Ad DesktopAd TabletAd Mobile
फसल की खेती (Crop Cultivation)

किसानों को खेतों से खरपतवार नियंत्रित करने की सलाह

‘1 जुलाई 2021, इंदौर ।  किसानों को खेतों से खरपतवार नियंत्रित करने की सलाह – कृषि विभाग ने किसानों को सामयिक सलाह देते हुए कहा है कि जिन किसानों ने 10 दिन 15 दिन पहले सोयाबीन की बोनी की है वे अपने खेतों से खरपतवार को नियंत्रित करने के लिये उपाय करें। अनुशंसित विधि को अपनाएं और खरपतवार नाशक दवाईयों का छिड़काव करें। ऐसे किसान जिन्होंने अभी तक सोयाबीन की बोनी नहीं की है , उन्हें सलाह दी गई है कि वे गहरी जुताई करने के पश्चात ही बोनी करें।

मालवा में सोयाबीन की बोवनी जोरों पर

कृषि विभाग द्वारा  किसानों से कहा गया है कि वे कृषि कार्य करते समय कोरोना नियंत्रण के लिए सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करे। ऐसे क्षेत्र जहां सोयाबीन की फसल 10-15 दिन की हुई है वहां के किसानों से कहा गया है कि वे खरपतवारों के कारण सोयाबीन फसल के उत्पादन में होने वाले नुकसान को कम करने के लिए फसल को प्रारंभिक 45 दिन खरपतवार मुक्त रखना अत्यंत आवश्यक हैं। यह सलाह दी गई है  कि किसान अपनी सुविधा अनुसार खरपतवार नियंत्रण की विभिन्न अनुशंसित विधियों (डोरा/कुलपा/हाथ से निंदाई/रासायनिक खरपतवारनाशक) में से किसी एक का प्रयोग करें। सोयाबीन की खड़ी फसल में उपयोगी एवं अनुशंसित खरपतवारनाशकों का उपयोग करें।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile
2-3 किस्मों की बोनी करें

ऐसे क्षेत्र जहाँ पर सोयाबीन की बोवनी होना है वहां के किसानों से कहा गया है कि उत्पादन क्षमता, पकने की अवधि तथा जैविक कारकों के लिए प्रतिरोधक क्षमता के आधार पर विभिन्न समयावधि में पकनेवाली अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसित 2-3 किस्मों की बोनी करें। प्रत्येक 3 वर्ष में एक बार जमीन  की गहरी जुताई  की जाए । इस वर्ष यदि गहरी जुताई नहीं करनी हो, तो विपरीत दिशाओं में दो बार बक्खर चलाकर खेत को बोवनी हेतु तैयार करें । सलाह दी गई है कि 4-5 वर्ष में एक बार अपने खेत में 10 मीटर के अंतराल पर आड़ी एवं खड़ी दिशा में सब-साईलर चलाएं  इससे अधोभूमि की कठोर परत को तोड़ने में सहायता मिलती है, जिससे जमीन में नमी का अधिक से अधिक संचयन होता है व सूखे की स्थिति में फसल को सहायता मिलती हैं। अंतिम बखरनी के पूर्व पूर्णतः पकी हुई गोबर की खाद की  अनुशंसित मात्रा 5 से 10 टन या मुर्गी की खाद 2.5 टन प्रति हेक्टेर की दर से फैला दें।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें
बोवनी रिज – फरो पद्धति से करें

वैश्विक जलवायु परिवर्तन के परिप्रेक्ष्य  में विपरीत मौसम, सूखे की  स्थिति, अतिवृष्टि आदि से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए सलाह दी गई है कि संभव होने पर सोयाबीन की बोवनी बी.बी.एफ पद्धति या रिज एवं फरो पद्धति से करें। इससे अतिरिक्त पानी का निकास व जल संचयन होने से सूखे की स्थिति में लाभ मिलता है। न्यूनतम 4 इंच वर्षा होने पर ही सोयाबीन की  बोवनी करें जिससे उगी हुई फसल को कम नमी के कारण किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं हों। सोयाबीन की बोवनी हेतु अपने पास उपलब्ध बीज के न्यूनतम 70 प्रतिशत अंकुरण के अनुसार बीज दर का प्रयोग करें। जैसे कि 70 प्रतिशत अंकुरण क्षमता वाले बीज को 70 किलो तथा 55,60.65 या 50 प्रतिशत अंकुरण क्षमता वाले बीज को 18 इंच कतारों की दूरी रखते हुए 90.80.75 या 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज दर का उपयोग करें।