Crop Insurance: फसल बीमा में बड़ा बदलाव, नई तकनीक से होगा नुकसान का सटीक आकलन और जल्द मिलेगा क्लेम
25 जुलाई 2026, नई दिल्ली: Crop Insurance: फसल बीमा में बड़ा बदलाव, नई तकनीक से होगा नुकसान का सटीक आकलन और जल्द मिलेगा क्लेम – केंद्र सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित और किसानों के लिए प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान का सटीक आकलन करने तथा किसानों को समय पर बीमा दावा (क्लेम) उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने कई डिजिटल और आधुनिक तकनीकों को योजना से जोड़ा है। इनमें WINDS, YS-Tech, राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (NCIP), डिजीक्लेम मॉड्यूल और क्रॉप लॉस असेसमेंट ऐप (CLAP) जैसी तकनीकें शामिल हैं। इन पहलों की जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में लिखित जवाब के दौरान दी।
WINDS नेटवर्क से मिलेगा हाइपरलोकल मौसम डेटा
सरकार ने मौसम सूचना नेटवर्क एवं डेटा प्रणाली (WINDS) के तहत देशभर में स्वचालित मौसम केंद्र (AWS) और स्वचालित वर्षामापी यंत्र (ARG) का राष्ट्रीय नेटवर्क विकसित करने की पहल शुरू की है। इसका उद्देश्य फसल बीमा, कृषि परामर्श और आपदा जोखिम प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक हाइपरलोकल मौसम आंकड़े तैयार करना है।
फिलहाल इस पहल को असम, हिमाचल प्रदेश, केरल, ओडिशा, पुडुचेरी, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सहित सात राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों ने अपनाया है। अब तक 16,843 स्थानों पर उपकरणों की स्थापना को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें 1,188 स्थानों पर सिविल कार्य पूरा हो चुका है, जबकि 892 AWS और ARG स्थापित किए जा चुके हैं।
YS-Tech से होगा फसल नुकसान का वैज्ञानिक आकलन
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत सरकार ने खरीफ 2023 से प्रौद्योगिकी आधारित उपज आकलन प्रणाली (YS-Tech) लागू की है। इस प्रणाली के माध्यम से रिमोट सेंसिंग तकनीक की मदद से फसल उपज का निष्पक्ष और वैज्ञानिक आकलन किया जा रहा है।
इसकी शुरुआत खरीफ 2023 में धान और गेहूं की फसलों से हुई थी, जबकि खरीफ 2024 से सोयाबीन को भी इसमें शामिल किया गया। योजना के तहत YS-Tech से प्राप्त उपज आंकड़ों को 30 प्रतिशत वेटेज देना अनिवार्य किया गया है।
12 राज्यों के 344 जिलों में लागू हुई तकनीक
सरकार के अनुसार वर्ष 2025-26 में YS-Tech का उपयोग 12 राज्यों के 344 जिलों में किया गया। इसके अलावा अलग-अलग राज्यों ने अपनी आवश्यकता के अनुसार इस तकनीक को अधिक महत्व दिया है। मध्य प्रदेश ने YS-Tech आधारित उपज को 100 प्रतिशत वेटेज दिया। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश ने 50 प्रतिशत वेटेज अपनाया। ओडिशा और कर्नाटक ने 40 प्रतिशत वेटेज लागू किया। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि YS-Tech के प्रभावी क्रियान्वयन की नियमित रूप से सभी संबंधित पक्षों के साथ समीक्षा की जाती है।
राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल से डिजिटल हुई पूरी प्रक्रिया
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के संचालन को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (NCIP) विकसित किया है। यह पोर्टल किसानों के ऑनलाइन पंजीकरण, प्रीमियम सब्सिडी, बीमित किसानों के रिकॉर्ड, सूचना प्रसार और बीमा दावों की राशि सीधे बैंक खाते में भेजने जैसी सभी सेवाओं के लिए एकीकृत प्लेटफॉर्म के रूप में काम करता है।
डिजीक्लेम मॉड्यूल से होगी दावों की निगरानी
खरीफ 2022 से सरकार ने डिजीक्लेम मॉड्यूल लागू किया है। यह प्रणाली राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल, सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) और बीमा कंपनियों की लेखा प्रणाली को आपस में जोड़ती है, जिससे दावों का समयबद्ध और पारदर्शी निपटान सुनिश्चित किया जा सके।
क्लेम में देरी पर लगेगा 12 प्रतिशत जुर्माना
सरकार ने बीमा दावों में देरी रोकने के लिए सख्त प्रावधान भी किए हैं। खरीफ 2024 से यदि कोई बीमा कंपनी समय पर दावा राशि का भुगतान नहीं करती है, तो उसके ऊपर 12 प्रतिशत जुर्माना स्वतः लगाया जाएगा। वहीं खरीफ 2025 से यदि राज्य सरकार अपने हिस्से की प्रीमियम सब्सिडी समय पर जारी नहीं करती है, तो उस पर भी 12 प्रतिशत जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा केंद्र सरकार ने अपने प्रीमियम सब्सिडी हिस्से को राज्य सरकारों के हिस्से से अलग कर दिया है, ताकि किसानों को केंद्र के हिस्से से संबंधित दावा राशि समय पर मिल सके।
एस्क्रो खाता खोलना हुआ अनिवार्य
योजना में वित्तीय अनुशासन लाने के लिए खरीफ 2025 से सभी राज्य सरकारों के लिए अपने प्रीमियम हिस्से की राशि अग्रिम जमा करने हेतु एस्क्रो (ESCROW) खाता खोलना अनिवार्य कर दिया गया है।
CCE Agri-App और CLAP ऐप से होगा तेज सर्वे
फसल नुकसान के आकलन को और अधिक सटीक बनाने के लिए सरकार ने CCE Agri-App के माध्यम से फसल कटाई प्रयोग (CCE) के आंकड़े एकत्र कर उन्हें NCIP पर अपलोड करने की व्यवस्था की है। साथ ही बीमा कंपनियों को भी CCE प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति दी गई है तथा राज्य सरकारों के भू-अभिलेखों को भी NCIP से जोड़ा गया है।
इसके अलावा क्रॉप लॉस असेसमेंट ऐप (CLAP) विकसित किया गया है, जिसकी मदद से स्थानीय आपदाओं और फसल कटाई के बाद हुए नुकसान का खेत स्तर पर डिजिटल आकलन किया जा सकेगा। इस ऐप का उपयोग प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू करने वाले सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है।
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