राज्य कृषि समाचार (State News)

खजूर की खेती से बदली बीकानेर के किसानों की किस्मत, ₹80 प्रति किलो मिल रहा भाव; दिल्ली, पंजाब और हरियाणा तक पहुंच रही उपज

21 जुलाई 2026, बीकानेर: खजूर की खेती से बदली बीकानेर के किसानों की किस्मत, ₹80 प्रति किलो मिल रहा भाव; दिल्ली, पंजाब और हरियाणा तक पहुंच रही उपज – पश्चिमी राजस्थान में खजूर की खेती किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो रही है। बीकानेर जिले में इस वर्ष खजूर का उत्पादन बेहतर रहा है। साथ ही किसानों को बाजार में 50 से 80 रुपये प्रति किलो तक का भाव मिलने से उनके मुनाफे में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई है। यही वजह है कि जिले में अब अधिक किसान खजूर की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। वर्तमान में जिले में करीब 350 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खजूर के बगीचे हैं और यहां उत्पादित खजूर की बिक्री दिल्ली, चंडीगढ़, हरियाणा और पंजाब सहित कई राज्यों में हो रही है।

उद्यान विभाग के सहायक निदेशक मुकेश गहलोत ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत संचालित ‘पश्चिमी राजस्थान में खजूर पौधारोपण क्षेत्रफल विस्तार’ योजना के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखाई देने लगे हैं। योजना के माध्यम से किसानों को खजूर के बगीचे लगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिसका लाभ अब उन्हें बेहतर उत्पादन और अच्छे बाजार भाव के रूप में मिल रहा है।

प्रति पौधा 80-100 किलो तक उत्पादन

जिले के प्रगतिशील किसानों ने बताया कि इस बार खजूर की फसल उत्कृष्ट रही। किसानों को प्रति पौधा 80 से 100 किलो तक उत्पादन प्राप्त हुआ। वहीं बाजार में 50 से 80 रुपये प्रति किलो तक का भाव मिलने से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रगतिशील किसान शिवकरण कूकणा (पेमासर), जय भगवान (कानासर), ओ.पी. हर्ष (हुंसगसर-बीछवाल), बृजमोहन चांडक और केसरी चंद भूरा (देशनोक) ने बताया कि इस वर्ष अच्छी पैदावार और बेहतर कीमत मिलने से उनकी आमदनी लगभग दोगुनी हो गई है।

खजूर की खेती पर 75% तक अनुदान

उपनिदेशक उद्यान (अनुसंधान एटीसी) प्रेमाराम ने बताया कि किसान उद्यान विभाग की योजनाओं के तहत खजूर का बगीचा लगाकर सरकारी अनुदान का लाभ उठा सकते हैं। विभाग की ओर से खजूर पौधारोपण पर 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। टिश्यू कल्चर से तैयार पौधों पर किसानों को प्रति पौधा 3,000 रुपये या इकाई लागत का 75 प्रतिशत (जो भी कम हो) अनुदान मिलता है। वहीं ऑफशूट तकनीक से तैयार पौधों पर भी निर्धारित दरों के अनुसार 75 प्रतिशत तक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

एक हेक्टेयर में लगते हैं 156 पौधे

खजूर की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 148 मादा और 8 नर पौधों, यानी कुल 156 पौधों की आवश्यकता होती है। विभाग द्वारा बरही, मेडजूल, खलास, खद्रावी, सगई, जामली, अजवा, नाबुत सुल्तान और हलावी जैसी मादा किस्मों तथा अल-इन-सिटी और घनामी जैसी नर किस्मों पर अनुदान दिया जाता है।

इन दस्तावेजों के साथ करना होगा आवेदन

अनुदान का लाभ लेने के लिए किसान न्यूनतम 0.5 हेक्टेयर और अधिकतम 4 हेक्टेयर क्षेत्र में खजूर का बगीचा स्थापित कर सकते हैं। आवेदन उपनिदेशक उद्यान कार्यालय में करना होगा। इसके लिए खेत की जमाबंदी, नक्शा, स्थायी सिंचाई स्रोत का प्रमाण, ड्रिप सिंचाई आवेदन, मिट्टी और पानी की जांच रिपोर्ट, बैंक खाते का विवरण तथा आधार या जन आधार कार्ड जैसे दस्तावेज जमा करना अनिवार्य होगा। खजूर बगीचा स्थापना के लिए ड्रिप सिंचाई प्रणाली लगाना भी अनिवार्य है।

सरकारी फार्म और मान्यता प्राप्त संस्थानों से मिलेंगे पौधे

उद्यान विभाग के अनुसार किसान ऑफशूट पौधे राजकीय फार्म सगरा भोजका (जैसलमेर), मैकेनाइज्ड कृषि फार्म खारा (बीकानेर) तथा राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों से प्राप्त कर सकते हैं। वहीं टिश्यू कल्चर से तैयार पौधे डीबीटी से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं और अतुल राजस्थान डेटपाम लिमिटेड, चौपासनी (जोधपुर) से उपलब्ध हैं।

उद्यान विभाग का मानना है कि बेहतर उत्पादन, आकर्षक बाजार भाव और सरकारी अनुदान की वजह से आने वाले वर्षों में बीकानेर पश्चिमी राजस्थान का प्रमुख खजूर उत्पादन केंद्र (डेट पाम हब) बन सकता है। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ क्षेत्र में बागवानी को भी नई गति मिलेगी।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture