पशुपालन (Animal Husbandry)राज्य कृषि समाचार (State News)

दुग्ध उत्पादन और मिल्किंग मशीन का महत्व

लेखक: डॉ. निर्भय भावसार, एम.वी.एससी. – प्रसार शिक्षा विभाग, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली, अंशिका सिंह, बी.वी.एससी. एवं ए.एच. (इंटर्न), पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय, रीवा

07 जुलाई 2026, भोपाल: दुग्ध उत्पादन और मिल्किंग मशीन का महत्व – भारत में प्राचीन समय से गाय, भैंस, बकरी आदि दुग्धारू पशुओं का पालन ग्रामीण जीवन और कृषि अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। पारंपरिक रूप से दूध हाथों से निकाला जाता था, जिसमें अधिक समय और श्रम लगता था। तकनीकी विकास के साथ मिल्किंग मशीन का उपयोग शुरू हुआ, जो गाय, भैंस, बकरी और भेड़ जैसे दुग्धारू पशुओं से स्वचालित एवं वैज्ञानिक तरीके से दूध निकालने का आधुनिक उपकरण है।

इसमें थनों पर विशेष कप लगाए जाते हैं और वैक्यूम प्रणाली की सहायता से दूध सुरक्षित रूप से एकत्र किया जाता है। मिल्किंग मशीन से दूध दुहने की प्रक्रिया तेज, स्वच्छ और श्रम-बचत वाली बनती है तथा दूध की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायता मिलती है। वर्तमान में यह आधुनिक डेयरी फार्मों के साथ-साथ छोटे एवं मध्यम पशुपालकों के लिए भी उपयोगी तकनीक सिद्ध हो रही है।

मिल्किंग मशीन के प्रकार

बाजार में मुख्यतः दो प्रकार की मिल्किंग मशीनें उपलब्ध होती हैं, जिन्हें पशुपालक अपनी आवश्यकता एवं पशुओं की संख्या के अनुसार चुन सकते हैं। ये मशीनें दूध निकालने की क्षमता एवं उपयोग के आधार पर अलग-अलग होती हैं।

सिंगल बकेट मिल्किंग मशीन

सिंगल बकेट मिल्किंग मशीन दूध दुहने के लिए उपयोग की जाने वाली एक साधारण, कॉम्पैक्ट और सुविधाजनक मशीन है। यह विशेष रूप से छोटे डेयरी फार्मों तथा सीमित संख्या में दुग्धारू पशु रखने वाले पशुपालकों के लिए उपयुक्त होती है।

इस मशीन द्वारा एक बार में केवल एक पशु का दूध निकाला जाता है और प्राप्त दूध सीधे एक ही बकेट या पात्र में संग्रहित किया जाता है। इसकी कीमत अपेक्षाकृत कम होने के साथ-साथ इसका संचालन, रखरखाव एवं सफाई भी सरल होती है, जिससे यह छोटे पशुपालकों के बीच लोकप्रिय है।

डबल बकेट मिल्किंग मशीन

डबल बकेट मिल्किंग मशीन, सिंगल बकेट मिल्किंग मशीन का उन्नत रूप है, जिसे एक साथ दो दुग्धारू पशुओं का दूध निकालने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें दो बकेट या संग्रह इकाइयाँ होती हैं, जिनमें दूध अलग-अलग एकत्र किया जाता है। यह मशीन मध्यम आकार के डेयरी फार्मों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है, जहाँ कम समय में अधिक मात्रा में दूध निकालने की आवश्यकता होती है।

इस मशीन के उपयोग से दूध दुहने की प्रक्रिया तेज एवं अधिक प्रभावी हो जाती है। साथ ही, श्रम एवं समय की बचत होती है तथा डेयरी कार्यों की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। स्वच्छ तरीके से दूध संग्रहित होने के कारण इसकी गुणवत्ता बनाए रखने में भी सहायता मिलती है।

मिल्किंग मशीन की कार्यप्रणाली

मिल्किंग मशीन वैक्यूम एवं पल्सेशन प्रणाली के सिद्धांत पर कार्य करती है। दूध निकालने से पहले पशु के थनों को साफ किया जाता है। इसके बाद विशेष टीट कप थनों पर लगाए जाते हैं। वैक्यूम पंप द्वारा उत्पन्न नियंत्रित दबाव के कारण दूध थनों से निकलकर पाइपों के माध्यम से बकेट या संग्रह पात्र में एकत्र होने लगता है।

