Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राज्य कृषि समाचार (State News)

मिर्च में थ्रिप्स कीट से पत्तियां मुड़ने की समस्या, बेंगलुरु के कृषि वैज्ञानिकों ने बताया उपाय

07 नवंबर 2026,  बेंगलुरु (कर्नाटक): मिर्च में थ्रिप्स कीट से पत्तियां मुड़ने की समस्या, बेंगलुरु के कृषि वैज्ञानिकों ने बताया उपाय – मिर्च की खेती करने वाले किसानों के लिए थ्रिप्स कीट एक पुरानी लेकिन लगातार परेशान करने वाली समस्या है। बेंगलुरु ग्रामीण क्षेत्र में कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, बेंगलुरु की ओर से जारी कृषि मौसम सलाह बुलेटिन में इस कीट से निपटने के उपाय बताए गए हैं।

पत्तियां मुड़ना और रंग बदलना है पहला संकेत

थ्रिप्स बहुत छोटे आकार के कीट होते हैं, जो मिर्च के पौधे की पत्तियों और फूलों का रस चूसते हैं। इससे पत्तियां ऊपर की ओर मुड़ने लगती हैं, उनका रंग बदलने लगता है और पौधे की बढ़वार रुक जाती है। गर्म और सूखा मौसम इस कीट के फैलने के लिए अनुकूल माना जाता है।

अगर समय पर रोकथाम न की जाए, तो थ्रिप्स का प्रकोप फूल और फल बनने की प्रक्रिया पर भी असर डाल सकता है, जिससे उपज में बड़ी गिरावट आ सकती है।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

फिप्रोनिल की सही मात्रा, नीम तेल भी विकल्प

बुलेटिन के मुताबिक, थ्रिप्स की रोकथाम के लिए फिप्रोनिल का छिड़काव 1 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से करने की सलाह दी गई है। जो किसान रासायनिक दवा का इस्तेमाल कम करना चाहते हैं, उनके लिए नीम तेल का भी विकल्प दिया गया है, जिसे 3 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़का जा सकता है।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

विशेषज्ञों की सलाह है कि छिड़काव सुबह या शाम के समय करना बेहतर रहता है, जब तेज धूप नहीं होती, ताकि दवा पत्तियों पर ज्यादा देर तक टिकी रहे और उसका असर बेहतर हो। लगातार एक ही दवा का इस्तेमाल करने से कीट में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने का खतरा भी रहता है, इसलिए दवाओं को बदल-बदल कर इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।

मिर्च भारत के कई राज्यों में एक महत्वपूर्ण नकदी फसल है, और थ्रिप्स जैसे कीटों से समय पर बचाव न होने पर उपज और गुणवत्ता दोनों पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसलिए कृषि वैज्ञानिक खेत की नियमित निगरानी और लक्षण दिखते ही तुरंत कार्रवाई की सलाह देते हैं।

थ्रिप्स का आकार बहुत छोटा होने के कारण शुरुआती प्रकोप का पता लगाना मुश्किल होता है। आमतौर पर खेतों में नीले या सफेद चिपचिपे जाल लगाकर इस कीट की मौजूदगी पर नजर रखी जाती है, जिससे छिड़काव का सही समय तय करने में मदद मिलती है।

थ्रिप्स सिर्फ पौधे का रस चूसकर नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि कई बार यह कीट पौधों में वायरस जनित बीमारियां फैलाने का भी काम करता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि खेत के आसपास की खरपतवार साफ रखी जाए और प्रभावित पौधों के हिस्सों को तुरंत हटा दिया जाए, जिससे संक्रमण आगे न फैले।

लगातार कई मौसम तक एक ही खेत में मिर्च लगाने से भी थ्रिप्स और दूसरे रस-चूसक कीटों का प्रकोप बढ़ने की आशंका रहती है। इसलिए किसानों को फसल चक्र अपनाने और संभव हो तो कम समय के लिए किसी दूसरी फसल को बीच में शामिल करने की सलाह दी जाती है, जिससे कीट का जीवन-चक्र टूट सके।

कर्नाटक के अलावा आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी मिर्च की बड़े पैमाने पर खेती होती है, जहां थ्रिप्स एक आम समस्या मानी जाती है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि खड़ी फसल में रोजाना या कम से कम हफ्ते में दो बार पौधों की जांच करने से कीट का समय पर पता चल जाता है, जिससे नुकसान कम किया जा सकता है। समय पर रोकथाम से न सिर्फ उपज बचती है, बल्कि फसल की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहती है, जिसका सीधा असर किसान को मिलने वाले बाजार भाव पर पड़ता है।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture