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राज्य कृषि समाचार (State News)

MP की महिला किसान का कमाल! 2 गायों से शुरू किया डेयरी कारोबार, अब हर महीने 2 लाख रुपए तक की कर रही कमाई

10 जुलाई 2026, भोपाल: MP की महिला किसान का कमाल! 2 गायों से शुरू किया डेयरी कारोबार, अब हर महीने 2 लाख रुपए तक की कर रही कमाई – मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले की एक महिला किसान ने मेहनत, आधुनिक तकनीक और सरकारी योजना का लाभ लेकर सफलता की नई मिसाल कायम की है। पेटलावद विकासखंड के ग्राम बावड़ी निवासी श्रीमती अर्चना धर्मेन्द्र पाटीदार ने कभी केवल दो दुधारू गायों से डेयरी व्यवसाय की शुरुआत की थी। आज वैज्ञानिक पशुपालन, आधुनिक डेयरी प्रबंधन और एकीकृत कृषि प्रणाली के जरिए वह हर महीने 1.50 लाख से 2 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। उनकी सफलता अब क्षेत्र के अन्य किसानों और पशुपालकों के लिए भी प्रेरणा बन गई है।

अर्चना पाटीदार 12 सदस्यीय संयुक्त परिवार से हैं। वर्ष 2012 में उन्होंने हरियाणा से दो संकर एचएफ दुधारू गाय खरीदकर डेयरी व्यवसाय शुरू किया। उस समय प्रतिदिन करीब 20 लीटर दूध का उत्पादन होता था, जिसे साँची दुग्ध समिति में बेचकर परिवार का खर्च चलाया जाता था। सीमित आय के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लगातार अपने डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाने का प्रयास करती रहीं।

सरकारी योजना से मिली नई उड़ान

वर्ष 2022-23 में अर्चना पाटीदार को आचार्य विद्यासागर गौ-संवर्धन योजना का लाभ मिला। योजना के तहत 3.80 लाख रुपये की इकाई लागत पर उन्हें 95 हजार रुपये का शासकीय अनुदान मिला। इस आर्थिक सहायता से उन्होंने हरियाणा से पांच उन्नत संकर एचएफ गायें खरीदीं, जिससे उनका छोटा डेयरी व्यवसाय आधुनिक डेयरी फार्म में बदलने लगा।

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वैज्ञानिक पशुपालन से बढ़ा दूध उत्पादन

अर्चना ने आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए गायों का सेक्स सॉर्टेड सीमन से कृत्रिम गर्भाधान कराया। इसका परिणाम यह हुआ कि उनके डेयरी फार्म में आज करीब 20 दुधारू गायें और 20 उन्नत नस्ल की मादा बछियां हैं। बेहतर देखभाल और वैज्ञानिक प्रबंधन की बदौलत दूध उत्पादन बढ़कर 180 से 200 लीटर प्रतिदिन तक पहुंच गया है।

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आधुनिक तकनीक से घटी लागत, बढ़ा उत्पादन

पहले पशुओं को सामान्य चारा और भूसा दिया जाता था, लेकिन अब डेयरी फार्म में साइलेज, सुदाना पशु आहार, मिनरल मिक्सचर और नेपियर घास का उपयोग किया जा रहा है। इससे दूध उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है और उत्पादन लागत में लगभग 2 रुपये प्रति लीटर की कमी आई है।

इसके साथ ही दूध निकालने के लिए मिल्किंग मशीन का उपयोग किया जा रहा है। इससे दूध की गुणवत्ता बेहतर हुई है, उत्पादन में वृद्धि हुई है और पशुओं में थनेला रोग की संभावना भी कम हुई है। साथ ही श्रम की बचत भी हो रही है।

उन्नत नस्ल की बछियों से भी हो रही अतिरिक्त कमाई

ब्रीडर एसोसिएशन की सदस्य के रूप में अर्चना पाटीदार उच्च गुणवत्ता वाली मादा बछियां तैयार कर रही हैं। करीब 45 हजार रुपये की लागत से तैयार होने वाली एक बछिया 14 से 16 महीने बाद लगभग 1.50 लाख रुपये तक में बिक जाती है। इससे उन्हें अतिरिक्त आय होने के साथ क्षेत्र के पशुपालकों को भी स्थानीय स्तर पर उन्नत नस्ल की गायें उपलब्ध हो रही हैं।

गोबर और गौमूत्र का भी कर रहीं बेहतर उपयोग

अर्चना पाटीदार अपने डेयरी फार्म में संसाधनों का भी बेहतर उपयोग कर रही हैं। गौमूत्र और शेड से निकलने वाले वेस्टेज वाटर का उपयोग खेतों की सिंचाई में किया जाता है, जबकि गोबर से तैयार बायोगैस से परिवार का भोजन बनता है। बायोगैस से निकलने वाली स्लरी और गोबर खाद को खेतों में जैविक उर्वरक के रूप में उपयोग किया जाता है, जिससे खेती की लागत कम हुई है।

डेयरी के साथ पॉलीहाउस खेती से भी बढ़ी आय

डेयरी व्यवसाय के साथ अर्चना ने उद्यानिकी विभाग के सहयोग से पॉलीहाउस में टमाटर और मिर्च की पौध तैयार करना तथा खीरा और ककड़ी की खेती भी शुरू की। इससे उन्हें हर साल 6 से 8 लाख रुपये की अतिरिक्त आय होती है। इसके अलावा मक्का और सोयाबीन की खेती भी उनकी आय का महत्वपूर्ण स्रोत है।

40 हजार से बढ़कर 2 लाख रुपये तक पहुंची मासिक आय

एक समय अर्चना पाटीदार की मासिक आय करीब 40 हजार रुपये थी, लेकिन आज डेयरी, खेती और अन्य कृषि गतिविधियों से उनकी मासिक आय 1.50 लाख से 2 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। उन्होंने दो स्थानीय युवाओं को रोजगार भी दिया है। बेहतर आर्थिक स्थिति के चलते उन्होंने अपनी बेटी को कोटा में नीट की तैयारी के लिए भेजा है, जबकि बेटे को निजी छात्रावास में पढ़ाई करवा रही हैं।

आज अर्चना पाटीदार की सफलता से प्रेरित होकर आसपास के कई किसान आधुनिक और वैज्ञानिक पशुपालन अपना रहे हैं। उनका डेयरी फार्म क्षेत्र के पशुपालकों के लिए सीखने और प्रेरणा का केंद्र बन गया है। भविष्य में वह साइलेज निर्माण को बढ़ावा देने और अन्य गौपालकों को कम लागत पर इसकी सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम करना चाहती हैं।

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