मनावर : ओंकारेश्वर परियोजना का चतुर्थ चरण शुरू करने एवं अन्य मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा
07 नवंबर 2026, मनावर: मनावर : ओंकारेश्वर परियोजना का चतुर्थ चरण शुरू करने एवं अन्य मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा – मनावर के विधायक श्री हीरालाल अलावा ने ओंकारेश्वर परियोजना के चतुर्थ चरण शुरू करने के साथ ही अन्य समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नाम ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) को सौंपा । इस दौरान बड़ी संख्या में किसान और कार्यकर्ता उपस्थित थे ।
ज्ञापन में उल्लेखित किया गया कि मनावर क्षेत्र में अल्प वर्षा के कारण पेयजल एवं सिंचाई हेतु पानी का संकट उत्पन्न हो गया है । ओंकारेश्वर परियोजना के तीसरे चरण से जो पानी सिंचाई हेतु किसानों को दिया जा रहा है , वह बहुत कम मात्रा में होने से पूरे खेतों में सिंचाई नहीं हो पा रही है । किसानों ने ओंकारेश्वर परियोजना के चतुर्थ चरण शुरू करने की मांग की है ।
ओंकारेश्वर परियोजना के तत्थ्य – ओंकारेश्वर परियोजना की नहरों के विवरण अनुसार नहर ग्रुप 2 में सिसलिया तालाब बड़वाह से पानी दिया जाता है । ग्रुप 1 में सिसलिया तालाब से कारम नदी को पानी दिया जाता है । ग्रुप 2 में कारम नदी से धुलसर ( कुक्षी ) तक पानी दिया जाता है तथा इसी नदी से छितरी , कालीबावड़ी तक खुली नहर से पानी दिया जाता है । छितरी -कालीबावड़ी से लोहारी ( कुक्षी ) तक 68 किमी अंडर ग्राउंड नहर बनाई गई है , इससे 119 गांवों की 29947 हेक्टेयर ज़मीन में सिंचाई एवं पेयजल की आपूर्ति भी इसी में होना प्रस्तावित है । ठेकेदार / अधिकारियों की लापरवाही से पाइप लाइन में जॉइंट सही नहीं होने एवं अलग होने से बार -बार लीकेज हो रहा है । इस वर्ष 86 किमी से आगे पानी नहीं बढ़ पाया है । इसलिए उक्त स्थिति को देखते हुए ओंकारेश्वर परियोजना के चौथे चरण को पूर्ण रूप से प्रारम्भ किया जाए । पाइप लाइन के स्थायी समाधान के लिए ग्राम छितरी से मनावर तक सीसी पाइप लाइन को निकालकर लोहे के पाइप डाले जाएं , ताकि पेय जल एवं सिंचाई के लिए सम्पूर्ण क्षेत्र में नहर का पानी उपलब्ध हो सके ।
उक्त ज्ञापन में अन्य मांगों में क्षेत्र में नकली खाद-बीज की बिक्री ज़ोरों पर होने से किसानों के साथ धोखा हो रहा है । इसके खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई करने , धार जिले में बोरिंग पर प्रतिबंध लगाया गया है , लेकिन किसानों को खेतों में सिंचाई हेतु बोरिंग किए जाने की अनुमति देने तथा वर्तमान महंगाई को देखते हुए किसानों से कपास की खरीदी 12 हज़ार रु / क्विंटल की दर से की जाने की भी मांग की गई ।
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