स्वास्थ्य-शिक्षण गर्मियों की न लें टेंशन

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अनुलोम-विलोम प्राणायाम -पद्मासन लगाकर कंधे, गर्दन, रीढ़ की हड्डी को सीधी रखकर बैठें। बाएं हाथ में ज्ञान मुद्रा लगाएं। दाहिनी हाथ को ऊपर उठाकर दाहिनी नासिका को अंगुली से दबाएं और बांई नासिका से गहरी लम्बी सांस लें। इसके बाद बाई नासिका को अंगुली में दबाकर दाहिनी नासिका से धीरे-धीरे सांस छोडं़े। विपरीत क्रम में इस तरह करना है। इस प्राणायाम को 3 से 10 मिनट तक करें।
लाभ – इस प्राणायाम के जरिए शरीर में स्थित लाखों – करोड़ों नाडिय़ों का शोधन होता है। इससे जुकाम, खांसी, माइग्रेन सिरदर्द, डिप्रेशन आदि में आराम मिलता है। साथ ही मन की शक्ति भी जाग्रत होती है।
शीतली प्राणायाम – पद्मासन में बैठकर दोनों हाथ से ज्ञान मुद्रा लगाएं। होठों को गोलाकार करते हुए जीभ को पाईप की आकृति में गोल बनाएं। अब धीरे-धीरे गहरी लम्बी सांस जीभ से खींचें। इसके बाद जीभ अंदर करके मुंह बंद करें और सांस को कुछ देर यथाशक्ति रोकें। फिर दोनों नासिकाओं से धीरे-धीरे सांस छोड़ें। इस प्राणायाम को 20 से 25 बार करें।
लाभ – इससे गर्मी जनित रोग, एसिडिटी, क्रोध आदि के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
कुंजल क्रिया – यह क्रिया सुबह खाली पेट की जाती है। उकडू (कागासन) बैठकर 4-5 गिलास गुनगुने पानी में थोड़ा सा सैंधा नमक मिलाकर पी लें। अब खड़े होकर 90 डिग्री से आगे झुककर दाहिने हाथ की तर्जनी और मध्यमा उंगली को हलक में डालकर छोटीजीभ को दबाएं। पिया हुआ सारा पानी जब तक उल्टी के जरिये बाहर न आ जाए, अंगुली जीभ से टच करते रहें। इस दौरान बाएं हाथ से पेट पर भी दबाव डालें।
लाभ- पेट के विजातीय द्रव, अम्ल, गैस, पित्त बाहर आ जाते हैं. अजीर्ण, एसिडिटी दूर हो जाती है।
प्राकृतिक उपचार
गीली चादर लपेट -इसे वैट शीट पैक, होल बॉडी कम्प्रेस भी कहा जाता है। इसका प्रयोग जाता है मानसिक दुर्बलता और विकृति दूर करने के लिये किया था। इसमें सिर और गर्दन अच्छी प्रकार धो लें। फिर पानी पियें। अब एक बड़ी सूखी चादर को गीला कर निचोड़ लें. जमीन या चारपाई पर एक कम्बल बिछा लें। इसके बाद गीली चादर को कंबल पर बिछा दें। पूरे शरीर को गीली चादर से लपेट लें। इसके बाद कम्बल को इस प्रकार लपेटें जिससे शरीर पर लपेटी हुई चादर पूरी तरह ढक जाए। सिर पर गीला तौलिया रखें। बीच-बीच में ठंडा पानी या शिरोधार डालें। अब 45 मिनट के लिए सो जाएं। इसके बाद ठंडे पानी से शॉवर बाथ या स्पंज बाथ लें। इस स्नान को प्राकृतिक चिकित्सालय से सीखकर भी किया जा सकता है।
मडबाथ- यह गर्मियों में आनन्द देने वाला विशेषज्ञ स्नान है। इससे न सिर्फ झुलसती गर्मी से आराम मिलता है, बल्कि त्वचा भी अधिक मुलायम और चिकनी हो जाती है। इस स्नान में खेतों की छह फुट नीचे की मिट्टïी या समुद्र की रेत काम में ली जा सकती है। इस मिट्टïी को धूप में 2-3 घंटे सुखाएं। इसके बाद रात को चन्द्रमा की रोशनी में मिट्टïी के बर्तन में पानी डालकर मिट्टïी को भिगोकर रखें। सुबह लकड़ी से मिट्टïी को तब तक मिलाएं, जब तक वह चिकनी न हो जाए। आवश्यकतानुसार इसमें नीम की पत्तियां या गुलाब, गेंदे की पंखुडिय़ां भी मिलाई जा सकती है। लेप तैयार होने के बाद इसे पूरे शरीर पर लगाएं और करीब 45 मिनट तक इसे सुखाएं। इसके बाद खुले पानी से नहाएं या शॉवर बाथ लें। यदि त्वचा रुखी हो गई हो तो नहाने के बाद थोड़ा सा नारियल तेल भी लगाया जा सकता है।
मिट्टïी का लेप – यदि पूरा मडबाथ न ले सकें तो केवल पेट पर भी मिट्टïी का लेप लगाया जा सकता है। मिट्टïी के अभाव में पेट पर ठंडे पानी का तौलिया भी कुछ हद तक लाभकारी है। इसके अलावा पैरों में जलन होने पर तलवों पर मिट्टïी या मेंहदी का लेप या फिर लौकी, करेले आदि का गूदा लगाया जा सकता है।
(सभी उपचार प्राकृतिक चिकित्सालय में चिकित्सक की सलाह पर ही ले)

गर्मियां शुरू होते ही डिप्रेशन, एसिडिटी, गैस, कब्ज, जी घबराना, सीने में दर्द, जलन, चक्कर कई तरह की बीमारियां महिलाओं को घेर लेती हैं। घर के कामकाज में व्यस्त महिलाएं रोज की बीमारी हैं, कौन जाएगा डाक्टर के यहां कहकर इलाज को टालती रहती हैं। लेकिन महिलाएं चाहे तो डाक्टर्स और ढेर सारी दवाईयों के झंझट में पड़े बगैर भी कुछ घरेलू उपायों और प्राकृतिक उपचार के जरिए इन परेशानियों से छुटकारा पा सकती हैं।

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