Ad DesktopAd TabletAd Mobile
पशुपालन (Animal Husbandry)फसल की खेती (Crop Cultivation)

दूध उत्पादन के लिये कुछ उपयोगी सुझाव

25 नवम्बर 2023, भोपाल: दूध उत्पादन के लिये कुछ उपयोगी सुझाव – आज हमारे देश में दूध की काफी कमी है। हमें जितने दूध की आवश्यकता है उतने दूध का उत्पादन नहीं हो पा रहा है। विकसित देशों जैसे इजराइल, अमेरीका, स्वीडन, डेनमार्क आदि देशों में वार्षिक दूध उत्पादन 5000 कि.ग्रा. प्रति पशु प्रतिवर्ष है। इसकी तुलना में भारत में केवल 1000 कि.ग्रा. प्रति पशु प्रति वर्ष है। वैज्ञानिकों के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को 280 ग्राम प्रतिदिन दूध की आवश्यकता पड़ती है जबकि वर्तमान में 190 ग्राम दूध प्रतिदिन प्रति व्यक्ति ही उपलब्ध है। अत: हमारे देश में दूध का उत्पादन बढ़ाने की नितांत आवश्यकता है।

पशुओं को आहार से मुख्यतया प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, खनिज, विटामिंस आदि पोषक पदार्थ मिलते हैं जिनका उपयोग ये पशु अपने जीवन निर्वाह, बढ़ोतरी, उत्पादन, प्रजनन तथा कार्यक्षमता आदि के लिये करते हैं। भारत में पशुओं के कम दूध देने वाले पशु, करोड़ों भूमिहीन और सीमांत कृषक, फसलों के बचे अवशेष का उपयोग चारागाहों की कमी आदि है। ऐसे क्षेत्र जहां पर मिश्रित खेती होती है वहां पर दूध उत्पादन प्राय: अधिक पाया जाता है। दुग्ध उत्पादन को व्यवसाय के रूप में लेने के लिये चारे, दाने, खलियों तथा दानों के उपजात पदार्थ बहुतायत व आसानी से उपलब्ध होने चाहिये।

पशुओं के लिये उचित भोजन वह है जो स्थूल, रूचिकर, रोचक, भूखवर्धक और संतुलित हो और इसमें पर्याप्त हरे चारे मिले हो, उसमें रसीलापन मिला हो और वह संतुष्टि प्रदान करने वाला हो, पशुओं को आमतौर पर दिन में थोड़े-थोड़े समय के अंतर पर 3 बार भोजन देना चाहिए। पशुओं को हरा चारा जैसे गेहंू का भूसा, पुआल आदि के साथ मिलाकर देना चाहिए। चारे व दाने का संसाधन करने से जैसे कुट्टी काटना, दाना पीसना, भिगोना आदि से भी पशु आहार की उपयोगिता बढ़ायी जा सकती है। जहां तक संभव हो सके पशुओं को आवश्यकतानुसार आहार बनाकर पृथक-पृथक रूप से दिया जाये। प्रत्येक गोवंशीय पशु को 2 से 2.5 कि.ग्रा. तथा भैंस को 3 कि.ग्रा. प्रति 100 कि.ग्रा. शरीर भर पर शुष्क पदार्थ देना चाहिए। पशुओं को कुल आहार का 2/3 हिस्सा चारे के रूप में तथा 1/3 हिस्सा दाने के रूप में दिया जाये। गर्भवती गाय व भैसों को 1.5 कि.ग्रा. दाना प्रतिदिन देना चाहिए। शारीरिक वृद्धि करने वाले पशुओं को 1 से 1.5 कि.ग्रा. प्रति पशु शरीर विकास के लिए दिया जाना चाहिए। पशु को जीवन निर्वाह हेतु 1 से 1.5 कि.ग्रा. दाना एवं दूध उत्पादन के लिए क्रमश: गायों को प्रति 3 लीटर दूध एवं भैंस को 2.5 लीटर दूध पर 1 कि.ग्रा. दाना देना चाहिये। पशु आहार में पर्याप्त खनिज लवण व विटामिंस भी होने चाहिए।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

पशुओं को सदैव स्वच्छ पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होना चाहिये। जीवन निर्वाह के लिए एक पशु को लगभग 30 लीटर प्रतिदिन पानी की काफी मात्रा में पानी की आवश्यकता पड़ती है। चूंकि पानी की कमी से दूध उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हैं। नर पशु से वीर्य कृत्रिम विधियों से प्राप्त करके, जांच परख कर, मादा के जनन अंगों में स्वच्छतापूर्वक, उचित समय और उचित स्थान पर पंहुचाने को कृत्रिम गर्भाधान कहते हैं। दुधारू नस्ल के सांडों अथवा उनके हिमीकृत वीर्य से अपनी गायों का गर्भाधान करवा कर उन्नत दुधारू नस्ल की बछिया प्राप्त करनी चाहिए जो दो साल में गाय बनकर गर्भधारण करने योग्य होगी और अधिक दूध देगी। कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से प्राप्त संकर गाय (जर्सी संतति) से ज्यादा दूध मिलता है और उस संकर जर्सी गाय को पुन: जर्सी नस्ल से गाभिन कराने पर 15-20 लीटर दूध देने वाली गाय प्राप्त होती है।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

पशुओं का झुंड से निष्कासन – साधारणत: युवा पशुओं में बांझपन 2-3 प्रतिशत तक तथा प्रौढ़ पशुओं में 5 से 6 प्रतिशत तक पाया जाता है। जिनको कि झुंड से निकाल देना चाहिए ताकि दुग्ध उत्पादन स्तर में कमी न हो पाये और उनसे होने वाली आय पर बुरा असर न पड़े और इन पशुओं पर चारा दाना व देखभाल में होने वाले व्यय को बचाया जा सके।

स्वास्थ्य की देखभाल –  चिकित्सा की जगह, बीमारी की रोकथाम ज्यादा बेहतर होती है ताकि उपचार में उचित निदान की अनिश्चितता के कारण होने वाले व्यय तथा जोखिम से बचा जा सके।
गाय और भैसों को कई प्रकार के रोग लगने की सम्भावना रहती है क्योंकि यहां के मौसम में गरमी एवं आर्द्रता अधिक होती है इससे पशुओं की मृत्यु अधिक होती है। इन बीमारियों से बचने के लिए पशुओं को टीके लगवाने चाहिए।

(कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें)

(नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़,  टेलीग्राम)