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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

जयपुर में 5वीं राष्ट्रीय स्पाइस कॉन्फ्रेंस शुरू, देशभर से किसान, FPO, उद्योग जगत और विशेषज्ञ जुटे

22 सितंबर 2026, नई दिल्ली: जयपुर में 5वीं राष्ट्रीय स्पाइस कॉन्फ्रेंस शुरू, देशभर से किसान, FPO, उद्योग जगत और विशेषज्ञ जुटे – वर्ल्ड स्पाइस ऑर्गनाइजेशन (WSO) की ओर से जयपुर के नोवोटेल जयपुर कन्वेंशन सेंटर में 5वीं नेशनल स्पाइस कॉन्फ्रेंस-2026 का आयोजन किया गया। “किसानों को सशक्त बनाना, उपभोक्ताओं की सुरक्षा करना” थीम पर आयोजित दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस में किसान, किसान उत्पादक संगठन (FPO), उद्योग जगत, नीति निर्माता, नियामक, शोधकर्ता और मसाला मूल्य श्रृंखला से जुड़े अन्य हितधारक शामिल हुए।

कॉन्फ्रेंस की शुरुआत प्रदर्शनी के उद्घाटन के साथ हुई। इसके बाद आयोजित उद्घाटन सत्र में WSO के चेयरमैन रामकुमार मेनन, स्पाइसेस बोर्ड के सचिव एम.एस. मणिवन्नन, राजस्थान सरकार के कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की प्रमुख सचिव मंजू राजपाल और NSC-2026 की बिजनेस कमेटी के चेयरमैन गणपति के.डी. मौजूद रहे।

किसानों की आय बढ़ाने पर चर्चा

कॉन्फ्रेंस के पहले सत्र में किसान सशक्तीकरण और आय वृद्धि पर चर्चा हुई। इसमें बेहतर बाजार संपर्क, तकनीक तक पहुंच और मूल्य श्रृंखला में मजबूत भागीदारी के जरिए किसानों की आय बढ़ाने पर विचार किया गया। इसके बाद सततता और जिम्मेदार सोर्सिंग विषय पर चर्चा हुई। इसमें किसानों, FPO, प्रोसेसर और खरीदारों के बीच बेहतर सहयोग की जरूरत पर जोर दिया गया। WSO के चेयरमैन रामकुमार मेनन ने कहा कि भारतीय मसाला क्षेत्र का भविष्य किसानों के लिए अधिक मूल्य तैयार करने के साथ उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद पहुंचाने की क्षमता पर निर्भर करेगा। उन्होंने किसान सशक्तीकरण के साथ सततता, जिम्मेदार सोर्सिंग, ट्रेसेबिलिटी और बाजार पहुंच को भी जरूरी बताया।

खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण पर जोर

कॉन्फ्रेंस में खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण पर भी चर्चा हुई। इसमें कीटनाशक अवशेष, गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताओं और मसाला आपूर्ति श्रृंखला में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर विचार किया गया। वक्ताओं ने जागरूकता, परीक्षण क्षमता और अच्छी कृषि व प्रसंस्करण पद्धतियों को अपनाने की जरूरत बताई। स्पाइसेस बोर्ड के सचिव एम.एस. मणिवन्नन ने कहा कि किसानों की आजीविका मजबूत करने के साथ गुणवत्ता, खाद्य सुरक्षा और बाजार पहुंच पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने बताया कि स्पाइसेस बोर्ड विभिन्न पहलों और योजनाओं के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने, बेहतर कटाई-पश्चात प्रक्रियाओं को अपनाने, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को मजबूत करने तथा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की जरूरतों को पूरा करने में हितधारकों का सहयोग कर रहा है।

तकनीक और सप्लाई चेन पर भी मंथन

कॉन्फ्रेंस में नवाचार और भविष्य की तैयारी पर भी चर्चा हुई। इसमें खेती की उत्पादकता, प्रसंस्करण, ट्रेसेबिलिटी, परीक्षण और सप्लाई चेन की दक्षता बढ़ाने में उभरती तकनीकों की भूमिका पर विचार किया गया। इसके साथ ही पोस्ट-हार्वेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल ट्रेसेबिलिटी, फार्म-स्तरीय तकनीक, उन्नत परीक्षण, प्रसंस्करण और वेयरहाउसिंग के महत्व पर भी चर्चा हुई।

किसानों ने बताईं खेती से जुड़ी चुनौतियां

कार्यक्रम के किसान चुनौतियां और फसल परिदृश्य सत्र में किसानों और FPO प्रतिनिधियों ने खेती, कटाई-पश्चात प्रबंधन, बाजार तक पहुंच और बदलती बाजार आवश्यकताओं से जुड़ी चुनौतियां साझा कीं। कॉन्फ्रेंस में किसानों, FPO, प्रोसेसर, निर्यातकों, नियामकों, शोधकर्ताओं, तकनीक प्रदाताओं और अन्य हितधारकों की भागीदारी रही। चर्चाओं में खेत और बाजार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा उत्पादकों की प्राथमिकताओं के साथ उपभोक्ताओं और वैश्विक बाजार की बदलती जरूरतों पर ध्यान देने की आवश्यकता सामने आई।

दूसरे दिन खरीदार-विक्रेता बैठक

कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन ऑर्गेनिक खेती और प्रमाणन से जुड़े बदलते नियम, उपभोक्ता संरक्षण एवं खाद्य सुरक्षा में FPO की भूमिका और खरीदारों की आवश्यकताओं पर सत्र आयोजित होंगे। इसके बाद बायर-सैलर मीट होगी, जिसका उद्देश्य उत्पादकों और खरीदारों के बीच बाजार संपर्क मजबूत करना और नए अवसर तैयार करना है।

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