राज्य कृषि समाचार (State News)

कृषि अनुसंधान का लाभ छत्तीसगढ़ के किसानों को मिलना चाहिए : सुश्री उइके

एग्री कार्नीवाल 2022’ का समापन

26 अक्टूबर 2022, रायपुर कृषि अनुसंधान का लाभ छत्तीसगढ़ के किसानों को मिलना चाहिए : सुश्री उइके – छत्तीसगढ़ की राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने कहा है कि विभिन्न विश्वविद्यालयों तथा अनुसंधान संस्थानों में हो रहे अनुसंधान कार्यों का लाभ किसानों तथा आम जनता को मिलना चाहिए, तभी उनकी सार्थकता है। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित नवीन कृषि प्रौद्योगिकी, नवीन फसल प्रजातियों, कृषि यंत्रों एवं अन्य अनुसंधानों से छत्तीसगढ़ के किसान लाभान्वित हो रहे हैं और निरंतर विकास की राह पर बढ़ रहे हैं। राज्यपाल ने कहा कि कृषि विकास के लिए कृषि अनुसंधान का लाभ फील्ड स्तर पर सभी किसानों को अवश्य मिलना चाहिए। नई तकनीकों, उन्नत प्रजाति के फसलों एवं नवीन कृषि उपकरणों की पहुंच उन तक होनी चाहिए। ऐसे में नवीन कृषि अनुसंधानों एवं प्रौद्योगिकी को किसानों एवं आम जनता तक पहुंचाने में एग्री कार्नीवाल जैसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

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राज्यपाल सुश्री उइके इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा राज्य शासन के कृषि विभाग, छत्तीसगढ़ बायोटेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसायटी, अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, मनीला (फिलीपींस), राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), कंसल्टेटिव ग्रुप ऑफ इन्टरनेशनल एग्रीकल्चरल रिसर्च, कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा), एनएबीएल तथा अन्य संस्थाओं के सहयोग से आयोजित पांच दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कृषि मड़ई ‘‘एग्री कार्नीवाल 2022’’ के समापन समारोह को मुख्य अतिथि की आसंदी से संबोधित कर रही थी। उन्होंने इस अवसर पर कृषि विश्वविद्यालय द्वारा संचालित अनुसंधान गतिविधियों का जायजा भी लिया।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा नाम से विशेष पहचान मिली है। अब छत्तीसगढ़ को विविध फसलों के उत्पादन में भी अपनी पहचान बनानी होगी। इसके लिए उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय को इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करनी होगी। राज्यपाल ने कहा कि हमारे किसानों को बड़े स्तर पर समन्वित कृषि की ओर बढऩा होगा। तभी हमारे ग्रामीण क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास संभव हो सकेगा। साथ ही इस दिशा में राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही नवीन योजनाओं एवं विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों की उन्होंने सराहना की।

उन्होंने कहा कि इन चार दिनों से यहां आयोजित विभिन्न सम्मेलनों, कार्यशाला, संगोष्ठियों में शामिल होकर आपको छत्तीसगढ़ में हो रहे अनुसंधानों और यहां की स्थानीय कृषि पद्धतियों,  फसलों की प्रजातियों आदि के संबंध में किसानों एवं लोगों को जानकारी प्राप्त हुई होगी। इस मड़ई के आयोजन से राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हो रहे कृषि अनुसंधान, फसल की नई प्रजातियों की खोज, कृषि क्षेत्र में उद्यमिता विकास का लाभ निश्चित रूप से यहां के कृषक भाई-बहनों और स्व सहायता समूहों को मिलेगा। इस सम्मेलन से छत्तीसगढ़ के किसान भाईयों-बहनों, उद्यमियों और वैज्ञानिकों को भी बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। इस मड़ई के सफल आयोजन के लिए उन्होंने इसमें शामिल राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, महिला स्वसहायता समूहों, किसानों और उद्यमियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

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इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री रविंद्र चौबे ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि देश में कृषि के विकास में हमारे छत्तीसगढ़ के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां कृषि क्षेत्र सर्वाधिक रोजगार उत्पन्न करता है। ऐसे में इसका विकास अत्यंत जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह कार्निवाल किसानों को निश्चित रूप से लाभन्वित करेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि किसानों का मेहनत, कृषि संसाधन और अनुसंधान क्षेत्र में प्रगति, इन तीनों का समन्वित प्रयास ही कृषि क्षेत्र के विकास को निर्धारित करता है।

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इस अवसर पर राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने आई.जी.के.वी एवं छत्तीसगढ़ बायोटेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसायटी द्वारा नवीन स्टार्टअप एवं नवाचारी विचार हेतु तीन प्रतिभागियों को नगद राशि एवं प्रशस्ति पत्र देकर पुरस्कृत एवं सम्मानित किया ।

इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति श्री गिरिश चंदेल ने विश्वविद्यालय के गतिविधियों एवं उपलब्धियों से राज्यपाल को अवगत कराया। साथ ही कृषि विभाग के सचिव श्री कमलप्रीत सिंह, एन.ए.बी.एल के सी.ई. ओ डॉ. एम. वेंकटेश्वरन एवं केन्या से आई कृषि वैज्ञानिक डॉ. रूथ मूसीला ने भी सभा को संबोधित किया। इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान फिलीपींस के डॉ. हंस भारद्वाज भी उपस्थित थे।

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