आईसीएआर-आरसीईआर पटना पहुंचे कृषि अनुसंधान परिषद के सचिव, किसानों तक तकनीक पहुंचाने पर दिया जोर
22 सितंबर 2026, नई दिल्ली: आईसीएआर-आरसीईआर पटना पहुंचे कृषि अनुसंधान परिषद के सचिव, किसानों तक तकनीक पहुंचाने पर दिया जोर – कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के अपर सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के सचिव ज्ञानेंद्र देव त्रिपाठी ने बिहार सरकार के कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल के साथ आईसीएआर-रिसर्च कॉम्प्लेक्स फॉर ईस्टर्न रीजन (आईसीएआर-आरसीईआर), पटना का दौरा किया। इस दौरान विज्ञान आधारित, मांग आधारित और किसान केंद्रित कृषि अनुसंधान एवं तकनीक प्रसार को मजबूत करने पर जोर दिया गया। सहायक महानिदेशक (कृषि विस्तार) डॉ. आर.के. सिंह भी मौजूद रहे।
अनुसंधान कार्यक्रमों और तकनीकी पहलों की समीक्षा
दौरे के दौरान ज्ञानेंद्र देव त्रिपाठी ने आईसीएआर-आरसीईआर में चल रहे अनुसंधान कार्यक्रमों और खेत स्तर से जुड़ी पहलों की समीक्षा की। उन्होंने प्राकृतिक खेती के दीर्घकालिक परीक्षण, मिलेट आधारित फसल प्रणाली, फल आधारित विविधीकृत पोषण वाटिका, सौर ऊर्जा आधारित कृषि मशीनीकरण और स्मार्ट जल प्रबंधन इकाइयों का अवलोकन किया। उन्होंने जलवायु अनुकूल किस्मों के विकास और भविष्य की जलवायु चुनौतियों से निपटने की तैयारी के लिए रेनआउट शेल्टर और ओपन टॉप चैंबर्स जैसी सुविधाओं का भी जायजा लिया।
एकीकृत कृषि प्रणाली मॉडल देखे
अधिकारियों ने संस्थान के एक और दो एकड़ के एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS) मॉडल का भी निरीक्षण किया। इनमें माइक्रो और नैनो होमस्टेड फार्मिंग मॉडल शामिल हैं। इन मॉडलों को किसानों के खेतों में दोहराने और बड़े स्तर पर लागू करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। पशु फार्म में ब्लैक बंगाल बकरी और मुर्रा भैंस के आनुवंशिक सुधार से जुड़ी पहलों की समीक्षा की गई। इसके अलावा क्षेत्र के देशी पशुधन संसाधनों के संरक्षण और उनके लक्षणों के अध्ययन की जानकारी ली गई। दोनों अधिकारियों ने संस्थान परिसर में पौधरोपण भी किया।
सफल किसानों से की बातचीत
इस अवसर पर आईसीएआर-आरसीईआर की तकनीकों, अनुसंधान उपलब्धियों और किसान केंद्रित नवाचारों की प्रदर्शनी लगाई गई। अधिकारियों ने संस्थान की तकनीक प्रसार पहलों से जुड़े सफल किसानों से बातचीत की। रांची की अल्बिना एक्का ने एकीकृत कृषि प्रणाली के जरिए सालाना करीब 12 लाख रुपए की आय अर्जित करने का अपना अनुभव साझा किया। वहीं रामगढ़ के रामशरण ने ऊंची क्यारियों पर सालभर सब्जी उत्पादन के साथ बकरी और मछली पालन को जोड़कर सालाना करीब 20 लाख रुपए की आय अर्जित करने की जानकारी दी।
विज्ञान आधारित और किसान केंद्रित अनुसंधान पर जोर
ज्ञानेंद्र देव त्रिपाठी ने कहा कि राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कृषि अनुसंधान परिणाम आधारित, खेतों के लिए उपयोगी और उभरती चुनौतियों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने वैज्ञानिकों और किसानों के बीच मजबूत संपर्क स्थापित करने पर जोर दिया, ताकि वैज्ञानिक ज्ञान को ऐसी तकनीकों में बदला जा सके, जिनसे टिकाऊ खेती, संसाधनों के बेहतर उपयोग और कृषि उत्पादकता में सुधार हो। उन्होंने बहुविषयक और समन्वित अनुसंधान, तकनीकों के तेजी से प्रसार तथा राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के साथ बेहतर समन्वय की जरूरत भी बताई।
बिहार सरकार ने सहयोग का भरोसा दिया
बिहार सरकार के कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने आईसीएआर-आरसीईआर के अनुसंधान और तकनीक विकास से जुड़े कार्यों की सराहना की। उन्होंने संस्थान और राज्य कृषि विभाग के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई, ताकि जलवायु अनुकूल और किसान केंद्रित तकनीकों का खेत स्तर पर सत्यापन, व्यापक प्रसार और अपनाने को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने बिहार के किसानों की जरूरतों के अनुरूप सहयोगात्मक अनुसंधान, तकनीक प्रसार और क्षमता निर्माण को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
कृषि की कई तकनीकों पर हो रहा काम
आईसीएआर-आरसीईआर के निदेशक डॉ. अनुप दास ने संस्थान के प्रमुख अनुसंधान कार्यक्रमों, बुनियादी ढांचे और तकनीक प्रसार पहलों की जानकारी दी। उन्होंने जलवायु अनुकूल कृषि, धान के बाद खाली रहने वाले खेतों का टिकाऊ उपयोग, बहु-तनाव वाली परिस्थितियों के लिए फसल सुधार, उन्नत सब्जी और फल किस्मों, एआई/एमएल आधारित सटीक जल एवं पोषक तत्व प्रबंधन, किफायती कृषि मशीनीकरण, एकीकृत कृषि प्रणाली, बहु-स्तरीय कृषि वानिकी तथा पशुधन और मत्स्य पालन में नवाचारों पर संस्थान के कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान पूर्वी भारत की जरूरतों के अनुरूप तकनीक विकसित करने के लिए बहुविषयक दृष्टिकोण से काम कर रहा है। राज्य विभागों, कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके), किसानों और अन्य हितधारकों के साथ साझेदारी मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
प्रकाशन का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान “टेक्नोलॉजी एंड इंस्टीट्यूशनल सिनर्जी फॉर एम्पावरिंग एनईएच फार्मर्स: आईसीएआर-आरसीईआर इनिशिएटिव्स” नामक प्रकाशन का विमोचन किया गया। इसके बाद संस्थान के वैज्ञानिक, तकनीकी और प्रशासनिक कर्मचारियों तथा कृषि विज्ञान केंद्रों के साथ संवाद हुआ। इसमें अनुसंधान की प्राथमिकताओं, अनुसंधान निधि के उचित उपयोग, अनुसंधान-विस्तार संपर्क मजबूत करने और राज्य की योजनाओं के साथ समन्वय जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
आईसीएआर-आरसीईआर के सदस्य सचिव, मीडिया उमेश कुमार मिश्रा ने बताया कि अतिथियों ने किसानों, राज्य विभागों और अन्य हितधारकों के सहयोग से मांग आधारित और किसान हितैषी तकनीक विकसित करने तथा उनके प्रसार के लिए संस्थान के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह दौरा पूर्वी भारत में विज्ञान आधारित, सहयोगात्मक और मांग आधारित कृषि अनुसंधान को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
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