सरकारी जमीन पर अब नहीं चलेगी लापरवाही, अफसरों की तय होगी जवाबदेही
02 सितंबर 2026, पटना: सरकारी जमीन पर अब नहीं चलेगी लापरवाही, अफसरों की तय होगी जवाबदेही – सरकारी जमीन की पहचान और लंबित राजस्व मामलों के निपटारे में लापरवाही अब अधिकारियों को भारी पड़ सकती है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने जिलों के अधिकारियों की समीक्षा करते हुए साफ कर दिया है कि खराब प्रदर्शन और काम में ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जनता से सीधे जुड़े म्यूटेशन, जमीन की मापी और अतिक्रमण जैसे मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
मंत्री ने सरकारी भूमि की पहचान को सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए संबंधित जिलों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केवल बैठकें करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर परिणाम दिखाई देना चाहिए। बिना खाता-खेसरा वाली जमाबंदियों को दर्ज नहीं रहने देने और सरकारी भूमि से संबंधित म्यूटेशन का प्राथमिकता से निपटारा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। हर अमीन को महीने में 20 मापी का लक्ष्य
विभागीय अधिकारियों ने लंबित मापी के मामलों का बैकलॉग खत्म करने पर जोर दिया है। प्रत्येक अमीन को महीने में कम से कम 20 मापी के मामले निपटाने का लक्ष्य दिया गया है। अभियान बसेरा-02 के तहत पात्र लोगों की पहचान जारी रखने और सर्वे से जुड़े आंकड़ों को अद्यतन करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही किसानों से जुड़ी सेवाओं को गति देने के लिए फार्मर रजिस्ट्रेशन के लंबित अनुमोदन को भी शून्य करने को कहा गया।
समीक्षा में बेगूसराय, दरभंगा, सारण, समस्तीपुर और मुजफ्फरपुर जैसे जिलों का म्यूटेशन कार्य में बेहतर प्रदर्शन सामने आया। वहीं डिजिटल जमाबंदी के मामले में बांका, कैमूर, रोहतास, शेखपुरा और औरंगाबाद का काम सराहा गया।
अतिक्रमण मामलों में भी सख्ती
जन शिकायतों और भूमि अतिक्रमण से जुड़े मामलों को लेकर भी मंत्री ने सख्त रुख अपनाया। ऑफलाइन तरीके से अतिक्रमण के मामलों का निपटारा करने वाले कई अंचल अधिकारियों पर कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। आवेदन खारिज करने की स्थिति में ठोस कारण और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी आवेदक को देने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
सरकार का संदेश स्पष्ट है कि राजस्व से जुड़े काम अब केवल कागजी समीक्षा तक सीमित नहीं रहेंगे। अधिकारियों से समयबद्ध कार्रवाई और जमीन पर परिणाम दोनों मांगे जाएंगे।
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