गोभी के प्रमुख कीट एवं रोकथाम

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  • अनुपम सिंह, पीएचडी स्कॉलर (हॉर्टिकल्चर)
    कृषि विज्ञान विभाग, इंटीग्रल विश्वविद्यालय, लखनऊ, (उप्र)

7 दिसम्बर 2022,  गोभी के प्रमुख कीट एवं रोकथाम – गोभी का मौसम आ गया है यह एक लोकप्रिय सब्जी है। हमारे सभी किसान भाई-बहन गोभी की खेती की तैयारी में लगे होंगे जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं कि जाड़ों में गोभी की मांग बढ़ जाती है यह एक स्वादिष्ट एवं लोकप्रिय सब्जी है सभी लोग इसको बहुत पसंद करते हैं। लेकिन जब हमारे किसान भाई इसकी खेती करते हैं तब इसकी फसलों में कई प्रकार के हानिकारक कीटों का प्रकोप समय-समय पर देखा गया है जिसके बारे में जानकारी दी गई है एवं उन कीटों का समसामयिक प्रबंधन कैसे करें यह भी बताया गया है तो आइए जानते हैं गोभी के प्रमुख कीट एवं उनकी रोकथाम के बारे में-

हीरक पतंगा कीट (डायमंड बैक मॉथ)

इस कीट की इल्लियाँ पत्तों के हरे पदार्थ को खाती हैं तथा खाई गई जगह पर केवल सफेद झिल्ली रह जाती है जो बाद में छेदों में बदल जाती है।

प्रबंधन

इस कीट के नियंत्रण के लिए नीम बीज अर्क (4 प्रतिशत) या बी.टी. 1 ग्राम/लीटर या स्पिनोसिड 45 एस.सी. 1 मि.ली./4 लीटर या एमामेक्टिन बेंजोएट 5 एस.सी. 1 ग्राम/2 ली. या क्विनालफॉस 25 ई.सी. 3 मि.ली./लीटर या फेनवेलरेट 20 ई.सी. 1.5 मि.ली./2 ली. पानी का छिडक़ाव करें।

गोभी तितली (कैबेज बटरफलाई)

इस कीट की रोमिल इल्लियाँ झुंड में पौधों के पत्तों को खाती है। इल्लियाँ फूलों में घुसकर इन्हें अपने मैले से बरबाद कर देती हैं।

प्रबंधन
  • शुरू में अंड समूहों व इल्लियों के झुंडों वाले पत्तों को निकाल कर नष्ट कर दें।
  • हीरक पतंगा कीट के इस्तेमाल किए जाने वाले कीटनाशियों का ही प्रयोग करें।
तम्बाकू की इल्ली (टोबैको कैटरपिल्लर)

इस कीट की इल्लियाँ शुरु में झुंड में पत्तों को खाती हंै तथा बाद में दूसरे पौधों पर भी फैल जाती है। फूलगोभी में इल्लियाँ फूलों में घुसकर इसे अपने मैले द्वारा बरबाद कर देती है।

प्रबंधन
  • अंडों व इल्लियों को इक_ा कर नष्ट कर दें।
  • जरुरत पड़ऩे पर हीरक पतंगा कीट के अंतर्गत दर्शाए गए कीटनाशी प्रयोग में लाएं। पूरे खेत की बजाए इल्लियों के झुंडों पर छिडक़ाव काफी प्रभावी होता है।
गोभी सेमी लूपर

इस कीट की इल्लियाँ पत्तों में गोलाकार छेद कर फसल को हानि पहुँचाती है। नियंत्रण  के लिए हीरक पतंगा कीट के नियंत्रण के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कीटनाशी को ही प्रयोग में लाएँ।

गोभी छेदक (कैबेज बोरर)

इस कीट की इल्लियाँ सुरंग बनाकर पत्तों को खाती हैं तथा बाद में फूल को भेदकर बर्बाद कर देती हंै। इस कीट की रोकथाम के लिए हीरक पतंगा कीट के नियंत्रण के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कीटनाशी ही प्रयोग करें।

चेपा (एफिड)

इस कीट के शिशु व वयस्क दोनों ही पत्तों से रस चूसते हैं जिससे पत्ते टेढ़े-मेढ़े हो जाते हैं। अधिक प्रकोप से फूल नहीं बनते । कीटों के मधुबिन्दु पर काली फफूंद आने से पौधों का भोजन बनाने की क्षमता कम हो जाती है।

प्रबंधन
  • अधिक प्रकोषित पत्तों को निकाल कर नष्ट कर दें।
  • लेडी बर्ड भृंग का संरक्षण करें।
  • डाइमिथिएट 30 ई.सी. 2 मि.ली./लीटर या क्विनलफॉस 25 ई.सी. 2 मि.ली./लीटर या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. 1 मि.ली./3 लीटर पानी का छिडक़ाव करें।
आरा मक्खी (मस्टर्ड सॉफ्लाई)

आरा मक्खी के शिशु पत्तों में छेदकर फसल को हानि पहुँचाते हैं। इनके अलावा ये तने, टहनियों व फलियों को भी हानि पहुँचाते हैं।

प्रबंधन
  • इसके शिशुओं को सुबह और शाम के समय इक_ा कर नष्ट कर दें।
  • नीम बीज अर्क (4 प्रतिशत) या क्विनालफॉस 25 ई.सी. 2 मि.ली./लीटर या स्पिनोसिड 45 एस.सी. 1 मि.ली./4 लीटर का छिडक़ाव करें।
चितकबरा बम (पेंटेड बग)

इस कीट के शिशु वयस्क दोनों ही पत्तों से रस चूसकर फसल को हानि पहुँचाते हैं।

प्रबंधन
  • फसल की कटाई के बाद फसल अवशेषों को खेत से हटा दें क्योंकि ये कीट इन पर खूब पनपते हैं।
  • इमिडाक्लोप्रिड 17.8 1 मि.ली./3 लीटर या क्विनालफॉस 25 ई.सी. 2 मि.ली./लीटर का छिडक़ाव करें।
गोभी की मैगट (कैवेज मैगट)
  • इस मक्खी कीट के शिशु पौधों की छोटी जड़ों को नुकसान पहुँचाते हुए बड़ी को भी हानि पहुँचाते हैं।
  • इस कीट की रोकथाम के लिए क्लोरोपाइरीफॉस 20 ई.सी. 2.5 लीटर/हेक्टेयर की दर से सिंचाई करें।
निष्कर्ष

प्राय: यह देखा जाता है फसल लगाने के बाद कीटों के प्रकोप से किसान भाइयों को भारी क्षति उठानी पड़ती है जिसके कारण किसान का काफी नुकसान हो जाता है, यदि किसान भाई उपरोक्त बताई गई विधि से गोभी में लगने वाले इन हानिकारक कीटों का नियंत्रण वैज्ञानिक विधि से  करते हैं तो वे अपनी फसलों को नुकसान होने से बचा सकते हैं और सुरक्षित तरीके से ले जाकर बाजार में बेच कर उचित मूल्य प्राप्त कर सकते हैं।

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