फार्मर आईडी बनाने में उत्तर प्रदेश अव्वल
देश में 10.18 करोड़ से अधिक किसानों की डिजिटल पहचान तैयार, मध्यप्रदेश तीसरे स्थान पर
28 जुलाई 2026, भोपाल: फार्मर आईडी बनाने में उत्तर प्रदेश अव्वल – देश के करोड़ों किसानों को सरकारी योजनाओं और कृषि सेवाओं से डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार तेजी से काम कर रही है। अब तक देश में 10.18 करोड़ से अधिक किसानों की किसान पहचान तैयार की जा चुकी है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पात्र किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी, तेज और सरल तरीके से पहुंचाना है।
किसान पहचान के माध्यम से किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और कृषि सेवाओं से एक साझा डिजिटल व्यवस्था के तहत जोड़ा जा रहा है। इसमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि उपज की खरीद, कृषि ऋण, कृषि सामग्री वितरण और प्राकृतिक आपदाओं से मिलने वाली राहत जैसी प्रमुख सेवाएं शामिल हैं।
डिजिटल किसान पहचान व्यवस्था लागू होने के बाद सरकार के पास किसानों से संबंधित जानकारी एकीकृत रूप में उपलब्ध हो सकेगी। इससे पात्र किसानों की पहचान करने, सही हितग्राही तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने और सीधे बैंक खाते में राशि भेजने की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
उत्तर प्रदेश सबसे आगे
सरकारी आंकड़ों के अनुसार किसान पहचान बनाने के मामले में उत्तर प्रदेश देश में सबसे आगे है। राज्य में अब तक 2.43 करोड़ से अधिक किसानों की डिजिटल पहचान तैयार की जा चुकी है।
इसके बाद महाराष्ट्र में करीब 1.35 करोड़, मध्यप्रदेश में 1.13 करोड़ और राजस्थान में 87.23 लाख किसानों की किसान पहचान बनाई जा चुकी है। कर्नाटक, गुजरात, बिहार सहित अन्य राज्यों में भी बड़ी संख्या में किसानों को इस व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है।
फसल बीमा में उपग्रह तकनीक से बढ़ेगी पारदर्शिता
किसानों को समय पर और बेहतर फसल बीमा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ा रही है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत उपग्रह चित्रों और दूरसंवेदी तकनीक के उपयोग का दायरा बढ़ाया जा रहा है।
इसके लिए तकनीक आधारित उपज आकलन प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। इसकी मदद से बीमा इकाई स्तर पर फसल उत्पादन का वैज्ञानिक तरीके से अनुमान लगाया जा रहा है। इससे फसल कटाई प्रयोगों से प्राप्त आंकड़ों को अधिक मजबूत आधार मिलने की उम्मीद है।
उपग्रह आधारित तकनीक से बाढ़, सूखा और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान भी तेजी से की जा सकेगी। इससे फसल नुकसान का आकलन जल्द करने और बीमा दावों के निपटारे में होने वाली देरी कम करने में मदद मिलेगी।
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