विदिशा में सीआईआई ने आयोजित किया एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम, पशुपालक किसानों को दी आधुनिक तकनीकों की जानकारी
07 नवंबर 2026, विदिशा: विदिशा में सीआईआई ने आयोजित किया एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम, पशुपालक किसानों को दी आधुनिक तकनीकों की जानकारी – मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने और पशुपालक किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) द्वारा बुधवार को अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, विदिशा में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें पशुपालक किसानों को डेयरी व्यवसाय की वैज्ञानिक तकनीकों, पशु पोषण, स्वच्छ दुग्ध उत्पादन और पशुओं के बेहतर प्रबंधन की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में सीआईआई-फेस, नई दिल्ली की प्रोजेक्ट मैनेजर सुश्री श्रुति शर्मा, विषय विशेषज्ञ जितेंद्र साहू (पूर्व एनडीडीबी), मोहाली, पंजाब, सीआईआई इंदौर के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर विनय शर्मा, जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र विदिशा की महाप्रबंधक श्रीमती जयंती कुमारी, लीड बैंक अधिकारी भगवान सिंह बघेल और नाबार्ड की डीजीएम श्रीमती जगप्रीत कौर उपस्थित रहीं। इनके अलावा पशु चिकित्सा विभाग के डॉ. आकाश शुक्ला एवं डॉ. संजय भारती, आरसेटी के निदेशक जी.आर. बंसल, कृषि महाविद्यालय गंजबासौदा के वैज्ञानिक, पीएनबी विदिशा के फार्मर ट्रेनिंग सेंटर के निदेशक और जिले के पशुपालक किसान भी शामिल हुए।
स्वच्छ दूध उत्पादन और पशु पोषण की दी जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान विषय विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र सूद ने डेयरी व्यवसाय को लाभदायक बनाने के तरीकों पर जानकारी दी। उन्होंने दूध निकालने की बेहतर और स्वच्छ तकनीक, पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल, संतुलित पशु आहार एवं पोषण के साथ गर्मियों में पशुओं को हीट स्ट्रेस यानी गर्मी के तनाव से बचाने के उपाय बताए। उन्होंने बताया कि पशुओं का उचित स्वास्थ्य प्रबंधन और बेहतर पोषण दूध उत्पादन तथा उसकी गुणवत्ता में सुधार के लिए जरूरी है। इसके लिए डेयरी व्यवसाय में वैज्ञानिक और स्वच्छ तरीकों को अपनाना महत्वपूर्ण है।
पशु किसान क्रेडिट कार्ड योजना की जानकारी दी
नाबार्ड की डीजीएम श्रीमती जगप्रीत कौर ने पशुपालक किसानों को पशु किसान क्रेडिट कार्ड (पशु केसीसी) योजना के बारे में बताया। उन्होंने योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सुविधाओं और पशुपालन गतिविधियों को आगे बढ़ाने में इससे मिलने वाली सहायता की जानकारी दी। वहीं, कृषि महाविद्यालय गंजबासौदा के कृषि वैज्ञानिक एवं आरसेटी निदेशक श्री जी.आर. बंसल ने पशुओं के लिए भूसे का यूरिया उपचार करने की वैज्ञानिक विधि समझाई। उन्होंने कम लागत में पौष्टिक कंसंट्रेट पशु आहार तैयार करने के तरीके भी बताए। उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग करके पशु आहार की लागत घटाई जा सकती है और पशुओं को बेहतर पोषण दिया जा सकता है।
वैज्ञानिक पशु प्रबंधन से बढ़ेगा दूध उत्पादन
प्रशिक्षण में बताया गया कि दूध की गुणवत्ता, उत्पादन क्षमता और पशुओं का स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। डेयरी व्यवसाय को बेहतर बनाने के लिए स्वच्छ दुग्ध उत्पादन, संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य देखभाल और वैज्ञानिक पशु प्रबंधन अपनाना जरूरी है। कार्यक्रम का उद्देश्य पशुपालक किसानों को पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ना था, ताकि वे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर डेयरी गतिविधियों को अधिक लाभदायक बना सकें। प्रशिक्षण में दी गई व्यावहारिक जानकारी से जिले में डेयरी क्षेत्र के विकास, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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