राज्य कृषि समाचार (State News)

राजस्थान में क्रय-विक्रय सहकारी समितियों के कामकाज का होगा नया मूल्यांकन, 50 अंकों पर तय होगी कार्यक्षमता

24 जुलाई 2026, जयपुर: राजस्थान में क्रय-विक्रय सहकारी समितियों के कामकाज का होगा नया मूल्यांकन, 50 अंकों पर तय होगी कार्यक्षमता – राजस्थान में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसलों की खरीद, उर्वरक और बीज की समय पर आपूर्ति, कस्टम हायरिंग सेंटर के माध्यम से कृषि उपकरण तथा ड्रोन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने वाली क्रय-विक्रय सहकारी समितियों के कामकाज में बड़ा बदलाव किया जा रहा है।

सहकारिता विभाग ने समितियों की कार्यक्षमता, अधिकारियों-कर्मचारियों की दक्षता, जवाबदेही और किसानों को रियल टाइम सर्विस डिलीवरी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 11 नए प्रदर्शन मूल्यांकन मापदंड (Performance Criteria) जारी किए हैं। अब समितियों की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन कुल 50 अंकों के आधार पर किया जाएगा।

स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से किसानों को मिलेगा बेहतर लाभ

राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान सहकारिता विभाग के शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने कहा कि सहकारी संस्थाओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से किसानों को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मूल्यांकन प्रक्रिया को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए, बल्कि समितियों के वास्तविक प्रदर्शन और किसानों को मिलने वाली सेवाओं के आधार पर आकलन किया जाए।

मूल्यांकन में सेवा वितरण पर रहेगा जोर

नए मूल्यांकन मापदंडों के माध्यम से समितियों के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। किसानों को समय पर उर्वरक और प्रमाणित बीज उपलब्ध कराना, समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद की प्रभावी व्यवस्था करना तथा कृषि उपकरण और ड्रोन सेवाओं को किसानों तक पहुंचाना मूल्यांकन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इसके साथ ही समितियों की वित्तीय कार्यक्षमता, डिजिटल सेवाओं का उपयोग, कार्यों की समयबद्धता और किसानों की समस्याओं के समाधान को भी महत्व दिया जाएगा।

सहकारिता विभाग का यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सहकारी संस्थाओं की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन से जहां बेहतर काम करने वाली समितियों को प्रोत्साहन मिलेगा, वहीं कमजोर प्रदर्शन करने वाली समितियों की जवाबदेही भी तय की जा सकेगी।

इससे किसानों को कृषि आदानों की उपलब्धता, फसल बिक्री, आधुनिक कृषि उपकरण और तकनीकी सुविधाओं के लिए अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी सेवाएं मिलने की उम्मीद है।

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