मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना: 75% तक अनुदान पर मिलेंगी मुर्रा भैंसें, रोजाना 20 लीटर तक होगा दूध उत्पादन
04 अगस्त 2026, भोपाल: मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना: 75% तक अनुदान पर मिलेंगी मुर्रा भैंसें, रोजाना 20 लीटर तक होगा दूध उत्पादन – मध्यप्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, ग्रामीण एवं शहरी युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और पशुपालकों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से राज्य सरकार मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना संचालित कर रही है। इस योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को अनुदान पर उच्च दुग्ध उत्पादन वाली दो मुर्रा नस्ल की भैंसें उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि वे आधुनिक डेयरी व्यवसाय शुरू कर नियमित आय अर्जित कर सकें।
75% तक मिलेगा अनुदान
उपसंचालक पशुपालन एवं डेयरी डॉ. आर.के. सोनी ने बताया कि योजना के तहत सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को परियोजना लागत का 50 प्रतिशत, जबकि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। योजना के माध्यम से मिलने वाली दो मुर्रा भैंसों से प्रतिदिन करीब 18 से 20 लीटर तक दूध उत्पादन संभव है, जिससे डेयरी व्यवसाय को लाभकारी आजीविका के रूप में विकसित किया जा सकता है।
आवेदन के लिए जमा करनी होगी यह राशि
उन्होंने बताया कि सामान्य वर्ग के आवेदकों को आवेदन के साथ 1 लाख 47 हजार 500 रुपये का बैंक ड्राफ्ट जमा करना होगा। वहीं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के आवेदकों के लिए यह राशि 73 हजार 700 रुपये निर्धारित की गई है। परियोजना की शेष राशि राज्य शासन द्वारा अनुदान के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी।
हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश से चुन सकेंगे मुर्रा भैंस
योजना की खास बात यह है कि आवेदन स्वीकृत होने के बाद हितग्राही विभागीय प्रतिनिधि के साथ हरियाणा, पंजाब या उत्तर प्रदेश जाकर अपनी पसंद की उच्च गुणवत्ता वाली मुर्रा भैंस का चयन कर सकते हैं। योजना के तहत हितग्राही के भ्रमण, ठहरने, पशु परिवहन और पशु बीमा की व्यवस्था भी की गई है।
21 वर्ष से अधिक आयु के पात्र नागरिक उठा सकते हैं लाभ
डॉ. सोनी ने बताया कि यह योजना केवल किसानों तक सीमित नहीं है। 21 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी पात्र मध्यप्रदेश निवासी इसका लाभ ले सकते हैं। इच्छुक नागरिक अपने नजदीकी शासकीय पशु चिकित्सालय में संपर्क कर आवेदन पत्र प्राप्त कर सकते हैं और योजना का लाभ उठा सकते हैं।
स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में पहल
उन्होंने जिले के युवाओं, पशुपालकों और इच्छुक नागरिकों से मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की। उनका कहना है कि आधुनिक डेयरी व्यवसाय न केवल स्थायी रोजगार का माध्यम बन सकता है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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