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राज्य कृषि समाचार (State News)

97 फीसदी धान रोपनी पूरी, बढ़ी खाद की मांग; कालाबाजारी रोकने के लिए हेल्पलाइन जारी

31 अगस्त 2026, पटना: 97 फीसदी धान रोपनी पूरी, बढ़ी खाद की मांग; कालाबाजारी रोकने के लिए हेल्पलाइन जारी – बिहार में धान की रोपनी का काम लगभग पूरा हो चुका है। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार अब तक करीब 97 प्रतिशत धान की रोपनी हो चुकी है और लक्ष्य की तुलना में लगभग तीन प्रतिशत क्षेत्र में रोपनी बाकी है। रोपनी का काम अंतिम चरण में पहुंचने के साथ ही किसानों के बीच उर्वरकों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है।

किसानों को समय पर निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध कराने और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए कृषि विभाग ने शिकायत की सुविधा बढ़ाई है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि उर्वरक मिलने में परेशानी, अधिक कीमत वसूले जाने या किसी अन्य समस्या की स्थिति में किसान विभाग के हेल्पलाइन और व्हाट्सऐप नंबर पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

हेल्पलाइन और व्हाट्सएप नंबर जारी

किसानों के लिए 1800-180-1551 टोल-फ्री नंबर जारी किया गया है। इसके अलावा 7766085888 व्हाट्सऐप नंबर पर भी शिकायत भेजी जा सकती है। किसान अपने जिले के जिला कृषि पदाधिकारी, अनुमंडल कृषि पदाधिकारी और प्रखंड कृषि पदाधिकारी से भी संपर्क कर सकते हैं।

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कृषि मंत्री ने अधिकारियों को खाद बिक्री केंद्रों पर उपलब्धता और निर्धारित कीमत की नियमित जांच करने के निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए विभागीय स्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है।

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फार्मर आईडी के आधार पर खाद में कटौती नहीं

मंत्री ने स्पष्ट किया कि फार्मर आईडी के आधार पर किसानों को मिलने वाली खाद में कटौती किए जाने की बात निराधार और भ्रामक है। उन्होंने कहा कि किसानों के उर्वरक आवंटन में इस आधार पर कटौती की कोई व्यवस्था लागू नहीं है। राज्य में खाद की कमी नहीं होने का दावा करते हुए उन्होंने किसानों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की।

खाद खरीदते समय रसीद जरूर लें

कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की कि उर्वरक खरीदते समय विक्रेता से आधिकारिक रसीद अवश्य लें। यदि कोई दुकानदार निर्धारित कीमत से अधिक राशि मांगता है या खाद की कालाबाजारी करता है तो किसान तत्काल संबंधित कृषि अधिकारी, जिला प्रशासन या राज्य मुख्यालय को इसकी सूचना दें। विभाग के हेल्पलाइन और व्हाट्सएप नंबर पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। सरकार का कहना है कि धान की फसल के इस महत्वपूर्ण चरण में किसानों को उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ निर्धारित दर पर बिक्री की निगरानी भी की जा रही है।

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