12 एकड़ में सब्जी और बागवानी से सालाना लाखों की कमाई, हापुड़ के किसान ज्ञानेंद्र सिंह की कहानी
07 नवंबर 2026, हापुड़ (उत्तर प्रदेश)।: 12 एकड़ में सब्जी और बागवानी से सालाना लाखों की कमाई, हापुड़ के किसान ज्ञानेंद्र सिंह की कहानी – हापुड़ जिले के किसान ज्ञानेंद्र सिंह ने पारंपरिक गेहूं, गन्ना और आलू की खेती छोड़कर सब्जियों और बागवानी की तरफ रुख किया। आज वे फूलगोभी, टमाटर, खीरा, लौकी, तोरई और नींबू जैसी कई फसलें उगाते हैं।
ड्रिप सिंचाई और जैविक खाद से बदली खेती
ज्ञानेंद्र ने वर्ष 2001 में फूलगोभी की खेती शुरू की थी। बाद में उन्होंने हाई टनल और ड्रिप सिंचाई तकनीक अपनाई, जिसके लिए उन्हें सरकार से 90 प्रतिशत सब्सिडी मिली। वे नीम तेल, घर पर तैयार गोबर खाद और ट्राइकोडर्मा का इस्तेमाल करते हैं, और यूरिया का उपयोग बहुत सीमित रखते हैं।
उनका कहना है, “मैं यूरिया का उपयोग जितना कम हो सके, करता हूं।” वे अपनी उपज मदर डेयरी को बेचते हैं, जिससे उन्हें बाजार में अलग से भटकना नहीं पड़ता। मदर डेयरी एनसीआर क्षेत्र में सफल ब्रांड के तहत सब्जियों और फलों की खरीद भी करती है, जिससे किसानों को सीधे एक संस्थागत खरीदार मिल जाता है।
12 एकड़ से लाखों की कमाई, रागी की पैदावार पर मिला सम्मान
ज्ञानेंद्र के मुताबिक, वे अपनी 12 एकड़ जमीन से सालाना लगभग 25 से 30 लाख रुपये की कमाई कर लेते हैं। यह आंकड़ा कुल बिक्री पर आधारित है, लागत घटाने के बाद की शुद्ध आय नहीं। अकेले टमाटर से उन्हें प्रति एकड़ तीन से चार लाख रुपये तक की बिक्री मिल जाती है।
दिसंबर 2023 में ज्ञानेंद्र को रागी की 12.40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार के लिए चौधरी चरण सिंह किसान सम्मान से सम्मानित किया गया था। वे कहते हैं, “ये पुरस्कार मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।”
ज्ञानेंद्र का मानना है कि खेती एक बहुत मुनाफे वाला क्षेत्र है। उनके शब्दों में, “कृषि एक बहुत मुनाफे वाला क्षेत्र है, और मैं सभी को इसे एक गंभीर करियर विकल्प के तौर पर अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता हूं।” खेती में हमेशा से उनकी दिलचस्पी रही है। वे कहते हैं, “खेती हमेशा से मेरा जुनून रही है।”
ड्रिप सिंचाई और हाई टनल जैसी तकनीकों ने ज्ञानेंद्र को कम पानी में ज्यादा फसलें उगाने और साल भर सब्जी उत्पादन जारी रखने में मदद की है। कई फसलों की खेती और एक भरोसेमंद खरीदार से जुड़े होने ने उनकी आमदनी को स्थिर बनाया है, जो पारंपरिक एक-फसली खेती में संभव नहीं था।
ज्ञानेंद्र की खेती का तरीका बताता है कि एक ही समय में कई तरह की सब्जियां और फसलें लगाने से किसी एक फसल में नुकसान होने पर भी पूरी आमदनी पर असर नहीं पड़ता। फूलगोभी, टमाटर, खीरा, लौकी और तोरई जैसी फसलों का अलग-अलग मौसम और अलग-अलग बाजार मांग होने से उन्हें साल भर कोई न कोई उपज बेचने का मौका मिलता रहता है।
सरकार की ओर से हाई टनल और ड्रिप सिंचाई जैसी तकनीकों पर मिलने वाली सब्सिडी ने भी ज्ञानेंद्र जैसे किसानों को महंगे उपकरण अपनाने में मदद की है। मदर डेयरी जैसे संस्थागत खरीदार से सीधा जुड़ाव होने पर किसानों को बिचौलियों पर निर्भरता कम करने और बेहतर दाम पाने का मौका मिलता है।
पिछले दो दशकों में हापुड़ और आसपास के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई किसानों ने गन्ने और गेहूं जैसी परंपरागत फसलों से हटकर सब्जी व बागवानी की खेती अपनाई है। ज्ञानेंद्र का अनुभव बताता है कि नई तकनीक और सही बाजार जुड़ाव मिलने पर कम जमीन से भी अच्छी आमदनी हासिल की जा सकती है, बशर्ते किसान लगातार नई फसलों और तरीकों को आजमाने के लिए तैयार रहें। उनका कहना है कि वे आगे भी नई तकनीक और फसलों को आजमाते रहना चाहते हैं, ताकि आमदनी को और बेहतर बनाया जा सके।
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