भोपाल में शुरू हुई ‘व्हाइट रिवॉल्यूशन’ की नई मुहिम, 76 गांवों में लागू हो रहे नए मॉडल; पशुपालकों को मिलेगा सीधा फायदा
23 जून 2026, भोपाल: भोपाल में शुरू हुई ‘व्हाइट रिवॉल्यूशन’ की नई मुहिम, 76 गांवों में लागू हो रहे नए मॉडल; पशुपालकों को मिलेगा सीधा फायदा – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने के लक्ष्य को साकार करने के लिए भोपाल जिले में पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर नवाचार लागू किए जा रहे हैं। इन पहलों का उद्देश्य पशुपालकों की आय बढ़ाना, उन्नत नस्ल के पशुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा डेयरी क्षेत्र को अधिक लाभकारी और आत्मनिर्भर बनाना है। जिले के 76 गांवों में विभिन्न योजनाओं और मॉडल के माध्यम से पशुधन विकास और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने का अभियान तेज किया गया है।
उन्नत नस्ल के पशुओं के लिए बना ब्रीडर एसोसिएशन
उपसंचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग डॉ. अभिजीत शुक्ला ने बताया कि जिले में उन्नत नस्ल के दुधारू पशुओं का स्थानीय बाजार विकसित करने के लिए ब्रीडर एसोसिएशन का गठन किया गया है। वर्तमान में इसमें 29 सदस्य शामिल हैं। इसके संचालन के लिए जिला स्तरीय ब्रीडर प्रकोष्ठ भी गठित किया गया है, जिसमें दो शासकीय और छह अशासकीय सदस्य शामिल हैं। प्रकोष्ठ की अध्यक्षता अजय सिंह राठौर कर रहे हैं।
इस पहल से पशुपालकों को स्थानीय स्तर पर ही उच्च गुणवत्ता वाले, स्थानीय जलवायु के अनुरूप और अधिक रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले पशु उपलब्ध हो सकेंगे। इससे अन्य राज्यों से पशु खरीदने में होने वाले अतिरिक्त खर्च और समय की बचत भी होगी।
76 गांवों में संचालित हो रही क्षीर धारा ग्राम योजना
जिले में क्षीर धारा ग्राम योजना का प्रथम चरण 76 गांवों में लागू किया गया है। यह योजना पांच विभागों के समन्वित प्रयासों से संचालित की जा रही है। योजना के तहत पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण, पोषण प्रबंधन, नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान, नियमित टीकाकरण, निकृष्ट सांडों का बधियाकरण तथा बांझपन निवारण शिविर जैसी गतिविधियों को प्राथमिकता दी जा रही है।
इसके अलावा पात्र पशुपालकों को किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने, निराश्रित गौवंश को गौशालाओं में पुनर्वासित करने, चारा विकास और जैविक खाद निर्माण जैसे कार्य भी किए जा रहे हैं। विभाग का मानना है कि इन प्रयासों से गांवों में दुग्ध उत्पादन बढ़ने के साथ पशुधन प्रबंधन भी मजबूत होगा।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी लखपति गौपालक दीदी योजना
ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से लखपति गौपालक दीदी योजना भी शुरू की जा रही है। योजना के तहत अवर्णित गायों और भैंसों का कृत्रिम गर्भाधान कराया जाएगा, जिससे उच्च उत्पादकता वाली बछिया और पड़िया प्राप्त होंगी।
वैज्ञानिक पोषण और बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन के माध्यम से इन पशुओं से पारंपरिक नस्लों की तुलना में करीब ढाई गुना अधिक दूध उत्पादन होने की संभावना है। विभाग के अनुसार इससे प्रत्येक पशुपालक को पशु के जीवनकाल में तीन से चार लाख रुपये तक का अतिरिक्त लाभ मिल सकता है।
कामधेनु योजना से डेयरी उद्यमियों को प्रोत्साहन
डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के तहत जिले में मध्यम स्तर के डेयरी उद्यमियों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। वर्तमान में पांच पशुपालकों द्वारा 25-25 भैंसों की क्षमता वाले डेयरी प्रकल्पों का निर्माण किया जा रहा है, जबकि एक पशुपालक 25 गायों की क्षमता वाला डेयरी प्रकल्प विकसित कर रहा है।
इन परियोजनाओं के माध्यम से जिले में संगठित डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
1200 पशुपालकों को मिलेगा किसान क्रेडिट कार्ड
पशुपालन गतिविधियों के विस्तार के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। पैक्स समितियों के माध्यम से जिले के 1200 पशुपालक कृषक सदस्यों को पशुपालन किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है। इससे पशुपालकों को पशुधन बढ़ाने, चारा प्रबंधन और डेयरी गतिविधियों के विस्तार के लिए आवश्यक पूंजी आसानी से मिल सकेगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती
पशुपालन एवं डेयरी विभाग की इन पहलों को जिले में डेयरी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्नत नस्ल के पशु, वैज्ञानिक प्रबंधन, वित्तीय सहायता और महिला सशक्तिकरण पर आधारित ये योजनाएं न केवल दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में मदद करेंगी, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में भी अहम भूमिका निभाएंगी। विभाग को उम्मीद है कि इन प्रयासों से भोपाल जिला प्रदेश में डेयरी विकास का एक मॉडल बनकर उभरेगा।
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