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राज्य कृषि समाचार (State News)

कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में कृषि यंत्रों पर वार्षिक कार्यशाला

देश भर के 27 केन्द्रों से कृषि वैज्ञानिक शामिल हुए

09 जनवरी 2024, रायपुर: कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में कृषि यंत्रों पर वार्षिक कार्यशाला – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली एवं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के संयुक्त तत्वाधान में 8 से 10 जनवरी, 2024 तक आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (कृषि उपकरणों एवं मशीनरी) की 38वीं वार्षिक कार्यशाला का गत दिवस  शुभारंभ किया गया। कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय रायपुर में में आयोजित कार्यशाला के उद्घाटन समारोह के मुख्य आतिथि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक (कृषि अभियांत्रिकी) डॉ. एस. एन. झा ने की। कार्यक्रम में भोपाल स्थित केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान के निदेशक डॉ. सी.आर. मेहता तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहायक उपनिदेशक (कृषि अभियांत्रिकी) डॉ. के.पी. सिंह एवं अखिल भारतीय कृषि यंत्र एवं मशीनरी परियोजना के परियोजना समन्वयक डॉ. के एन अग्रवाल भी उपस्थित थे। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय से संचालक अनुसंधान सेवायें डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी, निदेशक विस्तार सेवायें डॉ. अजय वर्मा, कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय, रायपुर के अधिष्ठाता डॉ. विनय पाण्डेय भी शामिल हुए। इस तीन दिवसीय वार्षिक कार्यशाला के प्रमुख विशेषज्ञ के रूप में पंजाब राव देशमुख कृषि विद्यापीठ के पूर्व कुलपति एवं फार्म मशीनरी के विशेषज्ञ डॉ. सी.एम मायंडे उपस्थित थे। इस अवसर पर विभिन्न कृषि यंत्रों एवं उपकरणों की प्रदर्शनी भी आयोजित की गई।

कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए मुख्य अतिथि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कहा कि कृषि क्षेत्र में मजदूरों की कमी तथा बढ़ती लागत को ध्यान में रखते हुए कृषि कार्यां में यंत्रों का उपयोग किया जाना जरूरी हो गया है, इससे विभिन्न कृषि कार्यां में समय तथा श्रम की बचत होती है। उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों एवं अभियंताओं को विभिन्न फसलों की विशिष्टताओं, क्षेत्रीय परिस्थितियों तथा किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नये कृषि यंत्रों का विकास करना चाहिए। डॉ. चंदेल ने कृषि में यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी – कम्प्यूटर, मोबाईल सेवाएं, रिमोट सेंसिंग, ड्रोन तकनीक आदि का उपयोग किये जाने पर जोर दिया। उन्होंने कृषि यंत्रों के अनुसंधान एवं विकास हेतु फार्म मशीनरी निर्माण करने वाली संस्थाओं की जरूरतों का भी ध्यान रखने पर बल दिया।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक (कृषि अभियांत्रिकी) डॉ. एस.एन. झा ने समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा कि अखिल भारतीय कृषि यंत्र एवं मशीनरी परियोजना के संचालित 27 केन्द्रों में कृषि यंत्रों के अनुसंधान एवं विकास हेतु उल्लेखनीय कार्य किये गये हैं तथा बदलती कृषि परिस्थितियों एवं किसानों की आवश्यकताओं के अनुसार नये-नये कृषि यंत्र इजाद किये गये हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश के 47 प्रतिशत कृषि क्षेत्र में कृषि यंत्रों का उपयोग किया जा रहा है जिसे वर्ष 2047 तक 75 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि कृषि यंत्रों के उपयोग से खेती की लागत में औसतन 30 प्रतिशत तक बचत होती है। इस अवसर पर परियोजना के तहत प्रकाशित चार नवीन प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया।

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