आधुनिक खेती बनी मुनाफे का सौदा! धान की पारंपरिक खेती छोड़ किसान ने अपनाई तकनीक, 1.5 लाख तक पहुंची आय
10 जुलाई 2026, रायपुर: आधुनिक खेती बनी मुनाफे का सौदा! धान की पारंपरिक खेती छोड़ किसान ने अपनाई तकनीक, 1.5 लाख तक पहुंची आय – छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के विकासखंड लोहंडीगुड़ा के ग्राम साडरा निवासी 47 वर्षीय किसान खगपति ने आधुनिक खेती और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर अपनी खेती की तस्वीर बदल दी है। कभी वर्षा आधारित पारंपरिक धान की खेती पर निर्भर रहने वाले खगपति आज उन्नत कृषि तकनीकों की मदद से सालाना 1.50 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी सफलता अब क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गई है।
खगपति के पास करीब ढाई हेक्टेयर कृषि भूमि है। पहले उनके खेत में सिंचाई की कोई व्यवस्था नहीं थी और वे केवल पारंपरिक तरीके से धान की खेती करते थे। कम उत्पादन और अधिक लागत के कारण उनकी सालाना आय मुश्किल से 80 हजार 250 रुपये तक ही पहुंच पाती थी।
सरकारी योजनाओं से बदली खेती की तस्वीर
खगपति के जीवन में बदलाव तब आया जब उन्हें कृषि विभाग का मार्गदर्शन और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिला। उनके खेत में नलकूप खनन कराया गया और सोलर पंप लगाया गया, जिससे सिंचाई की समस्या दूर हो गई। इसके साथ ही वे एक्सटेंशन रिफॉर्म्स (आत्मा) योजना के तहत आयोजित प्रशिक्षण, किसान भ्रमण और संगोष्ठियों से जुड़े। यहां उन्होंने फसल विविधीकरण, बेहतर फसल प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी हासिल की।
तीन साल में दोगुनी के करीब हुई आय
पिछले तीन वर्षों से खगपति उन्नत तकनीकों के साथ खेती कर रहे हैं। आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने का परिणाम यह रहा कि उनकी सालाना आय बढ़कर 1.50 लाख रुपये से अधिक हो गई। यानी पहले की तुलना में उनकी आय लगभग दोगुनी हो चुकी है।
दूसरे किसानों को भी कर रहे प्रेरित
खगपति अब अपने गांव के अन्य किसानों को भी केवल धान पर निर्भर न रहकर फसल विविधीकरण अपनाने और नई कृषि तकनीकों का उपयोग करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनकी सफलता ने आसपास के किसानों का भी आधुनिक खेती की ओर रुझान बढ़ाया है।
कृषक उन्नति योजना का लाभ लेने की अपील
कृषि विभाग के उप संचालक ने किसानों से कृषक उन्नति योजना का लाभ लेने की अपील की है। उन्होंने बताया कि यदि कोई किसान पिछले वर्ष धान की खेती वाले खसरे में इस बार वैकल्पिक फसल लगाता है, तो उसे 15 हजार रुपये प्रति एकड़ अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। इच्छुक किसान अपने क्षेत्र के मैदानी कृषि अधिकारी या स्थानीय सहकारी समिति (लैम्प्स) में जाकर पंजीयन करा सकते हैं।
‘खेती भी बन सकती है मुनाफे का व्यवसाय’
खगपति का कहना है कि यदि किसान सही समय पर आधुनिक तकनीकों को अपनाएं और सरकारी योजनाओं का लाभ लें, तो खेती को भी मुनाफे का व्यवसाय बनाया जा सकता है। उनका मानना है कि नई तकनीक और बेहतर प्रबंधन से कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल कर किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है।
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