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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

तिलहन उत्पादन बढ़ाने की तैयारी, उन्नत बीज और नई तकनीक किसानों तक पहुंचाने पर जोर

खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता के लिए उद्योग और कृषि अनुसंधान संस्थानों के बीच बढ़ेगा तालमेल

02 सितंबर 2026, नई दिल्ली: तिलहन उत्पादन बढ़ाने की तैयारी, उन्नत बीज और नई तकनीक किसानों तक पहुंचाने पर जोर –  देश में तिलहन उत्पादन बढ़ाने और खाद्य तेल के मामले में आत्मनिर्भरता मजबूत करने के लिए कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास तेज किए जा रहे हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद की ओर से राष्ट्रीय परामर्श एवं उद्योग संवाद बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें तिलहन की उन्नत किस्मों और संकरों के साथ जैविक उत्पाद, जैव-कीटनाशक तथा आधुनिक बीज लेपन तकनीकों को बड़े स्तर पर किसानों तक पहुंचाने की संभावनाओं पर चर्चा होगी।

बैठक में बीज कंपनियों, कृषि-व्यवसाय से जुड़ी कंपनियों, नवोदित उद्यमों और उद्यमियों को शामिल किया जाएगा। मुख्य उद्देश्य अनुसंधान संस्थानों में विकसित तकनीकों को प्रयोगशालाओं तक सीमित रखने के बजाय उनका व्यावसायिक विस्तार करना और किसानों तक पहुंच सुनिश्चित करना है। देश में खाद्य तेल की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में घरेलू तिलहन उत्पादन में वृद्धि महत्वपूर्ण हो गई है। इसके लिए ऐसी तकनीकों की जरूरत है, जो कम लागत में बेहतर उत्पादन, फसल सुरक्षा और प्रतिकूल मौसम की स्थिति में फसल की सहनशीलता बढ़ाने में मदद कर सकें।

बीज को मिलेगा सुरक्षा कवच

भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान ने कई उन्नत और पेटेंटयुक्त तकनीकें विकसित की हैं। इनमें बहु-परतीय जैव-पॉलिमर बीज लेपन तकनीक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस तकनीक में बीज के चारों ओर पर्यावरण के अनुकूल जैव-पॉलिमर की परत बनाई जाती है। इसमें सूक्ष्मजीवी जैव-कीटनाशक, प्राथमिक पोषक तत्व और सूक्ष्म पोषक तत्वों को शामिल किया जा सकता है। इससे बीज के अंकुरण के दौरान जड़ क्षेत्र में अनुकूल वातावरण तैयार करने और शुरुआती अवस्था में कीट, रोग तथा सूखे के तनाव से फसल को बचाने में मदद मिल सकती है।

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जैविक उत्पादों पर भी जोर

सतत कृषि को बढ़ावा देने के लिए जैव-कीटनाशकों और अन्य जैविक कृषि उत्पादों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। उद्योग की भागीदारी से इन तकनीकों के उत्पादन और व्यावसायीकरण की राह आसान हो सकती है। कृषि अनुसंधान और उद्योग के बीच मजबूत साझेदारी बनने से उन्नत बीज और नई तकनीक बड़े पैमाने पर किसानों तक पहुंचने की संभावना बढ़ेगी। इससे तिलहन उत्पादन बढ़ाने के साथ आयातित खाद्य तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी मदद मिल सकती है।

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