Ad DesktopAd TabletAd Mobile
फसल की खेती (Crop Cultivation)

जानिए केले की किस्म पूवाँ (एएबी) को देश भर में क्यों उगाया जाता हैं  

30 दिसम्बर 2023, भोपाल: जानिए केले की किस्म पूवाँ (एएबी) को देश भर में क्यों उगाया जाता हैं – केले की किस्म पूवाँ (एएबी) को मैसूर, चंपा, लालवेल्ची, करपुरा, चक्करकेली और पालवनकोडन के नाम से भी जाना जाता हैं। यह पूरे देश में उगाई जाने वाली प्रमुख व्यावसायिक किस्मों में से एक है। यह एक दृढ़ किस्म है, जिसे विभिन्न प्रकार की मिट्टी और जलवायु परिस्थितियों में उगाया जा सकता है।

पूवाँ (एएबी) की फसल की अवधि 13-14 महीने होती है। पूवन (एएबी) के फल के गुच्छे का औसत वजन 20 किलोग्राम होता है और इसमें 10-13 हाथ होते हैं जिनमें 130-180 फल/गुच्छे होते हैं। गुच्छे मध्यम आकार के होते हैं और इनमें रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है। फल की लम्बाई 10-13 सेमी तथा घेरा 9-10 सेमी होता है। इन फलो का आकार मध्यम व ऊपरी सिरा बोतल जैसा होता हैं। इसके फल का छिलका मध्यम मोटा होता हैं। यह फल पीले रंग के गूदे के साथ अम्लीय मीठे होते हैं। इसके नर फूल की कली में अचार उद्योग सहित कई उपयोगिताएँ होती हैं।

(कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें)

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

(नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़,  टेलीग्राम)

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें