राज्य कृषि समाचार (State News)

उत्तर प्रदेश में अक्टूबर में होगा ‘गो-टेक 2026’, गौ संरक्षण और गौ-आधारित अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया मंच

24 जुलाई 2026, भोपाल: उत्तर प्रदेश में अक्टूबर में होगा ‘गो-टेक 2026’, गौ संरक्षण और गौ-आधारित अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया मंच – उत्तर प्रदेश में गौ संरक्षण, तकनीकी नवाचार, प्राकृतिक कृषि और गौ-आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अक्टूबर 2026 में चार दिवसीय ‘गो-टेक 2026’ का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन को प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाले एक बड़े राष्ट्रीय मंच के रूप में विकसित करने की तैयारी की जा रही है।

आयोजन की रूपरेखा और तैयारियों को लेकर 23 जुलाई को लखनऊ स्थित इंदिरा भवन के उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग सभागार में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री श्याम बिहारी गुप्ता ने की।

बैठक में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. वल्लभभाई कथीरिया विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा ‘डीडी किसान’ के संस्थापक श्री नरेश सिरोही, बनासकांठा गोमूत्र डेयरी के श्री देवाराम पुरोहित और रूरल हब के श्री गौरव गुप्ता सहित आयोग के सदस्य राजेश सेंगर, दीपक गोयल और रमाकांत उपाध्याय ने भी सहभागिता की। विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे।

बैठक में ‘गो-टेक 2026’ के आयोजन की व्यापक रूपरेखा, संभावित गतिविधियों और तकनीकी नवाचारों पर विचार-विमर्श किया गया। आयोजन में गौ संरक्षण के साथ-साथ प्राकृतिक कृषि, जैविक उत्पाद, गौ-आधारित उद्योग, ग्रामीण रोजगार और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने से जुड़े विषयों को प्रमुखता दिए जाने की संभावना है।

आयोजकों का उद्देश्य गौवंश को केवल संरक्षण तक सीमित न रखते हुए उसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सतत कृषि व्यवस्था से जोड़ना है। गौ आधारित जैविक खाद, प्राकृतिक कृषि उत्पाद, पंचगव्य आधारित उत्पाद और अन्य ग्रामीण उद्योगों के माध्यम से किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार एवं आय के नए अवसर विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा।

‘गो-टेक 2026’ में देशभर के विशेषज्ञों, गौशालाओं, किसानों, तकनीकी संस्थानों, उद्यमियों और ग्रामीण नवाचार से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाने की योजना है। आयोजन के माध्यम से गौ संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बीच मजबूत संबंध स्थापित करने के साथ ही आधुनिक तकनीक के उपयोग से गौ आधारित गतिविधियों को अधिक प्रभावी और आर्थिक रूप से उपयोगी बनाने का प्रयास किया जाएगा।

बैठक में उपस्थित विशेषज्ञों ने कहा कि यदि गौ संरक्षण को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तकनीकी नवाचार और ग्रामीण उद्यमिता से जोड़ा जाए, तो यह ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, प्राकृतिक कृषि और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

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