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पशुपालन (Animal Husbandry)राज्य कृषि समाचार (State News)

नौतपा की भीषण गर्मी में पशुओं की देखभाल कैसे करें? टीकमगढ़ के पशु विशेषज्ञ से जानिए जरूरी टिप्स  

28 मई 2026, भोपाल: नौतपा की भीषण गर्मी में पशुओं की देखभाल कैसे करें? टीकमगढ़ के पशु विशेषज्ञ से जानिए जरूरी टिप्स – नौतपा के दौरान पड़ रही भीषण गर्मी और लू का असर अब दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर भी दिखाई देने लगा है। अत्यधिक तापमान के कारण पशुओं में हीट स्ट्रेस बढ़ रहा है, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के साथ दूध उत्पादन घटने का खतरा भी बढ़ गया है। इसी को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, टीकमगढ़ के पशुधन प्रभारी एवं मत्स्य वैज्ञानिक डॉ. सतेंद्र कुमार ने पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी सलाह जारी की है।

कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी.एस. किरार के मार्गदर्शन में जारी इस एडवाइजरी में पशुपालकों से अपील की गई है कि वे नौतपा के दौरान अपने पशुओं की विशेष देखभाल करें, ताकि उन्हें हीट स्ट्रोक और अन्य बीमारियों से बचाया जा सके।

पशुओं को रखें ठंडे और छायादार स्थान पर

विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि पशुओं को सीधे धूप में बांधने के बजाय छायादार और ठंडे स्थान पर रखा जाए। पशुशाला की छत पर पुआल, घास या बोरी की परत बिछाकर दिन में 2 से 3 बार पानी का छिड़काव करने से तापमान नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

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इसके अलावा पशुशाला में पर्याप्त वेंटिलेशन यानी हवा का आवागमन होना जरूरी है। बड़े पशुओं के लिए पंखे, कूलर और फॉगर्स का उपयोग भी लाभकारी बताया गया है।

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दिन में 2-3 बार नहलाएं पशु

डॉ. सतेंद्र कुमार ने बताया कि भीषण गर्मी में पशुओं को दिन में कम से कम 2 से 3 बार ठंडे पानी से नहलाना चाहिए। इससे उनके शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और गर्मी का असर कम होता है।

उन्होंने कहा कि पशुओं को हर समय स्वच्छ और ठंडा पेयजल उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है, क्योंकि गर्मी के दिनों में पशुओं को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक पानी की आवश्यकता होती है।

सुबह-शाम दें चारा

विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि पशुओं को भारी चारा, भूसा और हरा चारा सुबह या शाम के ठंडे समय में ही खिलाया जाए। दोपहर की तेज धूप में चारा खिलाने से पशुओं के शरीर में गर्मी बढ़ सकती है।

पशुओं के आहार में संतुलित खनिज मिश्रण और नमक शामिल करने की भी सलाह दी गई है, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे।

हीट स्ट्रोक के लक्षणों पर रखें नजर

कृषि विज्ञान केंद्र के अनुसार यदि पशु सुस्त दिखाई दे, खाना-पीना कम कर दे, लगातार हांफे या मुंह से लार टपकने लगे तो यह हीट स्ट्रोक के लक्षण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में पशु को तुरंत छायादार स्थान पर ले जाकर ठंडे पानी की पट्टियां रखनी चाहिए।

विशेषज्ञों ने बताया कि पानी में गुड़, नमक और इलेक्ट्रोलाइट्स मिलाकर पशुओं को पिलाना लू से बचाव में काफी लाभकारी होता है।

टीकाकरण और डीवर्मिंग समय पर कराएं

पशुपालकों को मौसम के अनुसार पशुओं का नियमित टीकाकरण और डीवर्मिंग कराने की भी सलाह दी गई है, ताकि बीमारियों का खतरा कम किया जा सके।

कृषि विज्ञान केंद्र, टीकमगढ़ के विशेषज्ञों ने कहा कि पशुओं के खान-पान और रहने की व्यवस्था में थोड़े से बदलाव से न केवल उनकी जान बचाई जा सकती है, बल्कि दूध उत्पादन में गिरावट को भी रोका जा सकता है। किसी भी आपात स्थिति में पशुपालक पशुपालन विभाग एवं कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।

 

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