ने प्राकृतिक खेती प्रारंभ की है उनके कार्यों को देख कर अन्य किसान इसके लिए प्रेरित होंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि गेहूं और धान के स्थान पर प्राकृतिक कृषि में अन्य फसलें लिए जाने की पहल की गई है। सोयाबीन का रकबा कम न हो क्योंकि यह भी राज्य की आवश्यकता है। किसानों द्वारा गेहूं और धान के स्थान पर अन्य उत्पादन लेने के प्रयास सराहनीय है

देश में अग्रणी

मध्यप्रदेश कृषि के क्षेत्र में देश में अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश में गेहूँ एवं धान के रकबे तथा उत्पादन में अत्यधिक वृद्धि हुई है। प्रदेश में माँग आधारित फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के लिये ‘मध्यप्रदेश फसल विविधिकरण प्रोत्साहन योजनाÓ शुरू की जा रही है। ये योजना वर्ष 2022-23 से 3 वर्ष के लिये लागू होगी। योजना से किसानों के आर्थिक हित को दृष्टिगत रखते हुए फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जायेगा।

प्रदेश की प्रमुख फसलें

प्रदेश में खरीफ सीजन धान एवं सोयाबीन आधारित है, जबकि रबी की प्रमुख फसल- गेहूँ रही है। प्रदेश के कृषि जलवायु क्षेत्र और मौसम में विविधता होने से कुछ फसलों में पर्यावरण असंतुलन की स्थिति को देखते हुए सरकार फसल विविधिकरण को बढ़ावा दे रही है। रबी के 134 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूँ का क्षेत्रफल 98.29 लाख हेक्टेयर है और खरीफ के 148 लाख हेक्टेयर कुल क्षेत्रफल में धान का क्षेत्र 34.04 लाख हेक्टेयर है। प्रदेश में 24 जिलों में गेहूँ तथा धान में से कोई एक फसल 80 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रफल में ली जाती है। प्रदेश में 4 जिले ऐसे हैं, जिनमें गेहूँ तथा धान, दोनों में ही 80 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रफल में फसल ली जाती है।

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लाभकारी फसलों को प्रोत्साहन

श्री चौहान ने कहा फसल विविधिकरण प्रोत्साहन योजना से धान और गेहूँ के स्थान पर लाभकारी फसलों को प्रोत्साहित किया जायेगा। कृषि  जलवायु क्षेत्र आधारित उपयुक्त अन्य लाभकारी फसलें लगाएंगे। ऐसी किस्मों को बढ़ावा दिया जायेगा, जो सरकारी खरीद पर निर्भर नहीं हैं और बाजार और निर्यात मांग से प्रेरित हैं। रागी, जौ, मोटे अनाज, कोदो-कुटकी, रामतिल, तिल, मसाले, औषधीय फसलें, फल और सब्जियों आदि को बढ़ावा देंगे।

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योजना के 3 आधार स्तम्भ

फसल विविधिकरण प्रोत्साहन योजना के तीन प्रमुख आधार स्तम्भ-
–  गैर-एम.एस.पी. फसलों को बढ़ावा देना
– कृषकों की फसलों का सीधे बाजार से जुड़ाव
– हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित करना।
– ई-गिरदावरी पोर्टल के माध्यम से फसलों के विविधिकृत क्षेत्र की निगरानी सुनिश्चित की जायेगी।
– योजना में किसानों और उनकी फसलों का बाजार से सीधा जुड़ाव सुनिश्चित किया जायेगा।
– किसानों की उपज की निश्चित खरीद की व्यवस्था होगी।-
– विभिन्न कम्पनियों, संस्थानों, निर्यातकों से किसानों के लिये बाय-बैक सुनिश्चित करवाया जायेगा।
– सभी बिक्री की निगरानी फार्म गेट एप से की जायेगी।
– परियोजना की लागत निजी भागीदारी, सरकार तथा कृषकों द्वारा वहन की जायेगी। 

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