राज्य कृषि समाचार (State News)

बालाघाट में प्राकृतिक एवं जैविक खेती पर मंथन, फसल विविधीकरण और लागत घटाने पर जोर  

02 सितंबर 2026, बालाघाट: बालाघाट में प्राकृतिक एवं जैविक खेती पर मंथन, फसल विविधीकरण और लागत घटाने पर जोर – प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने तथा पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से 31 अगस्त को बालाघाट जिले के विकासखंड वारासिवनी में प्रगतिशील कृषकों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जैविक एवं प्राकृतिक कृषि के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहे किसानों के साथ कृषि विशेषज्ञों एवं अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान जलवायु अनुकूल खेती, रसायन मुक्त उत्पादन, कृषि लागत कम करने और प्राकृतिक संसाधनों के समुचित उपयोग को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर, प्रदूषण मुक्त खेती और फसल विविधीकरण पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि प्राकृतिक एवं जैविक उत्पादों के बेहतर विपणन के माध्यम से किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। इस दौरान किसानों ने प्राकृतिक खेती से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए।

स्वयं का बीज तैयार कर घटाएं खेती की लागत

उप संचालक कृषि फूल सिंह मालवीय ने किसानों को बाजार में मिलने वाले महंगे बीजों पर निर्भरता कम करने और स्वयं का उन्नत बीज तैयार करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अनावश्यक खर्चों में कटौती कर किसान खेती की लागत कम करने के साथ अपनी शुद्ध आमदनी बढ़ा सकते हैं। उन्होंने रबी सीजन में परंपरागत रूप से धान के अधिक रकबे को कम कर अन्य लाभदायक फसलों को अपनाने तथा फसल विविधीकरण पर ध्यान देने की अपील की। इससे किसानों को मौसम और बाजार के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

जीवामृत, ब्रह्मास्त्र और अग्निशास्त्र की दी जानकारी

प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत संचालित गतिविधियों की समीक्षा के दौरान जैविक संसाधन केंद्र में तैयार किए जा रहे विभिन्न जैविक इनपुट्स की जानकारी किसानों को दी गई। किसानों को जीवामृत, ब्रह्मास्त्र और अग्निशास्त्र जैसे प्राकृतिक खाद एवं कीटनाशक तैयार करने की विधि और उनके उपयोग के लाभ बताए गए। इसके साथ ही वेस्ट डीकंपोजर के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण जैविक खाद तैयार करने की तकनीक पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने किसानों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर कम लागत में जैविक इनपुट तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया।

पराली नहीं जलाने की अपील

कृषि विभाग ने किसानों से फसल अवशेष और पराली नहीं जलाने की अपील की। विशेषज्ञों ने बताया कि पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होने के साथ पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। इसके बजाय फसल अवशेषों को खेत में ही सड़ाकर जैविक खाद में परिवर्तित करने की तकनीक अपनाने की सलाह दी गई। बैठक में जैविक भूरी खाद को पैलेट बनाने वाली मशीन के माध्यम से बड़े स्तर पर तैयार करने की तकनीकी जानकारी भी किसानों को दी गई। इससे फसल अवशेषों के बेहतर प्रबंधन और जैविक खेती को बढ़ावा देने में मदद मिलने की बात कही गई।

कार्यक्रम में डॉ. संजीव चौहान ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती के वैज्ञानिक पहलुओं तथा इसके दीर्घकालिक लाभों पर किसानों से विस्तृत चर्चा की। बैठक के अंत में उपस्थित कृषकों ने टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल खेती के अभियान को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

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