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राज्य कृषि समाचार (State News)

हर विधानसभा क्षेत्र में खुलेगी कृषि यंत्र किराये की दुकान, छोटे किसानों को आधुनिक कृषि उपकरण मिलेंगे आसानी से

24 जुलाई 2026, भोपाल: हर विधानसभा क्षेत्र  में खुलेगी कृषि यंत्र किराये की दुकान, छोटे किसानों को आधुनिक कृषि उपकरण मिलेंगे आसानी से –  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर मध्यप्रदेश में किसानों की सुविधा के लिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक ‘कृषि यंत्र किराये की दुकान’ खोलने की तैयारी की जा रही है। कृषक कल्याण वर्ष में इस पहल के जल्द ही धरातल पर उतरने की उम्मीद है। इससे छोटे और सीमांत किसान भी न्यूनतम सेवा शुल्क पर आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग कर सकेंगे।

प्रदेश में वर्तमान में 5260 कृषि यंत्र किराये के केन्द्र संचालित हैं। अब हर वर्ष 1060 नए कृषि यंत्र किराये केन्द्र स्थापित किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य है कि आधुनिक कृषि उपकरण किसानों के खेतों तक आसानी से पहुंचें और छोटे किसानों को महंगे कृषि यंत्र खरीदने की मजबूरी न हो। कृषि यंत्र निर्माण में आत्मनिर्भर बन रहा मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश अब कृषि यंत्रों के निर्माण के क्षेत्र में भी तेजी से आत्मनिर्भर हो रहा है। विदिशा जिले ने इस दिशा में एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है। जिले में ग्रेडर, लेवलर, हाइड्रॉलिक ट्रॉली, कल्टीवेटर और प्लाऊ सहित अनेक कृषि उपकरणों का निर्माण किया जा रहा है। विदिशा में लगभग 150 कृषि उपकरण निर्माण इकाइयां संचालित हैं।

यहां निर्मित कृषि यंत्रों की मांग देश के अन्य राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी है। मेडागास्कर, नाइजीरिया, सूडान, युगांडा, घाना, अल्जीरिया, ग्वाटेमाला, भूटान, नेपाल, बांग्लादेश और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देशों में विदिशा में निर्मित कृषि उपकरण भेजे जा रहे हैं।
1993 में शुरू हुआ कारोबार, अब 10 से अधिक देशों तक पहुंच

उषा एग्रो के मानस गुप्ता बताते हैं कि उनकी इकाई में खेती में उपयोग आने वाले लोडर, डिलोडर, कल्टीवेटर सहित अनेक कृषि यंत्र और उपकरण बनाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि इस कार्य की शुरुआत उनके पिता ने वर्ष 1993 में छोटे स्तर पर की थी। समय के साथ कारोबार का विस्तार हुआ और आज उनके कृषि उपकरण विदेशों तक पहुंच रहे हैं।

उन्होंने बताया कि उनके सबसे बड़े ग्राहक स्थानीय किसान हैं। उत्पादों का बड़ा हिस्सा स्थानीय बाजार में ही खप जाता है, लेकिन देश के अन्य राज्यों और विदेशों में भी आपूर्ति की जाती है। आज उनके बनाए कृषि यंत्र 10 से अधिक देशों तक पहुंच रहे हैं। उनके कारोबार का लगभग दो-तिहाई हिस्सा देश के भीतर और एक-तिहाई कारोबार विदेशों में है। वार्षिक कारोबार करीब 4 करोड़ रुपये है।

मानस गुप्ता ने कहा कि सरकार की नीतियों से उत्पादन और व्यवसाय विस्तार में काफी सहायता मिलती है। विदेशों तक उत्पाद पहुंचाने में भी सरकारी सहयोग प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि सरकार की पहल पर वे जी-20 सम्मेलन में भी शामिल हुए, जिसमें यात्रा और सहभागिता से जुड़े खर्च का करीब 75 प्रतिशत सरकार द्वारा वहन किया गया।

किसानों की जरूरत के अनुसार बन रहे उपकरण

संजय उद्योग के विष्णु शर्मा ने बताया कि उनकी इकाई में ट्रैक्टर से संबंधित कृषि उपकरण, जैसे कल्टीवेटर और प्लाऊ आदि बनाए जाते हैं। इन उपकरणों की मदद से किसान खेत तैयार करने का काम आसानी से कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि उनके उत्पादों की मुख्य आपूर्ति विदिशा और आसपास के जिलों में होती है। इसके अलावा प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में भी कृषि उपकरण भेजे जाते हैं। उनका वार्षिक कारोबार करीब 50 लाख रुपये है।

कृषि यंत्र किराये की दुकानों के विस्तार और स्थानीय स्तर पर कृषि उपकरण निर्माण को बढ़ावा मिलने से प्रदेश में एक ओर जहां छोटे किसानों को आधुनिक तकनीक का लाभ मिलेगा, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी सृजित होंगे।

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