हरियाणा में नई लैंड पूलिंग पॉलिसी-2026 मंजूर, भूस्वामियों को मिलेगा विकसित जमीन में आधा हिस्सा
07 नवंबर 2026, चंडीगढ़: हरियाणा में नई लैंड पूलिंग पॉलिसी-2026 मंजूर, भूस्वामियों को मिलेगा विकसित जमीन में आधा हिस्सा – हरियाणा सरकार ने अपनी लैंड पूलिंग नीति में बड़ा बदलाव किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लैंड पूलिंग पॉलिसी-2026 को मंजूरी दी गई, जो 2022 में बनी पुरानी नीति की जगह लेगी।
इसी बैठक में ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) और लाइसेंस रिन्यूअल से जुड़े नियमों में भी बदलाव को मंजूरी दी गई है।
जमीन देने वाले किसानों और भूस्वामियों को क्या मिलेगा
नई नीति के तहत जो किसान या भूस्वामी योजनाबद्ध शहरी विकास के लिए अपनी जमीन पूल में देंगे, उन्हें स्वीकृत लेआउट प्लान के अनुसार परियोजना के कुल बिक्री योग्य क्षेत्र का 50 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। बाकी हिस्सा डेवलपर के पास रहेगा। पहले यह हिस्सेदारी जमीन के बाजार मूल्य से जुड़ी होती थी, जिसे नई नीति में हटा दिया गया है।
इसके अलावा भूस्वामियों को सेल डीड रजिस्ट्री की तारीख से चार साल तक, हर साल, अपनी जमीन के हिस्से के अनुपात में एक लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से अतिरिक्त भुगतान भी मिलेगा। अगर यह भुगतान 15 दिन से ज्यादा देरी से होता है, तो उस राशि पर नौ प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज देना होगा।
जिन भूस्वामियों का योगदान 999 वर्ग मीटर से कम है, उन्हें 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत तय मुआवजे या प्लॉट की आरक्षित दर, जो भी ज्यादा हो, के आधार पर नकद भुगतान दिया जाएगा।
डेवलपर्स पर भी सख्ती, समय-सीमा घटी
नई नीति में परियोजना पूरी करने की समय-सीमा पांच साल से घटाकर चार साल कर दी गई है। अगर डेवलपर तय समय में काम पूरा नहीं करता, तो जमीन वापस मूल मालिकों को लौटानी होगी। साथ ही, आवंटित प्लॉट को वापस खरीदने यानी बायबैक की अवधि एक साल से बढ़ाकर तीन साल कर दी गई है, जिससे खरीदारों को भी ज्यादा समय मिलेगा।
एग्रीगेटर, यानी छोटे-छोटे भूस्वामियों की जमीन इकट्ठा करने वाली एजेंसी को, कृषि भूमि के कलेक्टर रेट का 0.5 प्रतिशत शुल्क डेवलपर से मिलेगा।
ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स यानी टीडीआर की व्यवस्था के तहत जिन भूस्वामियों की जमीन सार्वजनिक उपयोग के लिए ली जाती है, उन्हें नकद मुआवजे के बदले दूसरी जगह विकास अधिकार दिए जाते हैं, जिन्हें वे आगे बेच भी सकते हैं। मंत्रिमंडल ने इसी बैठक में टीडीआर और लाइसेंस नवीनीकरण के नियमों में भी बदलाव को मंजूरी दी, ताकि पूरी प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और सरल बन सके।
लैंड पूलिंग की यह व्यवस्था सामान्य भूमि अधिग्रहण से अलग है। इसमें किसान या भूस्वामी अपनी जमीन का मालिकाना हक पूरी तरह नहीं छोड़ते, बल्कि विकसित होने के बाद उसी जमीन के एक हिस्से और तय वार्षिक राशि के हकदार बने रहते हैं। हरियाणा के शहरी विस्तार वाले इलाकों में कृषि भूमि बड़ी मात्रा में इसी तरह की योजनाओं के दायरे में आती रही है, और नई नीति से भूस्वामियों को मिलने वाले मुआवजे का ढांचा पहले से बदल गया है।
पुरानी नीति में भूस्वामियों की हिस्सेदारी जमीन के बाजार मूल्य से जुड़ी होने के कारण अक्सर अनिश्चितता बनी रहती थी, क्योंकि बाजार मूल्य समय के साथ और इलाके के हिसाब से बदलता रहता है। नई नीति में तय प्रतिशत और निश्चित सालाना भुगतान जोड़ने से भूस्वामियों को अपनी आय का एक स्पष्ट अंदाजा पहले से मिल सकेगा।
देश के कई अन्य राज्यों में भी शहरी विस्तार के लिए इसी तरह लैंड पूलिंग मॉडल अपनाया जाता रहा है, जिसमें किसान अपनी जमीन सीधे बेचने के बजाय विकास परियोजना में हिस्सेदार बनते हैं। हरियाणा में गुरुग्राम, फरीदाबाद और पंचकूला जैसे तेजी से बढ़ते शहरी इलाकों के आसपास बड़ी मात्रा में कृषि भूमि इसी तरह की परियोजनाओं के दायरे में आती रही है। नई नीति लागू होने के बाद इन इलाकों के किसानों और भूस्वामियों को पुरानी नीति के मुकाबले ज्यादा स्पष्ट और भरोसेमंद शर्तें मिलने की उम्मीद है।
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