राज्य कृषि समाचार (State News)

बालाघाट की कृषि सखियों ने पारंपरिक बीज संरक्षण का दिया संदेश

03 अगस्त 2026, बालाघाटबालाघाट की कृषि सखियों ने पारंपरिक बीज संरक्षण का दिया संदेश – संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2026 को अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष घोषित किए जाने के उपलक्ष्य में 28 जुलाई को नई दिल्ली  में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले की कृषि सखियों ने अपनी उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि एवं खाद्य प्रणालियों में महिला किसानों के योगदान को सम्मानित करना, कृषि जैव विविधता के संरक्षण को बढ़ावा देना तथा महिला किसानों को सशक्त बनाना था।

कलेक्टर श्री मृणाल मीना के मार्गदर्शन एवं कृषि विभाग के उप संचालक श्री मालवीय के नेतृत्व में जिले की कृषि सखी सीमा ऐडे एवं डेलन पंचतिलक ने कार्यक्रम में सहभागिता की। इस दौरान उन्होंने देशी बीजों, पारंपरिक फसलों एवं सब्जियों के बीजों तथा बालाघाट की प्रसिद्ध चीन्नौर धान पर आधारित जैविक उत्पादों का आकर्षक स्टॉल लगाया, जिसे कार्यक्रम में आए विशेषज्ञों एवं महिला किसानों ने सराहा।

कार्यक्रम में राजस्थान किसान आयोग के अध्यक्ष श्री आर.सी. चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।  देशभर से आई महिला किसानों को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया तथा कृषि, जैव विविधता संरक्षण और पारंपरिक बीजों के संवर्धन में उनके योगदान की सराहना की गई। इस अवसर पर डॉ. त्रिलोचन महापात्रा, चेयरमैन (PPV&FRA), नई दिल्ली, डॉ. डी.के. अग्रवाल, रजिस्ट्रार जनरल (PPV&FRA), डॉ. रवि प्रकाश, पूर्व रजिस्ट्रार (PPV&FRA) तथा डॉ. रविंद्र सेनगर, डिप्टी रजिस्ट्रार (PPV&FRA), नई दिल्ली सहित अनेक कृषि विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के माध्यम से पौध किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPV&FRA) के तहत पारंपरिक बीजों के संरक्षण के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया गया। महिला किसानों को जैव विविधता संरक्षण, देशी बीजों के महत्व तथा कृषक अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए “किसान की किस्म, किसान का अधिकार – बीज बचाएँ, जैव विविधता बढ़ाएँ” का संदेश दिया गया।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि महिला किसान केवल खेतों में श्रम करने वाली शक्ति नहीं, बल्कि कृषि विकास, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की मजबूत आधारशिला हैं। उन्हें सम्मान, संसाधन, आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराकर ही कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनाया जा सकता है। कार्यक्रम में बालाघाट की कृषि सखियों की सक्रिय भागीदारी ने जिले की पारंपरिक कृषि विरासत और जैविक खेती को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का कार्य किया।

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