दूधिया मशरूम से बढ़ेगी किसानों की आमदनी

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3 अगस्त 2022, टीकमगढ़: दूधिया मशरूम से बढ़ेगी किसानों की आमदनीअब टीकमगढ़ जिले में दूधिया मशरूम की  खेती होने लगी हैं I . डॉ बी .एस . किरार, प्रधान वैज्ञानिक एव प्रमुख के नेत्रत्व में कृषि विज्ञानं केंद्र जिले कि मौजूदा  परिस्थितियों के हिसाव से कृषि नवाचार करके कृषकों की  आय दुगना करने के लिये प्रयास कर रहा हैं I नवाचार के माध्यम से जिले में पहले डिगरी और बटन मशरूम की खेती सफलता पूर्वक कृषको ने की हैं लेकिन टीकमगढ़ जिले में मार्च के बाद तापमान बढ़ने  लगता हैं जिसमें ढिगरी (आयस्टर मशरूम) और बटन मशरूम की खेती असम्भव हो जाती  हैं .I कृषि विज्ञानं केंद्र दवारा बुंदेलखंड महिला मशरूम उत्पादन स्वसहयता समूह का गठन करवा के दूधिया मशरूम की  खेती का प्रशिक्षण दिया गया I दूधिया मशरूम 35-40 डिग्री सेंटी. और 75 -80%  प्रतिशत आद्रता नमी पर जिले में पहली बार सफलतापूर्वक की  गई. दूधिया मशरूम सफेद दूध के रंग का मोटा मोसल होता है इसको सुखाने के बाद भी इसका रंग नहीं बदलता तथा इसको रखने की क्षमता अन्य मशरूम से अधिक दिनों तक रख सकते हैं  दूधिया मशरूम की खेती अभी तक केवल दक्षिण भारत की जलवायु में ही कि जाती थी I दूधिया मशरूम को यदि किसान अपने वर्तमान फसल चक्र में शामिल कर लेंगे तो इससे मशरूम उत्पादन kekeके कारण किसान की आय बढ जाएगी, दूधिया मशरूम की खेती अप्रैल से अक्टूबर तक ऊंचे तापमान पर भी अच्छी पैदावार देता है

दूधिया मशरूम के लिए जरूरी सामग्री:-

दूधिया मशरूम के लिए एक अंधेरा कमरा, दूधिया मशरूम का बीज (स्पान), भूसा कुटी, गेहूं, धान का भूसा, उड़द, हाइड्रोमीटर नमी एवं तापमान पता करने के लिए, प्लास्टिक बैग, ड्रम व शीट,बेबिस्टीन एवं फॉर्मलीन और रबड़ बैंड आदि

दूधिया मशरूम की खेती की तैयारी:-

प्लास्टिक या ड्रम में 90 लीटर पानी उसमें 10 से 12 किलोग्राम भूसा भिगो दें एक बाल्टी में 10 लीटर पानी ले और उसमें 7.5 ग्राम बविष्टिन साथ में 125 मिलीलीटर फॉर्मलीन का घोल बना लें इस गोल को ड्रम में भिगो दें भूसा उड़ेल दें और ड्रम को पॉलिथीन से अच्छे से ढक दें सामग्री को 12 से 17 घंटे बाद ड्रम से बाहर निकाल कर छत पर फेला दे ताकि भूसे से अतिरिक्त पानी निकल जाए I प्राप्त गीला भूसा में बिजाई छिड़काव करके भी सतह में बिजाई करने के लिए पॉलिथीन बैग 15 से 16 इंच चौड़ा और 20 से 21 इंच ऊंचा एक परत भूसा की बिछा लें फिर उसमें ऊपर बीज बिखेर दें 2 परतो के बीच का अंतर 3 से 4 इंच का हो बैगों को या बंद करके अंधेरे कमरे में रख दें 15 से 20 दिन बाद मुंह को खुलकर केसिंग मिश्रण कि परत जो उसे पहले से तैयार 3/4 भाग दोमट मिट्टी व 1/ 4 भाग बालू मिट्टी 10 % चौक पाउडर को 4% बाबिस्टीन के घोल 1 ग्राम प्रति लीटर पानी से मिलाकर ऊपर से पॉलीथिन शीट 7 से 9 दिन तक ढक दें केसिंग करने से पहले के केसिंग को सुखा लें इसके बाद बैग के मुंह पर दूसरे से 3 सेंटीमीटर परत के रूप में बिछाएं केसिंग मिश्रण को फफूंद जाल फैलने पर प्रतिदिन हल्का पानी डालें कमरे में गर्म हवा को हटा दें 30 से 40 डिग्री तापमान एवं 80 से 90% नमी लेने पर कमरे में 3 से 4 दिनों में दूधिया मशरूम निकलने लगता है

प्रति 100 ग्राम दूधिया मशरूम से प्राप्त पोषक तत्व
पोषक तत्व मात्रा प्रति 100 ग्राम
प्रोटीन3.22
लिपिड1.05
रेशा1.11
कार्बोहाइड्रेट6.80
ऊर्जा कैलोरी50.0
विटामिन ए0.62
विटामिन बी1.95
विटामिन ई0.81
विटामिन सी0.41
दूधिया मशरूम से बढ़ेगी किसानों की आमदनी

बुंदेलखंड महिला मशरूम फार्म स्व सहायता समूह द्वारा दूधिया मशरूम उत्पादन किया जा रहा है जिसका कृषि  वैज्ञानिकों डॉ.बी.एस.किरार, डॉ.आर.के.प्रजापति, डॉ.एस.के.सिंह, डॉ.एस.के.जाटव, डॉ.आई.डी.सिंह एवं जयपाल छिगारहा द्वारा मशरूम उत्पादन समूह की महिलाओं को तकनीकी एवं उसके पोष्टिक गुणों से अवगत कराया .I मशरूम उत्पादन तकनीक नव युवक/ युवतियां कृषि विज्ञान केंद्र टीकमगढ़ में प्रशिक्षण हेतु डॉ आर.के. प्रजापति वैज्ञानिक मोबाइल नंबर 9725390835 से संपर्क कर सकते हैं और सफल मशरूम उत्पादक बन सकते हैं

दूधिया मशरूम से बढ़ेगी किसानों की आमदनी
दूधिया मशरूम से बढ़ेगी किसानों की आमदनी
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