पल्सेटर बछड़े के चूसने जैसी प्राकृतिक क्रिया उत्पन्न करता है, जिससे दूध आसानी से निकलता है और थनों को क्षति नहीं पहुँचती। दूध सीधे बंद प्रणाली में एकत्र होने के कारण उसकी स्वच्छता एवं गुणवत्ता बनी रहती है। यह प्रक्रिया तेज, सुरक्षित, स्वच्छ तथा पशु के लिए आरामदायक होती है, जिससे डेयरी प्रबंधन अधिक प्रभावी बनता है।

मिल्किंग मशीन के उपयोग में सावधानियाँ

• मिल्किंग मशीन का उपयोग करते समय स्वच्छता एवं सही प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है। मशीन लगाने से पहले गाय या भैंस के थनों को स्वच्छ पानी से धोकर साफ करें तथा साफ कपड़े से सुखा लें, ताकि दूध में गंदगी या संक्रमण न पहुँचे। इसके बाद मशीन के टीट कप सावधानीपूर्वक थनों पर लगाए जाते हैं और वैक्यूम दबाव को संतुलित रखा जाता है, जिससे दूध सुचारू रूप से बकेट में एकत्र होता रहे

• दूध दुहने के बाद थनों पर एंटीसेप्टिक या लाल दवा लगानी चाहिए, जिससे संक्रमण की संभावना कम हो सके। साथ ही, प्रत्येक उपयोग के बाद मशीन को अच्छी तरह साफ एवं कीटाणुरहित करना आवश्यक है, ताकि अगली बार भी उसका स्वच्छ एवं सुरक्षित रूप से उपयोग किया जा सके।

• मिल्किंग मशीन का उपयोग करते समय पशु को धीरे-धीरे इसकी आदत डालें। प्रारंभिक दिनों से ही मशीन का उपयोग सावधानीपूर्वक शुरू करने से पशु तनावमुक्त रहता है और दूध दुहने की प्रक्रिया सहज बनती है। दूध दुहते समय पशु को शांत एवं आरामदायक वातावरण प्रदान करें, जिससे वह घबराए नहीं और दूध का स्राव सामान्य रूप से हो।

• इसके साथ ही, गौशाला, दूध दुहने के स्थान तथा मिल्किंग मशीन की नियमित सफाई अत्यंत आवश्यक है। दूध निकालने से पहले और बाद में हाथों, थनों, बर्तनों एवं मशीन के सभी भागों को स्वच्छ रखें। उचित स्वच्छता बनाए रखने से दूध की गुणवत्ता बनी रहती है तथा थनैला (Mastitis) जैसे रोगों की संभावना कम हो जाती है।

मिल्किंग मशीन की विशेषताएँ

समय एवं श्रम की बचत

मिल्किंग मशीन की सहायता से दूध दुहने का कार्य तेजी से किया जा सकता है। इससे कम समय में अधिक पशुओं का दूध निकाला जा सकता है तथा श्रमिकों पर निर्भरता कम होती है।

दूध की स्वच्छता एवं गुणवत्ता में सुधार

मशीन द्वारा दूध सीधे बंद पाइपों एवं संग्रह पात्र में एकत्र किया जाता है, जिससे बाहरी गंदगी, धूल एवं रोगजनकों के संपर्क की संभावना कम हो जाती है। परिणामस्वरूप दूध अधिक स्वच्छ एवं गुणवत्तायुक्त प्राप्त होता है।

दूध उत्पादन में वृद्धि

मशीन नियमित एवं समान दबाव के साथ दूध निकालती है, जिससे पशुओं को कम तनाव होता है। सही तरीके से दूध दुहने पर थनों में दूध का अवशेष कम रहता है, जिससे दुग्ध उत्पादन क्षमता में सुधार हो सकता है।

डेयरी प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना

आधुनिक मिल्किंग मशीनों में दूध उत्पादन की निगरानी, रिकॉर्ड संधारण एवं डेटा संग्रह जैसी सुविधाएँ उपलब्ध होती हैं। इससे पशुओं के उत्पादन स्तर का मूल्यांकन करना आसान हो जाता है।

संदर्भ

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  2. Banerjee, G.C. (2018). A Textbook of Animal Husbandry. Oxford & IBH Publishing Co. Pvt. Ltd., New Delhi.
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  4. Indian Council of Agricultural Research (ICAR). Handbook of Animal Husbandry. ICAR Publications, New Delhi.
  5. National Dairy Development Board (NDDB). Dairy Farming and Milking Management Guidelines.
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