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राज्य कृषि समाचार (State News)

सोयाबीन फसल को कीटों से बचाएं

इंदौर। प्रदेश में लगातार विपरीत मौसम के चलते सोयाबीन की फसल पर खासा प्रभाव पड़ा है। मालवा अंचल में सोयाबीन उत्पादक किसानों को समस्या का सामना करना पड़ा रहा है। अकेले छिंदवाड़ा जिले में ही लगभग 80 हजार हेक्टेयर में लगी सोयाबीन फसल खराब होने लगी है। पौधे यलो मोजेक रोग का शिकार हो रहे हैं। उल्लेखनीय है कि यलो मोजेक सोयाबीन में लगने वाला विषाणु रोग है, जिसका फैलाव सफेद मक्खी के कारण होता है। यह मक्खी जहां रस चूसती है, वहीं लार छोड़ देती है। इस कारण विषाणु फैल जाता है। इसके प्रभाव से पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और प्रकाश संश्लेषण की क्रिया बंद हो जाती है। इस बीमारी का शुरु में ही नियंत्रित कर लिया जाए तो हानि से बचा जा सकता है। इससे बचने के लिए इमिडाक्लोप्रिड 0.5 मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। डायमिथोएट 30 ईसी एक से सवा मिली प्रति लीटर पानी में घोल कर उसका छिड़काव करने से लाभ मिल सकता है
वहीं, सोयाबीन को विभिन्न रोगों से बचाने के लिए सोयाबीन अनुसंधान निदेशालय एवं कृषि विभाग की ओर से सलाह दी गई है कि-

रबी फसलों में कीट -रोग प्रबंधन

1. अविलम्ब जल निकास की व्यवस्था करें।
2. पानी को खेत मेें अधिक समय तक भरा न रहने दें।
3. डोरा/कोल्पा/हस्त चलित हो आदि से अंत:कर्षण करें, जिससे मृदा नमी की हानि नहीं हो।
4. जैविक मल्च (सोयाबीन/गेहूं भूसा/ अन्य) उपलब्ध हो तो सोयाबीन कतारों के बीच मल्च 5 टन प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग करें।
खरपतवार उन्मूलन
1. सोयाबीन की फसल जहां पर 15-25 दिन की हो गयी है, वहां पर वर्तमान में खरपतवार नियंत्रण आवश्यक है।
2. खरपतवार नियंत्रण के लिए इमिझाथाइपर/ क्विझालोफॉप इथाइल/ क्विझालोकॉप-पी-टेफूरील/ फिनोक्सीप्रॉप-पी-इथाइल /क्विझालोफॉप इथाइल/ क्विझालोफॉप-पी-टेफूरील/ फिनोक्सीप्राप-पी-इथाइल 1 लीटर/हेक्टेयर या क्लोरीमुरान इथाइल दर 36 ग्राम प्रति हेक्टेयर) रसायनों का छिड़काव कर सकते हैं।
कीटों से बचाव
1. जिन क्षेत्रों में वर्षा हो गई, वहां पत्ती खाने वाली इल्लियों के प्रकोप की संभावना है।
2. फसल में कीट भक्षी पक्षियों के बैठने के लिये बर्ड-पर्च एवं फिरोमेन ट्रेप लगाएं।
3. पत्ती खाने वाली इल्लियों की प्रारंभिक अवस्था दिखने पर सूक्ष्म जीव जैसे ब्यूवेरिया बेसिआना (फफूंद) अथवा बेसीलस थूरिजिएन्सिस (बैक्टेरिया) अथवा न्यूक्लीयर पॉलीहेड्रोसिस वायरस आधारित कीटनाशक का छिड़काव करें।
4. पत्ती खाने वाले कीड़ों के प्रबंधन के लिये रायनेक्सीपायर (क्लोरएन्ट्रानिलीप्रोल) 100 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर अथवा क्वीनालफॉस 1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर अथवा इण्डोक्साकार्ब 500 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

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