राज्य कृषि समाचार (State News)

धान की खेती से बदली राह, मछली-मुर्गी पालन और बागवानी से किसान ने बनाया कमाई का नया मॉडल

09 सितंबर 2026, रायपुर: धान की खेती से बदली राह, मछली-मुर्गी पालन और बागवानी से किसान ने बनाया कमाई का नया मॉडल – खेती में नई सोच और नवाचार के जरिए जशपुर जिले के ग्राम रतबा के युवा किसान अंकित लकड़ा ने पारंपरिक धान की खेती को बहुआयामी कृषि मॉडल में बदल दिया है। कभी बारिश के भरोसे धान की खेती करने वाले अंकित अब मछली पालन, मुर्गी पालन, बागवानी और बहुफसली खेती को एक साथ अपनाकर आय के कई स्रोत तैयार कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को कृषि और संबद्ध गतिविधियों से जोड़ने के लिए संचालित योजनाओं का लाभ भी अंकित को मिला है। कृषि और मत्स्य विभाग से जानकारी और मार्गदर्शन लेने के बाद उन्होंने अपने खेत में दो तालाब तैयार कर मछली पालन शुरू किया। तालाब के पानी का इस्तेमाल गर्मी के मौसम में सिंचाई के लिए होने लगा, जिससे अब वे बारिश के अलावा गर्मी में भी खेती कर पा रहे हैं।

तालाब के साथ मुर्गी पालन का भी इंतजाम

अंकित ने दोनों तालाबों के ऊपर मुर्गी पालन के लिए शेड तैयार किया है, जिसकी क्षमता करीब 1,000 से 1,200 मुर्गियों की है। उन्होंने मछली और मुर्गी पालन को आपस में जोड़कर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किया है।

मुर्गियों से निकलने वाला अपशिष्ट तालाब में पहुंचकर मछलियों के लिए प्राकृतिक आहार के रूप में उपयोगी होता है। इससे बाहरी मछली आहार पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिलती है और दोनों गतिविधियां एक-दूसरे को सहारा देती हैं।

तालाब की मेड़ पर फलदार पौधे

अंकित ने तालाब की मेड़ों पर आम, लीची समेत अन्य फलदार पौधे लगाए हैं। इन पौधों की सिंचाई तालाब के पानी से की जाती है। उनके अनुसार, मेड़ पर पेड़ लगाने से मिट्टी को मजबूती मिलती है और कटाव रोकने में मदद मिलती है। वहीं फलदार पौधे आने वाले समय में अतिरिक्त आय का जरिया बनेंगे।

8 लाख रुपये की अनुदान सहायता

अंकित को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत करीब 8 लाख रुपये की अनुदान सहायता मिली है। इसके साथ पॉन्ड लाइनर, पॉलीथिन, बोर, मोटर और मछली आहार जैसी आवश्यक सामग्री की सुविधा भी मिली। विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन से उन्हें आधुनिक तरीके से मत्स्य पालन को आगे बढ़ाने में मदद मिली।

सालभर उत्पादन और आय के अवसर

अब अंकित अपने खेत को किसी एक फसल तक सीमित नहीं रखते। मछली और मुर्गी पालन के साथ अलग-अलग मौसम में विभिन्न फसलों की खेती और बागवानी कर रहे हैं। तालाब से मिलने वाले पानी के कारण गर्मी में भी खेती संभव हो रही है। इससे उन्हें सालभर उत्पादन और आय के अलग-अलग स्रोत विकसित करने का अवसर मिल रहा है।

अंकित लकड़ा का यह मॉडल ग्रामीण युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। उनका अनुभव बताता है कि उपलब्ध भूमि और पानी का बेहतर उपयोग, सरकारी योजनाओं का लाभ, नई तकनीक और कृषि गतिविधियों के समन्वय से खेती को अधिक लाभकारी और रोजगारपरक बनाया जा सकता है।

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