राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम: केंद्र सरकार ने NIPU-2026 को दी मंजूरी

20 जुलाई 2026, नई दिल्ली: उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम: केंद्र सरकार ने NIPU-2026 को दी मंजूरी – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने देश को उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ‘आत्मनिर्भर भारत के लिए यूरिया-2026’ (NIPU-2026) के तहत राष्ट्रीय निवेश नीति को मंजूरी दे दी है। इस नीति का उद्देश्य देश में गैस आधारित नई यूरिया विनिर्माण इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा देना तथा यूरिया आयात पर भारत की निर्भरता को चरणबद्ध तरीके से कम करना है।

क्या है NIPU-2026?

राष्ट्रीय निवेश नीति यूरिया-2026 (National Investment Policy for Urea-2026) केंद्र सरकार की नई निवेश नीति है, जिसके तहत सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनों को नई गैस आधारित यूरिया उत्पादन इकाइयों की स्थापना के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ने से देश की उर्वरक जरूरतें स्वदेशी स्तर पर पूरी होंगी और आयात पर होने वाला भारी विदेशी मुद्रा व्यय भी कम होगा।

किसानों को होगा सीधा लाभ

नई नीति के लागू होने से देश में यूरिया की उपलब्धता अधिक स्थिर और समयबद्ध होगी। किसानों को खेती के मौसम में उर्वरकों की आपूर्ति सुचारु रूप से मिल सकेगी, जिससे फसल उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। साथ ही, आयात पर निर्भरता घटने से वैश्विक बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर भी कम होगा।

घरेलू निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

सरकार का मानना है कि नई गैस आधारित यूरिया इकाइयों की स्थापना से उर्वरक उद्योग में बड़े निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे औद्योगिक विकास के साथ-साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगी मजबूती

NIPU-2026 नीति, आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत उर्वरक क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ने से भारत की खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी और कृषि क्षेत्र को आवश्यक उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, गैस आधारित आधुनिक यूरिया संयंत्र ऊर्जा दक्ष होने के साथ पर्यावरण की दृष्टि से भी बेहतर माने जाते हैं। ऐसे में यह नीति कृषि और औद्योगिक विकास दोनों के लिए दीर्घकालिक रूप से लाभकारी साबित हो सकती है।

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