पांढुर्ना जिले में प्रतिबंधित एचटी कॉटन बीज सहित कृषि आदान जब्त, एफआईआर दर्ज़
मामले की उच्च स्तरीय जांच से सामने आएगा सच
01 अगस्त 2026, पांढुर्ना: पांढुर्ना जिले में प्रतिबंधित एचटी कॉटन बीज सहित कृषि आदान जब्त, एफआईआर दर्ज़ – पांढुर्ना जिले के मरकावाड़ा गांव में बिना लाइसेंस कृषि आदान बेचने का मामला सामने आया है। कृषि विभाग द्वारा की गई छापामार कार्रवाई में बिना लाइसेंस के बड़ी मात्रा में रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक, फफूंदनाशी, प्रतिबंधित कपास बीज तथा अन्य कृषि आदान जब्त कर आरोपी परमेश्वर पिता जगन बारंगे, निवासी मरकावाड़ा का मकान सील कर उसके खिलाफ थाना पांढुर्ना में एफआईआर दर्ज़ कराई गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कृषि विभाग को सूचना मिली कि मरकावाड़ा के परमेश्वर पिता जगन बारंगे द्वारा बिना लाइसेंस के गांव में और आसपास अवैध रूप से उर्वरक, बीज और कीटनाशकों का विक्रय किया जाता है। सूचना के तहत वरिष्ठ अधिकारी के मौखिक आदेश पर प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारीद्वय सौंसर श्री योगेश भलावी एवं श्री विनोद लोखंडे ,पांढुर्ना , कृषि विकास अधिकारी श्री दिलीप परतेती , श्री सुनील गजभिए एवं श्री नितिन डेहरिया की टीम सरपंच और कोटवार की मौजूदगी में आरोपी के मकान के मवेशी के कोठे का ताला तोड़कर जब निरीक्षण के लिए अंदर पहुंची तो वहां पॉवर 50 एनपीके ग्रेड 10 :20 :20 किसान शक्ति कृषि उद्योग ,प्रा लि, यवतमाल की 50 किलो की 4 बोरी पाई गई जो प्रथम दृष्टया नकली प्रतीत होता है। साथ ही कपास बीज R R ( राउंडप रेडी ) के 450 ग्राम के 15 पैकेट भी मिले , जो प्रतिबंधित होकर भारत में इनका उत्पादन गैर क़ानूनी है। साथ ही जेयू एग्री साइंस प्रा लि एवं गायत्री इंसेक्टिसाइड इंडिया, प्रा लि के अलग -अलग उत्पादों में बैच संख्या एक जैसी मिलने से संदेहास्पद लगे । सिमवूड एग्रो लि , मुंबई ब्रांड हिरोकी ( जिब्रेरेलिक एसिड ) के लेबलों पर उत्पादन और अवसान तिथि का उल्लेख नहीं था। श्री बारंगे से पूछताछ में उत्पादों की खरीदी -बिक्री ,स्टॉक की जानकारी और दस्तावेज मांगे जाने पर भी संधारित नहीं करना पाया गया। सिर्फ एक देयक बुक और बहीखाता मिला जिसे आदान सामग्री के साथ सील किया गया।
श्री मोरिस नाथ , उप संचालक कृषि , छिंदवाड़ा ने बताया कि बिना लाइसेंस के कृषि आदान के विक्रय एवं प्रतिबंधित कपास बीज बेचने के आरोपी परमेश्वर बारंगे के विरुद्ध कृषि विभाग द्वारा कठोर कार्रवाई की जाएगी। आरोपी के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 , बीज अधिनियम 1966 , उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 एवं कीटनाशक अधिनियम 1968 की संबंधित धाराओं के तहत सुश्री अर्चना डोंगरे , अनुविभागीय अधिकारी ( कृषि ), सौंसर द्वारा थाना पांढुर्ना में एफआईआर दर्ज़ कराई गई है ।
वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी श्री विनोद लोखंडे ने कृषक जगत को बताया कि जब्त सामग्री में भारत में प्रतिबंधित हर्बिसाइड टॉलरेंट (HT) कॉटन बीज के 15 पैकेट भी बरामद हुए हैं। यह बरामदगी गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि देश में एचटी कॉटन बीज की व्यावसायिक बिक्री और खेती की अनुमति नहीं है। पाई गई समस्त जब्त सामग्री के नमूने परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजे जाएंगे। उन्होंने बताया कि प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद यदि जब्त सामग्री नकली, अमानक अथवा प्रतिबंधित पाई जाती है, तो आरोपियों के विरुद्ध अन्य संबंधित धाराएं भी जोड़ी जाएंगी। व्यापारी सूत्रों के अनुसार, जब्त किए गए प्रतिबंधित एचटी कॉटन बीज के केवल 15 पैकेट ही मौके पर मिले हैं। अनुमान है कि कपास की बुवाई का समय लगभग समाप्त होने के कारण यह शेष बचा हुआ स्टॉक हो सकता है। सूत्रों का यह भी कहना है कि इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि बुवाई के मौसम के दौरान ऐसे प्रतिबंधित बीजों की बड़ी मात्रा में बिक्री की गई हो।
वर्तमान में अल नीनो के कारण किसान अल्प / विलम्बित वर्षा से परेशान हैं , ऐसे हालातों में प्रतिबंधित कपास बीज की बरामदगी होना गंभीर बात है, क्योंकि देश में एचटी कॉटन बीज की व्यावसायिक बिक्री और खेती दोनों पर रोक लगी है। इसके अलावा अन्य अमानक कृषि आदान सामग्री की बिक्री किसानों के लिए दोहरे संकट का सबब बन सकता है। फसल के अंकुरण से लेकर उत्पादन तक किसानों के सामने कई समस्याएं आ सकती हैं। ऐसी दशा में प्रतिबंधित एचटी कॉटन बीज बिक्री मामले की जांच किसी उच्च स्तरीय एजेंसी से कराई जानी चाहिए , ताकि यह पता लग सके कि इस प्रतिबंधित कॉटन बीज की बिक्री का दायरा सिर्फ पांढुर्ना तक ही सीमित है या राज्य के अन्य जिलों में भी गुपचुप तरीके से इसकी बोनी की गई है ?
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