सोयाबीन की पत्तियां हो रही हैं गायब? हो सकता है डिफोलिएटर्स का प्रकोप, जानें बचाव के उपाय
04 अगस्त 2026, नई दिल्ली: सोयाबीन की पत्तियां हो रही हैं गायब? हो सकता है डिफोलिएटर्स का प्रकोप, जानें बचाव के उपाय – मध्यप्रदेश के हरदा जिले में वर्तमान मौसम को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) ने सोयाबीन उत्पादक किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है। केवीके के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी (पौध संरक्षण) डॉ. मुकेश कुमार बंकोलिया ने बताया कि इन दिनों सोयाबीन की फसल में पत्ती खाने वाली इल्ली (डिफोलिएटर्स) का प्रकोप देखा जा रहा है। यदि समय रहते इसका नियंत्रण नहीं किया गया तो यह फसल की पत्तियों को नुकसान पहुंचाकर पौधों की वृद्धि और उत्पादन पर प्रतिकूल असर डाल सकता है।
समय पर करें दवा का छिड़काव
डॉ. बंकोलिया ने बताया कि डिफोलिएटर्स के नियंत्रण के लिए किसान इंडोक्साकार्ब 14.5 एससी 200 मिलीलीटर प्रति एकड़ या स्पिनोसैड 45 एससी 70 मिलीलीटर प्रति एकड़ अथवा इमामेक्टिन बेन्जोएट 5 एसजी 80 से 100 ग्राम प्रति एकड़ की दर से उपयोग कर सकते हैं। दवा का छिड़काव पावर पंप की सहायता से प्रति एकड़ 100 से 120 लीटर पानी में घोल बनाकर करें। छिड़काव के दौरान यह सुनिश्चित करें कि दवा पत्तियों के ऊपर और नीचे दोनों तरफ समान रूप से पहुंचे।
समेकित कीट प्रबंधन अपनाने की सलाह
कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) अपनाने की सलाह दी है। इसके तहत प्रति एकड़ दो फेरोमोन ट्रैप तथा 15 से 20 बर्ड पर्चर लगाने की सलाह दी गई है, जिससे कीटों की निगरानी और नियंत्रण में मदद मिल सके।
जरूरत होने पर ही करें रासायनिक दवा का प्रयोग
विशेषज्ञों के अनुसार, रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग तभी करें, जब प्रति मीटर कतार में 3 से 4 इल्ली दिखाई दें। साथ ही एक ही कीटनाशक का बार-बार उपयोग करने से बचें, क्योंकि इससे कीटों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सकती है और दवा का असर कम हो सकता है।
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