इंदौर में आत्मा योजना अंतर्गत कृषक-वैज्ञानिक परिचर्चा आयोजित
नरवाई प्रबंधन, फसल विविधीकरण और आधुनिक कृषि यंत्रों पर दिया मार्गदर्शन
07 नवंबर 2026, इंदौर: इंदौर में आत्मा योजना अंतर्गत कृषक-वैज्ञानिक परिचर्चा आयोजित – राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (NSRI), इंदौर में गत 4 नवंबर 2026 को आत्मा योजना के अंतर्गत कृषक-वैज्ञानिक परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा में नरवाई प्रबंधन, फसल अवशेषों के वैज्ञानिक निस्तारण तथा फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। इस दौरान कृषि वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों ने किसानों को नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान और इसके सुरक्षित एवं वैज्ञानिक प्रबंधन के आधुनिक तरीकों की जानकारी दी।
परियोजना संचालक (आत्मा) सुश्री शर्ली थॉमस ने बताया कि परिचर्चा का मुख्य उद्देश्य किसानों को फसल अवशेष एवं नरवाई जलाने से रोकने के लिए जागरूक करना तथा उन्हें प्रबंधन के व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक विकल्पों से अवगत कराना है। उन्होंने कहा कि नरवाई का उचित प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है।
संयुक्त संचालक कृषि श्री जितेन्द्र सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए हार्वेस्टर में स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) लगाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि इसके उपयोग से फसल कटाई के साथ ही अवशेषों का बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र की डॉ. अपर्णा वाजपेयी ने नरवाई प्रबंधन एवं फसल कटाई के विभिन्न व्यावहारिक विकल्पों की जानकारी देते हुए बताया कि वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर खेतों में नरवाई जलाने की आवश्यकता को समाप्त किया जा सकता है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता एवं उर्वरा शक्ति भी सुरक्षित रहती है। कृषि अभियांत्रिकी विभाग के श्री भार्गव ने नरवाई प्रबंधन में उपयोगी आधुनिक कृषि यंत्रों, उनके संचालन तथा तकनीकी पहलुओं के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों को उपलब्ध कृषि यंत्रों का उचित उपयोग कर फसल अवशेषों के प्रभावी प्रबंधन के लिए प्रेरित किया।
परिचर्चा में जिले के प्रगतिशील किसानों ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि किस प्रकार वे अपने खेतों में नरवाई का सफलतापूर्वक प्रबंधन कर रहे हैं तथा बहुफसलीय प्रणाली अपनाकर एक ही कृषि वर्ष में विभिन्न फसलों का उत्पादन ले रहे हैं। इस अवसर पर सोयाबीन अनुसंधान संस्थान के डॉ. दुपारे एवं कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण केंद्र के प्राचार्य श्री चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में जिले के अनेक उन्नत एवं प्रगतिशील किसानों ने कृषि वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों से सीधा संवाद किया तथा खेती से संबंधित अपनी जिज्ञासाओं एवं समस्याओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम के अंत में उप परियोजना संचालक (आत्मा) श्रीमती कल्पना वर्मा ने सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों एवं किसानों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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