फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उन्नत कृषि यंत्र अपनाएं किसान, नरसिंहपुर में 1,185 सुपर सीडर, 26 बेलर समेत 1,649 कृषि यंत्र उपलब्ध
07 नवंबर 2026, नरसिंहपुर: फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उन्नत कृषि यंत्र अपनाएं किसान, नरसिंहपुर में 1,185 सुपर सीडर, 26 बेलर समेत 1,649 कृषि यंत्र उपलब्ध – मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले में खरीफ फसलों की कटाई प्रारंभ हो गई है। फसल कटाई के बाद नरवाई जलाने से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण, भूमि की उर्वरता में कमी तथा आगजनी से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए किसानों से फसल अवशेष प्रबंधन अपनाने की अपील की गई है। किसान भाई सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, बेलर, मल्चर, रोटावेटर एवं अन्य उन्नत कृषि यंत्रों का उपयोग कर नरवाई का उचित प्रबंधन करें और उसे जलाने से बचें।
नरवाई जलाने पर प्रतिबंध, उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
जिले की संपूर्ण राजस्व सीमा में फसल कटाई के बाद नरवाई में आग लगाने की घटनाओं को प्रतिबंधित किया गया है। इस संबंध में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत आदेश जारी किया गया है। आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 के प्रावधानों के तहत प्रकरण दर्ज करने तथा पर्यावरण क्षतिपूर्ति के प्रावधानों के अनुसार आर्थिक दंड अधिरोपित करने का प्रावधान है।निर्धारित प्रावधानों के अनुसार दो एकड़ से कम भूमि पर नरवाई जलाने पर 2 हजार 500 रुपये, दो एकड़ से अधिक एवं पांच एकड़ से कम भूमि पर 5 हजार रुपये तथा पांच एकड़ से अधिक भूमि पर 15 हजार रुपये का आर्थिक दंड अधिरोपित किया जाएगा।
जिले में उपलब्ध हैं उन्नत कृषि यंत्र
फसल अवशेष प्रबंधन को प्रोत्साहित करने के लिए जिले में वर्तमान में एक हजार 185 सुपर सीडर, 26 बेलर, 225 स्ट्रॉ रीपर तथा 213 सीडर/मल्चर मशीनें उपलब्ध हैं। इनकी उपलब्धता प्रदेश में सर्वाधिक बताई गई है। जिन किसानों के पास ये कृषि यंत्र उपलब्ध हैं, उनकी विकासखंड एवं ग्रामवार सूची प्रकाशित की गई है, ताकि नरवाई प्रबंधन के इच्छुक किसान संबंधित यंत्र संचालकों से संपर्क कर उनका उपयोग कर सकें।
सुपर सीडर और हैप्पी सीडर से करें नरवाई प्रबंधन
किसान सुपर सीडर एवं हैप्पी सीडर जैसे कृषि यंत्रों का उपयोग कर नरवाई जलाए बिना खेत की तैयारी और बुवाई का कार्य कर सकते हैं। सुपर सीडर से फसल अवशेषों का प्रबंधन करते हुए अगली फसल की बुवाई में भी सुविधा होती है। इसके अतिरिक्त बेलर की सहायता से नरवाई को गठ्ठरों में एकत्रित किया जा सकता है। भूसा बनाने वाली मशीनों से भूसा तैयार कर उसका उपयोग पशुओं के चारे के रूप में किया जा सकता है। नरवाई से पेलेट्स बनाने तथा बिजली उत्पादन जैसे कार्यों के लिए भी बेलर संचालकों से संपर्क किया जा सकता है।सुपर सीडर के लिए पोर्टल पर समय-समय पर आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। इच्छुक किसान कृषकबंधु वेबसाइट http://dbt.mpdage.org के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण को नुकसान
नरवाई जलाने से अग्नि दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ती है तथा आसपास के खेतों, खलिहानों में रखी फसलों और जन-धन को नुकसान पहुंच सकता है। आग से मिट्टी में मौजूद कार्बनिक पदार्थ एवं लाभकारी सूक्ष्मजीव प्रभावित होते हैं, जिससे भूमि की उर्वरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही वायु प्रदूषण बढ़ता है और छोटे जीव-जंतुओं को भी नुकसान पहुंचता है। नरवाई जलाने के बजाय उसका उपयोग भूसा बनाने, पशुचारे तथा अन्य उपयोगी उत्पादों के निर्माण में किया जा सकता है।
अधिक जानकारी के लिए यहां करें संपर्क
फसल अवशेष प्रबंधन एवं कृषि यंत्रों की उपलब्धता से संबंधित अधिक जानकारी के लिए कृषि अभियांत्रिकी अधिकारी यू.बी. सिंह के मोबाइल नंबर 8109331223 अथवा नोडल अधिकारी सहायक संचालक कृषि (गन्ना) डॉ. अभिषेक दुबे के मोबाइल नंबर 9575577646 पर संपर्क किया जा सकता है। जिले के सभी किसानों से अपील की गई है कि वे नरवाई में आग न लगाएं, उपलब्ध उन्नत कृषि यंत्रों का उपयोग करें तथा फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन कर पर्यावरण संरक्षण, भूमि की उर्वरता और जन-धन की सुरक्षा में सहभागी बनें।
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